बजट 2026–27…….

             शिक्षा में नई सोच, नया रास्ता

  • प्रो. मनोज कुमार तिवारी एवं प्रो. बिपिन कुमार 

      केंद्रीय बजट 2026–27 में उच्च शिक्षा को लेकर सरकार की सोच में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है। अब उच्च शिक्षा को केवल एक सामाजिक या कल्याणकारी खर्च नहीं माना गया है, बल्कि इसे देश की आर्थिक प्रगति का एक मजबूत आधार के रूप में मान्यता दी गई है। यह संकेत देता है कि सरकार मानव संसाधन को भारत की सबसे बड़ी ताकत मान रही है।

      वर्तमान समय में जब दुनिया में युद्ध, आर्थिक अनिश्चितता, नई तकनीकें और नौकरियों की प्रकृति तेजी से बदल रही है, तब कुशल और प्रशिक्षित युवाओं की मांग बढ़ रही है। ऐसे में बजट में शिक्षा को रोज़गार और उद्योग से सीधे जोड़ने की कोशिश की गई है।

यूनिवर्सिटी टाउनशिप: पढ़ाई और उद्योग साथ-साथ

      01 फरवरी को संसद में पेश किए गए बजट का एक अहम प्रस्ताव है - राज्यों के सहयोग से पाँच यूनिवर्सिटी टाउनशिप बनाना। ये टाउनशिप बड़े औद्योगिक और लॉजिस्टिक कॉरिडोर के पास विकसित की जाएँगी। यहाँ विश्वविद्यालय, कॉलेज, शोध संस्थान, स्किल सेंटर, छात्रावास और उद्योग एक ही जगह पर उपलब्ध होंगे। इससे पढ़ाई और नौकरी के बीच की दूरी कम होगी। छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही उद्योगों से जुड़ने का मौका मिलेगा और शोध से नए उत्पाद और नए स्टार्टअप सामने आ सकेंगे। इससे क्षेत्रीय स्तर पर नवाचार और रोजगार दोनों बढ़ेंगे।

शिक्षा से रोज़गार और उद्यमिता पर स्थायी समिति

     बजट में शिक्षारोज़गारउद्यमिता पर एक उच्चस्तरीय समिति बनाने का प्रस्ताव भी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षा प्रणाली उद्योगों की ज़रूरतों के अनुसार युवाओं को तैयार करे।

     अब कॉलेजों और विश्वविद्यालयों का काम सिर्फ डिग्री देना नहीं रहेगा, बल्कि छात्रों को नौकरी और स्वरोज़गार के लिए तैयार करना भी होगा। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नई तकनीकों को ध्यान में रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में बदलाव किए जाएँगे।

विज्ञान, तकनीक और शोध पर ज़ोर

      बजट में शोध और विज्ञान को भी खास महत्व दिया गया है। देश में चार बड़े राष्ट्रीय दूरबीन और खगोल विज्ञान केंद्र स्थापित या विकसित किए जाएँगे, जिससे अंतरिक्ष और विज्ञान के क्षेत्र में भारत की पहचान मजबूत होगी।

      इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम तकनीक और राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन जैसी योजनाओं को समर्थन दिया गया है। इन योजनाओं में विश्वविद्यालयों की मुख्य भूमिका होगी। इससे नए विचार, नई तकनीक और बेहतर उत्पाद विकसित होंगे।

STEM में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की पहल

      विज्ञान और तकनीक की पढ़ाई में महिलाओं को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे सुरक्षित आवास और आने-जाने की सुविधा। इसे ध्यान में रखते हुए बजट में हर ज़िले में एक बालिका छात्रावास बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। इससे अधिक लड़कियाँ STEM विषयों में पढ़ाई कर सकेंगी। यह कदम केवल सामाजिक सुधार नहीं है, बल्कि देश की उत्पादकता और नवाचार बढ़ाने की दिशा में भी अहम है।

व्यावसायिक और कौशल आधारित शिक्षा का विस्तार

      बजट में उच्च शिक्षा को केवल पारंपरिक डिग्री तक सीमित नहीं रखा गया है। स्वास्थ्य, डिजाइन, पशुपालन और रचनात्मक क्षेत्रों में व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा दिया गया है।

मुख्य घोषणाओं में AYUSH संस्थानों के माध्यम से एक लाख स्वास्थ्य पेशेवर तैयार करना, निजी भागीदारी से वेटरनरी कॉलेज बढ़ाना, एक नया राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान और स्कूल-कॉलेजों में क्रिएटिव टेक्नोलॉजी लैब्स की स्थापना शामिल है।

निष्कर्ष

       कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026–27 में उच्च शिक्षा को देश के भविष्य से जोड़ने की स्पष्ट कोशिश दिखाई देती है। यदि इन योजनाओं को ईमानदारी और बेहतर तालमेल के साथ लागू किया गया, तो भारतीय विश्वविद्यालय नवाचार, रोजगार और समावेशी विकास के मजबूत केंद्र बन सकते हैं। यह बजट यह संदेश देता है कि उच्च शिक्षा अब खर्च नहीं, बल्कि भारत के भविष्य में किया गया निवेश है।

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लेखक द्वय भारतीय प्रबंध संस्थान (आई.आई.एम.) मुम्बई में प्राध्यापक हैं