शरीर में दिख रहे हैं ये संकेत? नजरअंदाज न करें, किडनी की जांच जरूर कराएं
किडनी हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है, जो खून से अपशिष्ट पदार्थों और अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने के साथ मिनरल्स का संतुलन और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। चूंकि किडनी की शुरुआती बीमारियां अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं देतीं, इसलिए कुछ संकेतों को समय रहते पहचानना और डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है।
किन शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें?
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पेशाब के पैटर्न में बदलाव: सामान्य से अधिक या कम पेशाब आना, या खासकर रात में बार-बार उठना।
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पेशाब में झाग: लगातार झागदार पेशाब आना यूरिन में प्रोटीन के रिसाव का संकेत हो सकता है।
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सूजन: शरीर से अतिरिक्त पानी न निकल पाने के कारण पैरों, टखनों या चेहरे पर सूजन आना।
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थकान और कमजोरी: किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने पर ऊर्जा में कमी और लगातार थकान रहना।
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त्वचा में खुजली और रूखापन: किडनी की कार्यक्षमता घटने से त्वचा से जुड़ी ये समस्याएं हो सकती हैं।
किडनी रोग का जोखिम किसे अधिक है?
डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, मोटापा, परिवार में किडनी फेलियर का इतिहास, और बढ़ती उम्र क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) के जोखिम को काफी बढ़ा सकते हैं। ऐसे लोगों को अपनी सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
जांच और बचाव के उपाय
किडनी की सेहत का सटीक आकलन करने के लिए डॉक्टर आमतौर पर eGFR (ब्लड टेस्ट) और uACR (यूरिन टेस्ट) जैसी जांच करवाते हैं। यदि उपर्युक्त लक्षण लंबे समय तक बने रहें या आपके साथ डायबिटीज/हाई बीपी जैसे जोखिम कारक जुड़े हों, तो बिना देर किए चिकित्सक से मिलकर नियमित जांच करवाएं।

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