यात्रा संस्मरण……….

       पेरिस का हर पत्थर कहता है अपनी कहानी

                        डा. चन्दर सोनाने

     पिछले दिनों यूरोप के भ्रमण का सुअवसर प्राप्त हुआ। सबसे पहले फ्रांस की जमीन पर पेरिस में हम 64 लोगों ने कदम रखा। तो हम सबसे पहले संक्षिप्त में जानते हैं, फ्रांस का इतिहास, सभ्यता और संस्कृति के बारे में। फ्रांस का इतिहास, सभ्यता और संस्कृति अत्यंत समृद्ध और प्राचीन है, जो सेल्टिक गॉल जनजातियों और रोमन विजय से शुरू होकर मध्यकालीन राजशाही, 1789 की फ्रांस की क्रांति, और एक आधुनिक लोकतांत्रिक गणराज्य तक फैली हुई है। कला, दर्शन, साहित्य और खान-पान ने इसे वैश्विक सांस्कृतिक केंद्र बनाया है।

फ्रांस का इतिहास,सभ्यता और संस्कृति                 

      ईसा पूर्व पहली शताब्दी में जूलियस सीजर ने इसे रोमन साम्राज्य का हिस्सा बनाया, जिससे लातीनी भाषा और संस्कृति का प्रसार हुआ। पाँचवीं शताब्दी में जर्मन मूल के फ्रैंक लोगों ने इस क्षेत्र पर अधिकार किया, जिसके नाम पर इसका नाम फ्रांस पड़ा। राजा शार्लमान और बाद में सौ साल के युद्ध (इंग्लैंड के खिलाफ) ने देश की सीमाओं को गढ़ा। फ्रांसीसी ऐतिहासिक क्रांति ने राजशाही को समाप्त किया और पूरी दुनिया को स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का संदेश दिया।

       नेपोलियन का शासन, प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के झटके और उसके बाद यूरोपीय संघ के गठन में फ्रांस एक अग्रणी देश के रूप में उभरा। फ्रांस का संविधान देश को एक धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और सामाजिक गणराज्य घोषित करता है। यहाँ सार्वजनिक जीवन में धर्मनिरपेक्षता पर विशेष बल दिया जाता है। यहाँ की अधिकांश जनसंख्या शहरी है और जीवन स्तर उच्च श्रेणी का है। पेरिस को दुनिया की कला और फैशन की राजधानी माना जाता है। विक्टर ह्यूगो, मोनेट और वोल्तेयर जैसे महान विचारकों और चित्रकारों ने इसे जन्म दिया। फ्रेंच भाषा न सिर्फ फ्रांस की राष्ट्रीय भाषा है, बल्कि इसे कूटनीति और कला की एक सुरीली और प्रतिष्ठित भाषा माना जाता है।

एफिल टावर ने किया आश्चर्यचकित 

     फ्रांस की राजधानी पेरिस है। यहाँ की भाषा फ्रेंच है और मुद्रा यूरो है। फ्रांस की कुल जनसंख्या केवल 7 करोड़ ही है। फ्रांस का सबसे आकर्षण का केन्द्र एफिल टावर है। यह दुनिया के 7 आश्चर्यों में एक गिना जाता है। यह अपनी शानदार भव्यता और तकनीक का बेजोड़ उदाहरण है। यहाँ वर्तमान में दो मंजिल तक जाने की ही अनुमति है। बहुत बड़ी लिफ्ट से जाने की व्यवस्था देख पर्यटक आश्चर्यचकित रह जाते हैं । एफिल टावर से पूरे पेरिस को निहारा जा सकता है। यहाँ पहली बार देखा कि सूर्यास्त रात को 10.30 बजे और सूर्योदय सुबह 5.30 बजे हो जाता है। इस प्रकार 17 घंटे का दिन हमने जीवन में पहली बार पेरिस में देखा।

सेंट डिएगो चौक

   पेरिस में हमने अपने जीवन का पहली बार इतना बड़ा चौक देखा । उसका नाम सेंट डिएगो चौक है । यहाँ से अलग-अलग चारों तरफ 12 रास्ते जाते हैं। इसका नाम एक जनरल के नाम सीडीजी पर रखा गया। पेरिस के एयरपोर्ट का भी यही नाम है। यहीं पर हमें एक अति होशियार गाइड श्री मनेन्द्र सिंह मिले। उन्होंने हमें फ्रांस और पेरिस के इतिहास, भूगोल, सभ्यता, संस्कृति, युद्ध, शाही विरासत आदि के बारे में अत्यन्त रोचक और महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने यात्रा का आनंद दोगुना कर दिया।

ओबिलएक्स और विक्ट्री गेट

        पेरिस में हमें गाइड ने पेन्सिल के आकार की एक सोने की नोंक ओबिलएक्स दिखाई। उन्होंने इसकी महत्ता भी समझाई। किन्तु अधिकतर को कुछ समझ में नहीं आया। उन्होंने हमें पेरिस में ही विक्ट्री गेट भी बताया, जो अत्यन्त भव्य था। यह भारत के इंडिया गेट की तरह था, जिस पर विभिन्न युद्धों में शहीद हुए सैनिकों के नाम अंकित थे। गाइड ने ही पेरिस के बारे में हमें बताया कि यहां का हर पत्थर अपनी कहानी खुद कहता है। भव्य और आकर्षक पेरिस को देखने के बाद हम सब स्विट्जरलैंड के लिए निकले ।

स्विट्जरलैंड का इतिहास,सभ्यता और संस्कृति

     स्विट्जरलैंड का इतिहास 1291 में स्विस फेडरेशन की स्थापना से जुड़ा है। वियना कांग्रेस (1815) ने इसकी अंतरराष्ट्रीय तटस्थता को मान्यता दी। यहाँ की संस्कृति जर्मन, फ्रेंच और इतालवी प्रभावों का एक अनूठा मिश्रण है। यह देश अपनी समृद्ध घड़ियों की कला, स्वादिष्ट चॉकलेट और शानदार आल्प्स पर्वतों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। 1 अगस्त 1291 को तीन कैंटनों (राज्य) ने मिलकर एक संधि की, जिसे स्विट्जरलैंड के राष्ट्र की नींव माना जाता है। 1815 के बाद से स्विट्जरलैंड ने आधिकारिक तौर पर युद्धों से दूर रहने और तटस्थ रहने की नीति अपनाई, जिसके कारण यह दोनों विश्व युद्धों से अछूता रहा। यहाँ चार आधिकारिक भाषाएं बोली जाती हैं , जर्मन, फ्रेंच, इतालवी और रोमांश। यहाँ की विश्व प्रसिद्ध स्विस चॉकलेट काफी लोकप्रिय हैं। स्विट्जरलैंड की आबादी वर्तमान में 9 करोड़ है। यहाँ की मुद्रा फ्रेंक है। स्विट्जरलैंड अपने प्राकृतिक सौन्दर्य और बर्फ से आच्छादित ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है।

लुसेर्न सिटी के बाजार

       स्विट्जरलैंड की लुसेर्न सिटी तथा बाजार अत्यन्त भव्य और आकर्षक है। यहाँ सड़क पर ट्रेन चलते हुए देखकर सबको आश्चर्य हुआ। यहाँ यातायात की प्रमुख सुविधा ट्राम है, जो दो लंबी बसों के बराबर होती है।

एक बगीचा, जहाँ है यश चोपड़ा का स्टैचु

    अब हमने देखा इंटरलिंकन शहर। नहर के दोनों तरफ सिटी होने के कारण इसका नाम इंटरलिंकन पड़ा। दोनों शहरों को जोड़ने वाला पुल यहाँ बड़ा प्रसिद्ध है। कारण उसका यह है कि फिल्म दिल वाले दुल्हनिया ले जायेंगे में शाहरूख खान इस पुल पर खड़े होकर काजोल से मन ही मन कहता है कि यह मुझसे प्यार करती होगी तो पलटेगी... पलट..पलट। यह सीन बहुत लोकप्रिय हुआ था तो इस पुल पर खड़े होकर हम सबने खूब फोटो खींचे। यहीं पर पास में एक शानदार बगीचा है। उसका नाम है, कुर्साल गार्डन। इस बगीचे में भारतीय फिल्म निर्माता निर्देशक श्री यश चोपड़ा का खड़ा हुआ स्टैचु है। इसका कारण यह है कि यश चोपड़ा ने अपनी फिल्मों के माध्यम से स्विट्जरलैंड के प्राकृतिक सौंन्दर्य को अपनी फिल्मों के माध्यम से दुनियाभर में फैलाया था। इस कारण यश चोपड़ा को आदर और सम्मान देने के लिए बगीचे में उनका आदमकद स्टैचु लगा है। इसके पास खड़े होकर हम सबने भी खूब फोटो खींचे।  

टिटलिस माउंट  

    स्विट्जरलैंड का अत्यन्त प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है मांउट टिटलिस। समुद्र सतह से 10 हजार फीट ऊपर टिटलिस की भव्य पहाड़ी और उसकी बर्फीली चोटियां है, जो सबका मन मोह लेती है। यहाँ आकर्षक और मन मोहने वाले देवदार के वृक्ष, मखमली घास सबको भा जाती है। माउंट टिटलिस जाने के लिए हम केबल तार से गए और एक ऐसा गोडोंला से भी ऊपर गए जो 360 डिग्री घूम रहा था । और वह इतना बड़ा था कि उसमें करीब 100 लोग खड़े हो सकते थे। उसके बाद ऊपर जाकर सबको मिली बर्फ से बिछी शानदार पहाड़ियाँ। इसका आनंद सबने लिया। सबने फिल्मों की तरह हाथ में बर्फ लेकर एक दूसरे पर फेंकी और ढेर सारी फोटो खीची।

यूरोप की सबसे ऊँची पर्वत चोटी माउंट जंगफ्राऊ

    यूरोप की सबसे ऊँची चोटी के रूप में प्रसिद्ध है, मांउट जंगफ्राऊ। यह लगभग 14,000 फीट ऊंची है। किन्तु पर्यटकों को 11,716 फीट ऊपर तक जाने की ही अनुमति है। किन्तु आश्चर्य की बात यह है कि हमने यहाँ पहली बार यह देखा कि मांउट जंगफ्राऊ जाने के लिए ऊँची पहाड़ियों को काटते हुए दो अलग-अलग ट्रेन पहाड़ पर जाती है । इससे हमने सफर किया। यह हमारा एक अलग ही अनोखा रोमांचक सफर था। ट्रेन से सफर करते हुए चारों तरफ फैली बर्फीली पहाड़ियाँ, पर्वत श्रृंखलाएँ और फूलों ने सबका मन मोह लिया।

    मांउट जंगफ्राऊ पहुंचने पर वहाँ करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी बर्फ की गुफा है, जिसमें अनेक आकर्षक मूर्तियां बनाई गई है। यहाँ का तापमान करीब 0 डिग्री सेंटीग्रेड का भी हमने अनुभव किया और अपने-अपने गर्म कपड़े निकाल लिए। सबका बर्फ की लंबी गुफा में घुमना एक रोमांचक अनुभव था। इसका सबने आनंद लिया और यात्रा में गर्म कपड़े लाना सार्थक सिद्ध हुआ। इस प्रकार हमारा फ्रांस का 2 दिवसीय और स्वीटजरलैंड का 3 दिवसीय सफर सानंद सम्पन्न हुआ।

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डा. चंदर सोनाने मध्यप्रदेश के जनसम्पर्क विभाग से संयुक्त संचालक के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उज्जैन में निवास कर रहे हैं। उनकी सामयिक और सामाजिक विषयों पर विशेष रूचि है और वे “सरोकार” स्तम्भ मे जरिये जनहित से सरोकार रखने वाले मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय व्यक्त करते हैं।