सरोकार.......................... जहरीली शराब से 34 मौतें: आखिर मौतों का यह सिलसिला कब रुकेगा?......................... डॉ. चन्दर सोनाने
मध्यप्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब से 34 मौतों ने अवैध शराब के कारोबार पर प्रशासनिक नियंत्रण की पोल खोल दी है। जांच में सामने आए आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और प्रदेश में अवैध शराब के 1766 ठिकाने गंभीर सवाल खड़े करते हैं। कार्रवाई के नाम पर कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को हटाने या निलंबित करने के बावजूद बड़े अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं हुई है। जरूरत है कि सरकार अवैध शराब के पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए प्रभावी और कठोर कार्रवाई करे, ताकि ऐसी मौतों का सिलसिला रुक सके।
सरोकार
जहरीली शराब से 34 मौतें: आखिर मौतों का यह सिलसिला कब रुकेगा?
डॉ. चन्दर सोनाने
मध्यप्रदेश के सागर जिले के बंडा और शाहगढ़ क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से जान गंवाने वालों का आंकड़ा बढ़कर 34 तक पहुंच गया है। अभी भी कुछ लोग आईसीयू में भर्ती हैं। इनमें से कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। आखिर जहरीली शराब से मौतों का यह सिलसिला कब रुकेगा? यह बात हर एक के मन में कौंध रही है!
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विदेश से दिल्ली आते ही सबसे पहले सागर पहुंचकर मृतक परिवारों और अस्पताल में भर्ती गरीबों से मिलकर उनका ढांढस बंधाया। इसके साथ ही उन्होंने पूरे शराब कांड की न्यायिक जांच के भी आदेश दिए हैं। यह जांच मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस विष्णु प्रताप सिंह चौहान की अध्यक्षता में होगी।
जहरीली शराब कांड के मुख्य आरोपियों का पहले से लंबा-चौड़ा आपराधिक रिकॉर्ड था। इसके बावजूद वे जेल में होने की बजाय खुलकर जहरीली शराब बनाकर मौत बांट रहे थे। इस पर किसी का नियंत्रण नहीं था। सब राम भरोसे चल रहा था!
जहरीली शराब की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे आश्चर्यजनक और चौंकाने वाले हैं। जांच में यह भी सामने आया कि बरेठी शराब दुकान का लाइसेंस यशवंत सिंह और मुख्य आरोपी मनीष लोधी एक ही व्यक्ति के दो नाम हैं। इस मनीष पर पहले से आबकारी अधिनियम की गैर-जमानती धाराओं में अनेक केस दर्ज थे। एक ही व्यक्ति दो व्यक्तियों के नाम से जब शराब का व्यवसाय कर रहा था, तो इसमें कोई शक नहीं है कि वह बिना आबकारी विभाग और पुलिस की मिलीभगत के यह सब कर रहा हो और यह सब काफी समय से हो रहा था।
जहरीली शराब कांड के अन्य आरोपियों में से जिनके नाम आए हैं, उनके खिलाफ भी पहले से अनेक आपराधिक केस दर्ज थे। इसके बावजूद वे खुलेआम यह सब कर रहे थे। जैसे रवि लखेरा। यह एक अंतरराज्यीय तस्कर है। इसका हाल ही में शॉर्ट एनकाउंटर कर गिरफ्तार कर लिया गया है। यह मनीष को शराब बनाने का फार्मूला बताता था। इस पर पहले से 25 केस दर्ज हैं।
मनीष लोधी ने झूठे नाम से शराब दुकान का लाइसेंस ही ले रखा था। यह मुख्य आरोपी है। इसने जहरीली शराब के लिए स्पिरिट, बोतल और अलग-अलग कंपनियों के नाम के लेबल उपलब्ध कराए। इस पर पहले से 11 मामले दर्ज हैं। इसी प्रकार चंदूराजा ने जन्माष्टमी के दो दिन पहले ही मक्का के खेत में 50 पेटी जहरीली शराब तैयार की थी। उसने इसे सागर गोल्ड के नाम से पैक किया था। इस पर पहले से 5 मामले दर्ज हैं।
पुलिस और आबकारी विभाग किस प्रकार अवैध और जहरीली शराब की बिक्री पर अंकुश लगाते हैं? इसका एक उदाहरण सामने आया है, जो चौंकाने वाला है। बरामठा थाना क्षेत्र के अदावन गांव के श्री बृजेश महाराज ने पुलिस को शिकायत की कि उनके घर के सामने लल्ला बाई लोधी का परिवार अवैध शराब बेचता है। वे दो महीने से पुलिस चौकी से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक शिकायत कर चुके थे। 31 अगस्त को उन्होंने एसपी को दिए सीसीटीवी फुटेज में सुबह और देर रात वाहनों से शराब की पेटियां उतरती हुई दिखाई थीं। इस पर एसडीओपी ने कार्रवाई का भरोसा दिया। किंतु शिकायत के बाद आरोपियों द्वारा उनका कैमरा तोड़ दिया गया। यही नहीं, उनके खिलाफ एससी-एसटी एक्ट का झूठा केस भी दर्ज करा दिया गया। ये है पुलिस कार्रवाई का नमूना!
हाल ही में आबकारी विभाग के आयुक्त श्री दीपक सक्सेना ने यह कबूल किया कि मध्यप्रदेश में अवैध शराब के 1766 ठिकाने हैं, जहां से अवैध शराब बिक रही है। दी गई जानकारी में सागर जिले में ही 84 स्थानों पर अवैध शराब बेचे जाने की जानकारी दर्ज है। ऐसे ही अवैध शराब के अड्डों में से इंदौर में 33 और भोपाल जिले में 30 स्थान बताए गए हैं।
प्रदेश में जिन जिलों में अवैध शराब बिक रही है, उनमें सबसे अधिक 140 जगहों पर रीवा जिले में अवैध शराब का कारोबार खुलेआम हो रहा है। उमरिया जिले में 74 और छिंदवाड़ा जिले में 68 स्थान हैं। इसी प्रकार जबलपुर और गुना में 62-62 स्थानों पर अवैध शराब बेची जा रही है। नर्मदापुरम जिले में 59, राजगढ़ में 57, धार में 56 और मऊगंज में 54 स्थान हैं, जहाँ अवैध शराब बेची जा रही है।
इसके अतिरिक्त दतिया और रतलाम में 47-47, शिवपुरी, भिंड और बालाघाट में 46-46 तथा रायसेन में 45 स्थान हैं, जहां अवैध शराब बिक रही है। मुख्यमंत्री के गृहनगर उज्जैन जिले में 28 स्थानों पर अवैध शराब बेची जा रही है। इसी प्रकार प्रदेश के अन्य जिलों में से कोई भी जिला ऐसा नहीं है, जहां अवैध शराब के अड्डे दहाई संख्या से कम हों।
यहां प्रश्न यह उठता है कि जब आबकारी विभाग के मुखिया ने खुद कबूल किया है कि प्रदेश में 1766 ठिकाने ऐसे हैं, जहां अवैध शराब बिक रही है, तो अभी तक आबकारी विभाग और पुलिस विभाग क्या कर रहे थे? क्या वे अवैध और जहरीली शराब से 34 मौतों का इंतजार कर रहे थे? यह प्रश्न उनसे पूछा जाना चाहिए!
इस जहरीली शराब कांड में कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया है और मुख्य आरोपी अभी तक फरार है। राज्य सरकार द्वारा बंडा एसडीओपी प्रदीप वाल्मीकि को हटाकर पुलिस मुख्यालय, भोपाल भेज दिया गया और सागर की प्रभारी एसडीएम आरती यादव को कलेक्टर कार्यालय, सागर अटैच कर दिया गया है। इसके साथ ही कुछ लोगों को निलंबित कर दिया गया। उनमें सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे, जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते, आबकारी विभाग के उपनिरीक्षक रोशनी उरेते, बंडा थाना प्रभारी राजेंद्र सिंह कुशवाह और गूगरा चौकी प्रभारी पूरनलाल लड़िया हैं। फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी नीरजा श्रीवास्तव को ग्वालियर अटैच कर दिया गया। किंतु किसी भी बड़े अधिकारी पर हाथ नहीं डाला गया! यह बात लोगों को हजम नहीं हो रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सागर के भ्रमण के दौरान मीडिया से यह कहा था कि दोषी कितना ही बड़ा क्यों न हो, उसको बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही अवैध शराब बेचने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसलिए प्रदेश में अवैध शराब के 1766 ठिकानों को नेस्तनाबूद करने के लिए विशेष अभियान चलाए जाने की सख्त आवश्यकता है। जब मुख्यमंत्री ने सागर में यह स्पष्ट रूप से कह दिया है कि अवैध और जहरीली शराब बेचने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के लिए सभी अधिकारियों को फ्री हैंड दे दिया गया है, तो ये अधिकारी किस बात का इंतजार कर रहे हैं?
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डा. चंदर सोनाने मध्यप्रदेश के जनसम्पर्क विभाग से संयुक्त संचालक के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उज्जैन में निवास कर रहे हैं। उनकी सामयिक और सामाजिक विषयों पर विशेष रूचि है और वे “सरोकार” स्तम्भ मे जरिये जनहित से सरोकार रखने वाले मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय व्यक्त करते हैं।

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