पेंशन बचेगी तो सम्मान बचेगा,

चुप रहे तो अधिकार छिन जाएंगे: बी.एम. सूंडा

पोस्टकार्ड अभियान चलाने का आह्वान

जयपुर पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) और पेंशनर्स के अधिकारों को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए पेंशनर्स एसोशियेसन के प्रदेश महासचिव बी.एम. सूंडा ने कहा है कि “पेंशन केवल सामाजिक सुरक्षा नहीं, बल्कि कर्मचारियों की डिफर्ड वेज (स्थगित मजदूरी) है, जिस पर सरकार की नजर है। अगर पेंशनर्स अब भी चुप रहे, तो आने वाले समय में उनके हाथ केवल पछतावा लगेगा।”

सूंडा ने हाल ही में जारी बयान में कहा कि आर्थिक सुधारों के नाम पर सरकार अपनी नीतिगत विफलताओं का बोझ पेंशनर्स पर डाल रही है। महंगाई और बेरोजगारी जैसे बुनियादी मुद्दों पर ठोस काम करने के बजाय पेंशन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी कल्याणकारी योजनाओं में कटौती की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेंशन को “गैर-उत्पादक खर्च” बताकर पेंशनभोगियों को समाज में बदनाम करने का सुनियोजित प्रयास हो रहा है।

पेंशनर्स एसोशियेसन के प्रदेश महासचिव श्री सूंडा ने केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) को आयुष्मान भारत से जोड़ने की पहल पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे पेंशनर्स की स्वास्थ्य सुरक्षा कमजोर होगी। “पांच लाख रुपये की सीमा वाले आयुष्मान भारत को CGHS के विकल्प के रूप में थोपना पेंशनर्स के साथ अन्याय है,” ।

वेतन आयोग को लेकर कड़ा एतराज

बी.एम. सूंडा ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की संदर्भ शर्तों (TOR) में पेंशनर्स को शामिल न किए जाने को सरकार की “कुटिल मंशा” का प्रमाण बताया। उनका कहना है कि वित्त विधेयक 2025 के जरिए सीसीएस पेंशन नियमों में किए गए बदलावों से पेंशनर्स को वेतन आयोग की सिफारिशों से वंचित करने का रास्ता तैयार किया गया है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महंगाई भत्ता और महंगाई राहत की गणना में हेरफेर कर वास्तविक महंगाई को कम दिखाया जा रहा है। “सरकारी आंकड़े बाजार की सच्चाई से मेल नहीं खाते। यह सीधे-सीधे पेंशनर्स की जेब पर डाका है,” ।

पोस्टकार्ड अभियान का आह्वान

प्रदेश महासचिव ने पेंशनर्स से अपील की कि वे “पेंशन बचाओ” अभियान के तहत प्रधानमंत्री को पोस्टकार्ड भेजकर अपनी आवाज बुलंद करें। उन्होंने कहा, “यह समय शुतुरमुर्ग की तरह आंखें मूंदने का नहीं, बल्कि संगठित संघर्ष का है। पेंशन बचेगी तो सम्मान बचेगा।”

    सूंडा ने केन्द्र सरकार से मांग की है कि पेंशनर्स-विरोधी प्रावधानों को तत्काल वापस लिया जाए, 8वें वेतन आयोग की TOR में पेंशनर्स को शामिल किया जाए और आयोग की प्रभावी तिथि 1 जनवरी 2026 तय कर बकाया भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

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न्यूज़ सोर्स : योगेश कुमार शर्मा