मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। एसआईआर और मतदाता सूची में बदलाव को विपक्ष अवैधानिक बताते हुए उनके इस्तीफे और कार्रवाई की मांग कर रहा है, जबकि अब तक पुलिस या अदालत ने कोई जांच शुरू नहीं की है। कानूनी प्रतिरक्षा की सीमा को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री आर.के. सिंह के बयान ने विवाद को और हवा दे दी है। विपक्षी दलों ने देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है, लेकिन इंडिया गठबंधन के भीतर मतभेद भी सामने आए हैं। भाजपा ज्ञानेश कुमार का बचाव कर रही है और पूरा विवाद चुनाव आयोग की निष्पक्षता तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

आपकी बात

ज्ञानेश कुमार को मिली कानूनी इम्युनिटी कितनी बड़ी ढाल ?

  • रंजन श्रीवास्तव

   कुछ समय पहले तक भारतीय जनता पार्टी के सदस्य रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री और नौकरशाह आर.के. सिंह का यह बयान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के लिए परेशानी पैदा करने वाला हो सकता है, जिसमें उन्होंने कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को अभियोजन के खिलाफ कानूनी इम्युनिटी का बचाव नहीं मिलेगा। उनका कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त तथा चुनाव आयुक्तों को अभियोजन के विरुद्ध जो आजीवन कानूनी इम्युनिटी मिली हुई है, वह उनके दायित्वों के निर्वहन के संदर्भ में है, न कि किसी कानून के उल्लंघन के संदर्भ में।

      इससे पहले आर.के. सिंह, जो केंद्र में भाजपा सरकार के खिलाफ लगातार हमलावर हैं, ने कहा था कि पूरे देश में वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी विशेष गहन पुनरीक्षण कराना ही कानूनन गलत था और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को पूरा किए बिना संशोधित वोटर लिस्ट के आधार पर चुनाव कराना भी गलत था।

       वैसे कपिल सिब्बल जैसे कानूनविद का कहना है कि उक्त लीगल इम्युनिटी के कारण ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट नहीं कराई जा सकती है पर उनके खिलाफ कराई जा सकती है जिन्होंने ज्ञानेश कुमार को अवैधानिक कार्य करने का आदेश दिया ।

       दिलचस्प यह है कि अभी तक विपक्ष के आरोपों और एक प्रमुख अंग्रेजी दैनिक में छपी रिपोर्ट को लेकर ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध पुलिस या अदालत ने किसी भी मामले में न तो कोई संज्ञान लिया है और न ही किसी जांच की कोई कार्रवाई शुरू हुई है।

     लेकिन अंग्रेजी दैनिक में छपी रिपोर्ट के बाद विपक्ष ज्ञानेश कुमार को लेकर बुरी तरह हमलावर है और उनके इस्तीफे की ही नहीं, बल्कि उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाने की भी मांग कर रहा है।

     बुधवार,  सितम्बर को नई दिल्ली में हुई इंडिया ब्लॉक की बैठक में भी मुख्य निशाना ज्ञानेश कुमार ही थे, जिनके खिलाफ इंडिया गठबंधन पूरे देश में आंदोलन करने जा रहा है।

       दूसरी तरफ, काकरोच जनता पार्टी भी ज्ञानेश कुमार के ऊपर बुरी तरह हमलावर है तथा उनके खिलाफ 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती से आंदोलन करने जा रही है।

       ऑल इंडिया स्टूडेंट्स यूनियन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, भारत जोड़ो अभियान के संयोजक योगेंद्र यादव, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण तथा कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर पर आंदोलन करने की घोषणा कर दी है।

       यानी, देश भर में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ माहौल है और बहुत से लोग ज्ञानेश कुमार का तत्काल इस्तीफा तथा उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चाहते हैं।

      आगरा में ज्ञानेश कुमार के घर पर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने ‘चोर’ और ‘गद्दार’ जैसे शब्दों को स्प्रे पेंट करके अपना विरोध दर्ज कराया। स्वतंत्र भारत के इतिहास में ऐसा विरोध किसी भी चुनाव आयुक्त के खिलाफ कभी नहीं हुआ।

     भाजपा की तरफ से ज्ञानेश कुमार का लगातार बचाव किया जा रहा है। और यह स्वाभाविक भी है। विपक्ष का आरोप यही है कि ज्ञानेश कुमार अपने कृत्यों से भाजपा को चुनाव में लाभ पहुंचा रहे थे।

       भाजपा के लिए यह राहत की बात हो सकती है कि इंडिया गठबंधन की बैठक में आम आदमी पार्टी ने हिस्सा नहीं लिया तथा डीएमके भी इस बैठक से दूर रही। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी इस बैठक से दूर रहे, हालांकि उन्होंने समाजवादी पार्टी के दो सांसदों को इस बैठक में भेजकर इंडिया गठबंधन को यह भरोसा दिलाया कि वह इस गठबंधन का हिस्सा हैं।

     यह भी सवाल उठ रहा है कि अगर अखिलेश यादव आज व्यस्त थे तो इंडिया गठबंधन की बैठक में अपनी पत्नी और सांसद डिंपल यादव या किसी अन्य पार्टी के वरिष्ठ नेता को भेज सकते थे। पर उन्होंने ऐसा नहीं किया। हालांकि, बैठक खत्म होते-होते अखिलेश यादव ने एक ट्वीट करके गठबंधन की मजबूती पर मुहर लगाने की कोशिश की।

     आम आदमी पार्टी ने यह फिर से स्पष्ट कर दिया है कि वह इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है, लेकिन ज्ञानेश कुमार को हटाने के मुद्दे पर वह गठबंधन के साथ है।

     शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे भी बैठक में भाग लेने दिल्ली नहीं पहुंचे, लेकिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उन्होंने अपनी उपस्थिति बैठक में दर्ज कराई। पर वह कांग्रेस के रवैये से खुश नहीं हैं। उद्धव ठाकरे ने बैठक में यह कहा कि कांग्रेस की ‘एकला चलो’ नीति से गठबंधन में दिक्कत आएगी।

      कुल मिलाकर, भले ही इंडिया गठबंधन में दरारें दिख रही हैं, लेकिन ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर लगभग सभी विपक्षी दल एकमत हैं कि ज्ञानेश कुमार ने एसआईआर के माध्यम से और वोटर लिस्ट में बदलाव को अवैधानिक रूप से केंद्रीकृत करके भाजपा को कई राज्यों के चुनावों में अवैध रूप से फायदा पहुंचाया तथा वह लोकतंत्र को खत्म करने में भाजपा की मदद कर रहे हैं।

      विपक्ष अगर कमजोर है भी तो ज्ञानेश कुमार की दिक्कत यह हो सकती है कि वे उस जेन-जी की काकरोच जनता पार्टी’ से कैसे निपटें, जो कि पंजीकृत राजनीतिक दल है ही नहीं जो चुनावों के लिए चुनाव आयोग के दरवाजे पर दस्तक दे। उन्होंने अपनी ताकत धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा करवा के दिखा दिया है।

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श्री रंजन श्रीवास्तव  वरिष्ठ पत्रकार हैं। अंग्रेजी दैनिक हिंदुस्तान टाईम्स और फ्री प्रेस, भोपाल के साथ अन्य प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में ब्यूरो प्रमुख और वरिष्ठ पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं देने के बाद इन दिनों भोपाल में निवास और सामयिक मुद्दों व राजनीति पर नियमित स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं।  सम्पर्क.. 94253-51688,   ईमेल - ranjansrivastava1@gmail.com

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