हाई वोल्टेज करंट के बाद भी बची उम्मीद ............ एम्स भोपाल की उन्नत सर्जरी से अंग सुरक्षित
हाई वोल्टेज करंट के बाद भी बची उम्मीद
एम्स भोपाल की उन्नत सर्जरी से अंग सुरक्षित
भोपाल। हाई-वोल्टेज बिजली के करंट से झुलसना अक्सर अंग गंवाने तक की नौबत ला देता है। लेकिन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल के डॉक्टरों ने उन्नत सर्जरी और सही समय पर लिए गए उपचार निर्णयों से ऐसी गंभीर चोटों में भी उम्मीद की नई किरण दिखाई है। एम्स भोपाल के बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग की टीम ने हाई-वोल्टेज बिजली से होने वाली गंभीर चोटों के इलाज पर एक महत्वपूर्ण शोध किया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। शोध में एम्स भोपाल में इलाज कराए गए 23 मरीजों के मामलों का विश्लेषण किया गया, जिनमें माइक्रोसर्जिकल फ्री-फ्लैप तकनीक से अंगों के पुनर्निर्माण का प्रयास किया गया था।
अध्ययन में यह सामने आया कि ऐसे मामलों में जल्दबाजी करने के बजाय घाव की वास्तविक स्थिति को समझना अधिक जरूरी है। पर्याप्त रूप से खराब ऊतक हटाने (डिब्राइडमेंट) और यह स्पष्ट होने तक कि कौन-सा ऊतक जीवित है, पुनर्निर्माण को थोड़ा टालना बेहतर नतीजे देता है। इस तरीके से अंगों को बचाने की संभावना बढ़ी और गंभीर जटिलताएँ भी कम हुईं। शोध में कुल 87 प्रतिशत फ्लैप के सफल रहने की दर दर्ज की गई। टीम ने स्पष्ट किया कि बिजली से झुलसने के मामलों में तय समय सीमा के दबाव में निर्णय लेने के बजाय घाव की जैविक स्थिति के आधार पर इलाज करना ज्यादा प्रभावी साबित होता है।
एम्स भोपाल के बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. मनाल मोहम्मद खान ने बताया कि हाई-वोल्टेज विद्युत जलन सबसे कठिन और जटिल चोटों में से एक है। उन्होंने बताया कि इस शोध से यह सिद्ध होता है कि धैर्य और सही जैविक आकलन से न केवल बेहतर परिणाम मिलते हैं, बल्कि अंगों की कार्यक्षमता भी बचाई जा सकती है।
यह महत्वपूर्ण अध्ययन अमेरिका से प्रकाशित प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल एनल्स ऑफ प्लास्टिक सर्जरी में प्रकाशित हुआ है, जिसे दुनिया भर के प्लास्टिक सर्जन और शोधकर्ता पढ़ते हैं। इससे एम्स भोपाल की चिकित्सा क्षमता और शोध कार्य को वैश्विक पहचान मिली है। इस शोध कार्य का नेतृत्व डॉ. गौरव चतुर्वेदी ने किया, जबकि डॉ. अभिनव सिंह, डॉ. वेद प्रकाश राव चेरुवु और डॉ. मनाल मोहम्मद खान भी शोध टीम में शामिल रहे।

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