नजरियो ......................खाड़ी जंग 2026 : वधतो संकट अर ब्रिक्स बैठक....................... अरूण कुमार जैन
नजरियो
खाड़ी जंग 2026 : वधतो संकट अर ब्रिक्स बैठक
अरूण कुमार जैन
खाड़ी में चाल री जंग अब खतरनाक मोड़ प आगी है। फरवरी 2026 का आखर में अमेरिका-अर इजरायल ने ईरान ऊपर हमला शुरू करया थो। अब ई जंग सातवां महीना में चल री है। लड़ाई बे मोर्चां प एक साथ लड़ी जा री है—एक होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका अर ईरान के बीच, अर दूसरो यमन में सऊदी अरब अर हूती विद्रोहियां के बीच।
पाछला दो-तीन दिन में हिंसा हद पार कर गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान का पांच तेल टैंकर डुबो दिये। जहाजां में आग लागती दिखाड़तो वीडियो भी जारी करयो गयो है। अमेरिका को कहणो है कि ई टैंकर ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) का गुप्त नेटवर्क सूं जुड़ा है। पाछला दो दिन में अमेरिकी युद्धपोत ऊपर बैलिस्टिक मिसाइल हमला होया थो, उका जवाब में ई कार्रवाई करी गई। पाछला एक हफ्ता में अमेरिका 10 ईरानी टैंकर नष्ट कर चुक्यो है।
जवाब में ईरान ने होर्मुज नजदीक 10 जहाजां ऊपर हमला करवा को दावा करयो है। एक खबर मुताबिक इराकी ईंधन तेल ले जतो 20 लाख बैरल को टैंकर ‘न्यू एंड्रोस’ ड्रोन हमला पाछी आग में धधक उठ्यो। दुबई नजदीक लंगर डाले ‘हरक्यूलिस स्टार’ ऊपर हमला में एक नाविक की जान चली गई। ईरान ने कुवैत अर बहरीन का बंदरगाहां में खड़ा टैंकरां ने भी धमकी दी है।
इधर दूसरो मोर्चो भी खुल गयो है। ईरान समर्थित हूतियां ने मंगलवार ने सऊदी अरब का चार शहर—आभा, खमीस मुशैत, जाजान अर नजरान—ऊपर दर्जनां बैलिस्टिक मिसाइल अर ड्रोन दाग्या। सऊदी गठबंधन का प्रवक्ता मुताबिक 73 सूं ज्यादा नागरिक घायल होया अर तेल ठिकाणां में आग लाग गई। जवाब में सऊदी अरब ने यमन का जुबाह अर ताइज में हवाई हमलां करया।
इको सीधो असर तेल ऊपर पड़्यो है। ब्रेंट कच्चो तेल 100 डॉलर प्रति बैरल सूं ऊपर निकल गयो है। जुलाई पाछी इको ई सबसे ऊंचो भाव है।
होर्मुज जलडमरूमध्य सूं दुनिया को करीब 20 फीसदी तेल गुजरै है। ईरान ने वहां जहाजां की आवाजाही रोक राखी है। अब उधर एक नयो ‘रिस्ट्रिक्टेड जोन’ बनाण की बात भी कर रियो है। सऊदी अरब होर्मुज ने बचण खातर आपरो ज्यादातर तेल लाल सागर का यानबू बंदरगाह सूं भेजण लाग गयो थो। पण हूतियां का लाल सागर में हमलां सूं ई रस्तो भी खतरा में पड़ गयो है।
अब इको असर दुनिया भर में तेल अर गैस की सप्लाई प पड़सी। भारत प भी इको सीधो असर होसी। सप्लाई घटसी, ढुलाई महंगी होसी अर बाजार में महंगाई अउर वधसी।
अमेरिका ईरान का तेल निर्यात रोक के उ प आर्थिक दबाव बनाणो चाहै है, जासूं ईरान मिसाइल कार्यक्रम ऊपर बातचीत खातर राजी हो जावे। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ कह दियो—“ईरान जब भी म्हारा जहाज ऊपर हमला करसी, उने टैंकर गंवाणा पड़सी।”
दूसरी तरफ ईरान का स्पीकर मोहम्मद बाकेर कालिबाफ ने चेतावनी दी है कि खाड़ी की तेल-गैस उत्पादन कड़ी पूरी तरह जोखिम में है। अमेरिकी कंपनियां भी इका असर सूं बची नीं है।
ईरान को मानणो है कि व्यापारिक जहाजां ऊपर हमला कर के शिपिंग कंपनियां ऊपर दबाव बनाया जा सकै है। जासूं वे अमेरिका प टैंकरां ऊपर हमला रोकण खातर दबाव बनावै।
सऊदी अरब 2022 पाछी सूं यमन की जंग सूं बाहर निकलणो चाहतो थो। एक समझौता पाछी उने आपरो लक्ष्य हासिल भी कर लियो थो। पण हूतियां ने उने फेर जंग में खींच लियो। यमन का राजदूत को कहणो है कि हूती जान-बूझकर ई मामला ने सऊदी-यमनी जंग को रूप देणो चाहै है। ईरान समर्थित हूती लड़ाका नीं चाहै कि सऊदी अरब चैन सूं बैठ्यो रहै।
दोन्नों पक्ष पूरा युद्ध नीं चाहै। लड़ाई में जेतलो नुकसान अर गतिरोध बढ़्यो है, उको असर दोनों का देशां की अर्थव्यवस्था अर सामरिक हालत प पड़्यो है। अब ई गतिरोध दोनों खातर भारी पड़ण लाग गयो है। जद एक पक्ष पाछो हटण की सोचै है, तो दूसरो पक्ष दबाव बढ़ाण लाग जावै है।
फेर भी ई बात सही है कि दोनों पक्ष परदे पाछी बातचीत चालू राख्या है। रूस-अर यूक्रेन जंग की हालत अर उका नतीजा दुनियासूं छुप्या नीं है। अभी हाल में भारत की मध्यस्थता भी परदे पाछी जोर-सोर सूं चालू है। भारत को नजरियो साफ है—जंग सूं काई समस्या हल नीं होय।
फिलहाल नई दिल्ली में चाल री ब्रिक्स बैठक ऊपर सबकी नजर है। आस है कि बैठक की आड़ में दुनिया का बड़े नेता खुल के बात करसी। अगर ई बातचीत शांति की राह खोल देवे, तो ई विश्व शांति खातर एक मोटो कदम साबित हो सकै है। आने वालो समय में ई बैठक मील को पत्थर बनै—ई सबकी आस है।
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श्री अरूण कुमार जैन भारतीय राजस्व सेवा का सेवानिवृत्त सहायक आयुक्त है। अभी इंदौर में रहै है। समसामयिक विषयां का साथे व्यंग्य अर कविता भी लिखै है। श्री जैन की कई किताबां प्रकाशित हो चुकी है।

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