निमोनिया और मूत्र मार्ग संक्रमण जैसी सामान्य बीमारियों के उपचार में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस एक बड़ी चुनौती ................................. डा. माधवानन्द
निमोनिया और मूत्र मार्ग संक्रमण जैसी सामान्य बीमारियों के उपचार में
एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस एक बड़ी चुनौती : डा. माधवानन्द
भोपाल। अनेक मरीज ठीक महसूस होने पर दवा बीच में ही बंद कर देते हैं, निर्धारित खुराक और अवधि पूरी नहीं करते, कल्चर और सेंसिटिविटी जांच के बिना एंटीबायोटिक का सेवन करते हैं । उच्च श्रेणी की एंटीबायोटिक दवाओं का अधिक उपयोग किया जा रहा है, जिससे एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस की समस्या और तेजी से बढ़ रही है। एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस अब निमोनिया और मूत्र मार्ग संक्रमण जैसी सामान्य बीमारियों के उपचार में एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। यह जानकारी देते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) माधवानन्द कर ने बताया कि सामान्य रूप से उपयोग में आने वाली एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता का प्रमुख कारण आमजन द्वारा एंटीबायोटिक का अविवेकपूर्ण और बिना चिकित्सकीय निगरानी के उपयोग है। उन्होंने कहा कि कई बार एंटीबायोटिक समय पर और उचित चिकित्सकीय पर्चे के बिना ली जाती हैं, गलत खुराक में ली जाती हैं तथा चिकित्सकीय पर्यवेक्षण के अभाव में उपयोग की जाती हैं।

एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. कर ने जोर देते हुए कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए जनसामान्य में व्यापक जागरूकता के साथ-साथ चिकित्सकों, नर्सों एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों का सक्रिय सहयोग आवश्यक है, ताकि एंटीबायोटिक के जिम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने बताया कि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस से निपटने के लिए एम्स भोपाल द्वारा कई संस्थागत कदम उठाए गए हैं। इनमें एक सुव्यवस्थित एंटीबायोटिक नीति का क्रियान्वयन, विभिन्न हितधारकों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम, नाटकों और पोस्टरों के माध्यम से जनजागरूकता गतिविधियाँ तथा एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस स्टूवर्डशिप वीक में सक्रिय सहभागिता शामिल है। इसके अतिरिक्त, संस्थान द्वारा सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रमों और राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलनों का आयोजन कर एंटीबायोटिक के विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है तथा एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के खिलाफ समन्वित प्रयासों को मजबूती प्रदान की जा रही है।
प्रो. कर ने बताया कि नेशनल एक्शन प्लान ऑन एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एनएपी-एएमआर) 2.0 की शुरुआत एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के खिलाफ भारत की सामूहिक लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह योजना एंटीबायोटिक के जिम्मेदार उपयोग, जनजागरूकता और सभी क्षेत्रों में समन्वित प्रयासों को मजबूती प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि एम्स भोपाल एंटीबायोटिक के विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने, जागरूकता कार्यक्रमों को सशक्त करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवनरक्षक दवाओं की प्रभावशीलता सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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