आगामी 15 अगस्त से नीदरलैंड और बेल्जियम की संयुक्त मेजबानी में शुरू होने वाले हॉकी विश्व कप में इस बार केवल टीमें ही नहीं, बल्कि पूरे टूर्नामेंट का गणित और खेलने का फॉर्मेट पूरी तरह बदला हुआ नजर आएगा। इस प्रतिष्ठित पुरुष और महिला विश्व कप से 'क्वार्टर फाइनल' के दौर को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। अब खिताब तक का सफर तय करने के लिए सभी टीमों को दो कड़े ग्रुप चरणों से गुजरना होगा। ऐसे में शुरुआती लीग मुकाबलों की अहमियत पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। आइए बेहद आसान भाषा में समझते हैं कि यह नया फॉर्मेट कैसे काम करेगा, भारतीय टीमों का रास्ता कैसा होगा और सेमीफाइनल तक पहुंचने के लिए क्या रणनीति अपनानी होगी।

हॉकी विश्व कप में क्या और क्यों बदला है?

वर्ष 2026 के हॉकी विश्व कप में सबसे बड़ा बदलाव क्वार्टर फाइनल का हटना है। पिछले कई संस्करणों में ग्रुप स्टेज के बाद नॉकआउट दौर यानी क्वार्टर फाइनल के जरिए सेमीफाइनलिस्ट टीमों का फैसला होता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा।

पुरुष और महिला दोनों वर्गों के इस विश्व कप में कुल 16 टीमें हिस्सा ले रही हैं। इन सभी टीमों को चार अलग-अलग पूल— A, B, C और D में बांटा गया है। हर पूल में चार-चार टीमें होंगी और प्रत्येक टीम अपने ग्रुप की बाकी तीन टीमों के खिलाफ एक-एक मुकाबला खेलेगी। यानी पहले चरण में हर टीम को कुल तीन मैच खेलने का अवसर मिलेगा। इन सभी मैचों के समापन के बाद प्रत्येक पूल की अंतिम रैंकिंग तय की जाएगी।

पहले चरण में टॉप-2 में रहना क्यों है बेहद जरूरी?

यही इस नए और अनूठे फॉर्मेट का सबसे अहम और निर्णायक हिस्सा है:

  • चारों पूलों से केवल शीर्ष दो (Top-2) टीमें ही अगले दौर में प्रवेश करेंगी।

  • तीसरे और चौथे स्थान पर रहने वाली टीमें टूर्नामेंट से बाहर तो नहीं होंगी, लेकिन उनका खिताब जीतने का सफर वहीं समाप्त हो जाएगा और वे आगे 9वें से 16वें स्थान की रैंकिंग के लिए खेलेंगी।

भारतीय टीमों के ग्रुप्स:

  • पुरुष टीम: भारत को पूल डी में इंग्लैंड, पाकिस्तान और वेल्स के साथ रखा गया है।

  • महिला टीम: भारतीय महिला टीम भी पूल डी में चीन, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के साथ शामिल है।

यही वजह है कि भारत के लिए शुरुआती तीनों मुकाबले बेहद महत्वपूर्ण और करो या मरो जैसे होंगे।

पुरुष और महिला विश्व कप के सभी ग्रुप्स और आयोजन स्थल

पुरुष हॉकी विश्व कप ग्रुप्स

पूल टीमें मुख्य आयोजन स्थल
पूल A नीदरलैंड, अर्जेंटीना, न्यूजीलैंड, जापान नीदरलैंड
पूल B बेल्जियम, जर्मनी, फ्रांस, मलेशिया बेल्जियम
पूल C ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, आयरलैंड, दक्षिण अफ्रीका बेल्जियम
पूल D इंग्लैंड, भारत, पाकिस्तान, वेल्स नीदरलैंड

महिला हॉकी विश्व कप ग्रुप्स

पूल टीमें मुख्य आयोजन स्थल
पूल A नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, चिली, जापान नीदरलैंड
पूल B अर्जेंटीना, जर्मनी, अमेरिका, स्कॉटलैंड बेल्जियम
पूल C बेल्जियम, स्पेन, न्यूजीलैंड, आयरलैंड बेल्जियम
पूल D चीन, इंग्लैंड, भारत, दक्षिण अफ्रीका नीदरलैंड

दूसरे चरण में कैसे बनेगा नया ग्रुप?

पहला चरण समाप्त होने के बाद सभी टीमें अपने प्रदर्शन और अंकों के आधार पर चार नए पूलों में बांटी जाएंगी:

  • पूल E: पूल A और D की पहले और दूसरे स्थान पर रहने वाली टीमें।

  • पूल F: पूल B और C की पहले और दूसरे स्थान पर रहने वाली टीमें।

  • पूल G: पूल A और D की तीसरे और चौथे स्थान पर रहने वाली टीमें।

  • पूल H: पूल B और C की तीसरे और चौथे स्थान पर रहने वाली टीमें।

यदि भारतीय पुरुष या महिला टीम अपने पूल डी में टॉप-2 में रहती है, तो वह सीधे पूल ई में पहुंच जाएगी, जहां उसका मुकाबला पूल ए से आने वाली दो मजबूत टीमों से होगा।

सबसे बड़ा ट्विस्ट: पुराने मैच का नतीजा भी साथ जाएगा

इस नए फॉर्मेट का सबसे दिलचस्प और रणनीतिक नियम यह है कि दूसरे चरण में टीमों को तीन नए मुकाबले तो खेलने होंगे, लेकिन अगर एक ही शुरुआती पूल की दो टीमें आपस में भिड़ चुकी हैं और वे दूसरे चरण में भी पहुंचती हैं, तो उनके बीच वह मुकाबला दोबारा नहीं खेला जाएगा। पहले चरण में हुए उस मैच का परिणाम और अंक सीधे दूसरे चरण की अंक तालिका में कैरी-फॉरवर्ड (साथ) कर दिए जाएंगे।

  • उदाहरण के लिए: यदि भारत और इंग्लैंड दोनों अपने शुरुआती पूल डी से टॉप-2 में रहकर आगे बढ़ते हैं और भारत ने पहले चरण के लीग मैच में इंग्लैंड को हरा दिया था, तो उस जीत के पूरे 3 अंक दूसरे चरण की अंक तालिका में भी भारत के खाते में जुड़े रहेंगे। यही कारण है कि भारत के लिए सिर्फ अगले दौर में पहुंचना ही काफी नहीं है, बल्कि शुरुआती पूल मैचों में भी हर हाल में जीत दर्ज करना अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।

दूसरे चरण से सेमीफाइनल का टिकट कैसे मिलेगा?

नया सुपर-राउंड यानी पूल E और F ही खिताब की असली और सीधी दौड़ तय करेंगे। इन दोनों पूलों से शीर्ष दो टीमें सीधे सेमीफाइनल में पहुंचेंगी।

सेमीफाइनल के मुकाबले इस प्रकार तय होंगे:

  • पूल E की नंबर-1 टीम बनाम पूल F की नंबर-2 टीम

  • पूल F की नंबर-1 टीम बनाम पूल E की नंबर-2 टीम

चूंकि बीच में कोई क्वार्टर फाइनल मुकाबला नहीं होगा, इसलिए दूसरे चरण के इन ग्रुप्स में शीर्ष दो स्थान हासिल करना ही सेमीफाइनल में पहुंचने का एकमात्र जरिया होगा। इसके अलावा, पूल G और H की टीमें 9वें से 16वें स्थान के लिए और बाकी टीमें 5वें से 8वें स्थान के लिए प्लेऑफ खेलेंगी।

कोच की राय: क्रेग फुल्टन और श्योर्ड मारिज्ने क्या सोचते हैं?

  • क्रेग फुल्टन (भारतीय पुरुष टीम के मुख्य कोच): उन्होंने नए फॉर्मेट में शुरुआती मुकाबलों की अहमियत पर जोर देते हुए कहा, "इस टूर्नामेंट का फॉर्मेट काफी बदल चुका है। अब कोई क्वार्टर फाइनल नहीं है, इसलिए पूल मैचों का महत्व बहुत ज्यादा बढ़ गया है। शीर्ष दो टीमें ही आगे जाएंगी और आपस में हुए मैच के अंक भी साथ जाएंगे। यदि आप शुरुआती चरण में मजबूत टीमों को हरा देते हैं, तो सेमीफाइनल की राह बहुत आसान हो जाती है।"

  • श्योर्ड मारिज्ने (महिला टीम के पूर्व/विशेषज्ञ कोच): हालांकि, क्वार्टर फाइनल हटाए जाने पर उनकी राय थोड़ी अलग रही। उन्होंने माना कि यह प्रारूप दिलचस्प तो है, लेकिन उनकी व्यक्तिगत पसंद हमेशा से रोमांचक नॉकआउट मुकाबले देखने की रही है।

कब और कहां खेले जाएंगे फाइनल मुकाबले?

  • महिला विश्व कप: इसका खिताबी मुकाबला और कांस्य पदक मैच 29 अगस्त को नीदरलैंड में खेला जाएगा।

  • पुरुष विश्व कप: इसका फाइनल और तीसरा स्थान का मैच 30 अगस्त को बेल्जियम के मैदान पर आयोजित होगा।

कुल मिलाकर, इस नए और कड़े फॉर्मेट में विश्व कप की ट्रॉफी उठाने वाली टीम को शुरुआती लीग चरण से लेकर अंत तक लगातार उत्कृष्ट और अनुशासित प्रदर्शन करना होगा। भारत जैसी मजबूत दावेदार टीमों के लिए पहले पूल में टॉप-2 और फिर सुपर-राउंड में शीर्ष दो में जगह बनाना ही इस विश्व कप में सफलता की सबसे बड़ी कुंजी साबित होगा।