आवारा कुत्तों से कैसे हो बचाव ........................आलेख...................... डा. ए.के. भदोरिया
भारत में आवारा कुत्तों की संख्या कितनी है, कोई आधिकारिक आंकड़ा तो नहीं है लेकिन कुत्तों द्वारा मनुष्यों को काटे जाने की घटनाओं की जानकारी है। कुत्तों द्वारा काटने के बाद रेबीज का इंजेक्शन लगाने से यह अनुमान सत्य के काफी करीब है कि जो आंकड़े उपलब्ध हैं, वे लगभग सही होंगे। देश में सन 2023 में लगभग 30.4 लाख कुत्तों द्वारा काटे जाने की घटनाएँ दर्ज हुईं थीं जबकि सन 2024 में लगभग 37 लाख कुत्तों के काटने के मामले की सूचना केंद्र सरकार ने संसद को दी थी। पिछले वर्ष 1 जनवरी से 31 जुलाई 2025 तक की सरकारी रिपोर्ट के अनुसार लगभग 26.7 लाख कुत्तों द्वारा काटे जाने किए मामले दर्ज हुए हैं। यह संख्या उस समय तक के लगभग 7 महीने के लिए है जिससे यह प्रतीत हो रहा है कि वर्ष 2025 मे पूरे वर्ष के दौरान यह संख्या पहले के वर्षों की तुलना से अधिक ही रहने की संभावना है। हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने आवारा कुत्तों द्वारा काटे जाने की बढ़ती घटनाओं को लेकर चिंता जाहिर की और कुछ दिशा निर्देश भी जारी किए हैं। लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि इस घटॅनाओं पर काबू कैसे पाया जाए ? क्या लाखों की संख्या में आवारा कुत्तों को जान से मार दिया जाए ? यह अमानवीय कृत्य किसी सभ्य समाज के लिए तो स्वीकार्य नहीं होगा। अब इसका समाधान केवल यही है कि कुत्तों से हम अपनी रक्षा कैसे करें और कुत्ते भी बिना भय के रह सकें ? इसी विषय पर जाने माने चिकित्सक डा. अनिल कुमार भदोरिया ने विस्तार से जानकारी दी है... आप भी पढ़िए... आवारा कुत्तों से कैसे हो बचाव.....
आवारा कुत्तों से कैसे हो बचाव
- डा. ए.के. भदोरिया
हम और आप, भारत में आवारा कुत्तों से कुछ इस तरह पीड़ित हैं कि हर व्यक्ति के पास कुत्तों के संबंध में एक दर्दनाक कहानी है। सड़क पर पैदल चलते समय विशेष रूप से बच्चों और महिलाओं पर कुत्तों के हमले प्राणघातक भी लगातार हो रहे हैं। इस विषय को विवादित ना बनाते हुए यह समझने का प्रयास करेंगे कि कुत्तों से किस प्रकार बचा जा सकता है और कुत्तों के हमले होने पर क्या किया जाना चाहिए ?
कुत्तों द्वारा पाँव में, हाथों में या गर्दन के आस पास सिर में काटे जाने पर उपचार की विधियाँ किस तरह से अपनायी जाना चाहिए ? यह समझने का विषय है।
भारतीय उप महाद्वीप में ही मानव सहयोगी जीवों जैसे कुत्ता, बिल्ली, गाय, भैंस, बकरी, मछली, कछुआ, गिलहरी और पक्षियों को पालने का प्रचलन सदियों से पीढ़ी – दर – पीढ़ी चला आ रहा है। इन जीवों के अतिरिक्त दुधारू पशु ना केवल सुरक्षित हैं बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के मज़बूत स्तंभ भी हैं। पालतू कैनाइन जीव जैसे कुत्ता - बिल्ली के मात्र नाखूनों से लगने वाली खरोंच या दाँतों से काटे जाने पर ऐसी विपरीत की स्थिति निर्मित होती है जिससे रेबीज़ जैसे वायरस से होने वाले रोगों का कारण बनती है, जो प्राणघातक भी हो सकता है।
आख़िर ये जानवर काटते क्यों हैं?
पुराना मानस है कि कोई भी जीव - जन्तु तब तक मानव पर हमला नहीं करते हैं जब तक कि उन्हें उत्तेजित न किया जाए। चाहे वे आराम की स्थिति में हों, भोजन कर रहे हो या वो अपनी आत्मरक्षा कर रहे हों।
आमतौर पर कुत्ते, बिल्ली भोजन की तलाश में सड़कों पर आवारा रूप से घूमते रहते हैं और ऐसे में उन्हें यह प्रतीत हो जाए कि यह व्यक्ति उनके भोजन, समागम, आराम या सुरक्षा के लिए ख़तरा हो सकता है तब स्वयं रक्षा, भोजन रक्षा या समागम रक्षा में ये जीव हमला करते हैं। रेबीज़ नामक रोग से पीड़ित होने पर ये जीव आदतन ही अपने निकट स्थित या उपस्थित रहने वाले जीव, मानव, बच्चों को काटते हैं।
इसलिए यह आवश्यक है कि पैदल चलते समय हम अपने आस - पास उपस्थित कुत्तों की भाव - भंगिमा नैसर्गिक रूप और व्यवहार पर ध्यान दें। यदि कुत्तों का व्यवहार असामान्य लगे तो न केवल उन कुत्तों से दूर रहने का प्रयास करें बल्कि संबंधित विभाग के प्रशासनिक अधिकारियों को सूचित करने का भी श्रम करें ताकि पागल कुत्ते की पहचान कर उपचार की व्यवस्था हो सके और उसे सार्वजनिक स्थानों से हटाया जा सके।
एक तथ्य यह भी देखने में आया है कि कुत्ते के पास पहुँचते समय यदि आप कुत्ते के प्रति अपना भय प्रदर्शित करते हैं तो वे आपके ऊपर हमला कर सकते हैं।
इन जानवरों से बचने के उपाय क्या है ?
अक्सर कुत्ते वाहन पर सवार मानवों से बचने का प्रयास करते हैं परंतु कभी - कभी वे उत्तेजना में भरे होने के कारण सीधे हमला भी कर देते हैं। ऐसी स्थिति में पैदल चालकों को अपने हाथ में एक छाता, छड़ी, डंडा या पानी की बॉटल जैसे सामान साथ रखना चाहिए। यदि इनमें से कोई भी एक वस्तु आपके पास है तो इनका भय दिखाकर स्वयं को सुरक्षित रख सकते हैं और आपकी हिम्मत भी बनी रहेगी।
बच्चों के लिए ख़ास तौर से यह आवश्यक है कि जब वे किसी सड़क पर निकलें तो माता पिता साथ हों। अकेले होने की स्थिति में बच्चे के हाथों में एक डंडा दें, ताकि कुत्तों का झुंड उनके ऊपर हमला करने से डरेंगे। कुत्तों के झुंड या अकेला कुत्ता होने पर भी हाथ में पकड़ा हुआ डंडा ज़मीन पर ठोकने मात्र से ये जीव भाग जाते हैं । एक आसान तरीक़ा यह भी है कि पत्थर उठाकर हाथ में पकड़े रहने और पत्थर को फेंकने का प्रदर्शन मात्र से भी कुत्ते भाग जाते हैं ।
नाख़ून या दाँतों के निशान लगने पर क्या किया जाना चाहिए ?
यदि किसी भी जीव के नाखूनों के ख़रास हो या दाँत से काट लिया है तो समुचित उपचार किया जाना अनिवार्य हैं। सर्वप्रथम उस घाव को साबुन पानी से पूर्णतः कई बार धो लेना चाहिए ताकि घाव में उपस्थित जीव की लार या उसमें उपस्थित जीवाणु, विषाणु, रोगाणु रक्त में न मिलने पाए ।
यह सुरक्षा का प्रथम क़दम है जिस पर तुरंत कार्रवाई की जाना चाहिए जब तक कि चिकित्सक से उपचार नहीं ले लिया जाए। हाथ पाँव में लगे ये निशान पर कोई पट्टी नहीं बांधी जाना चाहिए या टाँके नहीं लगाया जाना चाहिए और घाव को खुला ही रखा जाना चाहिए ।
कुत्तों के हमले या काटने से होने वाले घाव ख़तरनाक सिद्ध हो सकते हैं। उन्हें भी इसी प्रकार साबुन पानी से धोकर घाव खुला रखा जाना चाहिए। चिकित्सालय पहुँचने तक खुले घाव को किसी एंटीबायोटिक और एंटी सेप्टिक क्रीम के साथ दबाकर चिकित्सालय पहुँचने तक बाँधने का प्रयास न करें
चिकित्सालय जाना क्यों आवश्यक है ?
जंगली जीवों के काटने से ज़ूनोटिक बीमारियों की एक लंबी श्रृंखला के होने की संभावनाएं होती हैं। ये बीमारी प्राणघातक हो सकती हैं इसीलिए इन जीवों के काटने पर प्रशिक्षित चिकित्सक की सलाह अवश्य लेनी चाहिए ।
पालतू जानवर हो तो क्या टीके लगाए जाना चाहिए ?
क्या सड़क पर चलते समय कुत्तों से बचने के लिए हाथ में कोई हथियार होना चाहिए ?
जी हाँ। छड़ी, डंडा, छाता, बेंत, पानी की धात्विक बॉटल या रूलर जैसे आत्मरक्षा की वस्तुएं रल्खनी चाहिए ताकि सड़क पर भ्रमण करते समय पालतू या आवारा कुत्तों से इनका उपयोग कर कुत्तों के हमले से आसानी से बचा सकता है।
कुत्तों का हमला होने पर क्या करें?
कुत्तों का हमला होने पर स्थिर रहें... और बचाव में प्रतिघात न करें हमलावर या विश्राम करते कुत्ते के सामने भयभीत दिखाई पड़ने का प्रदर्शन न होने दें । भागने या दौड़ लगाने की भी कोशिश नहीं करें। ख़ाली हाथों से मुक़ाबला न करें। कुत्तों के सामने तुरंत भय प्रदर्शन न करें। भोजन करते समय या सोते समय कुत्तों को न छेड़े। कुत्तों की आपसी लड़ाई के समय तो विशेष रूप से सचेत रहें और उन्हें न छेड़ें। कुत्ते के काटने या हमले से आई खरोंच या घाव होने पर तुरंत चिकित्सक से सम्पर्क कर ईलाज करवाएं।
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डा. अनिल कुमार भदौरिया मध्य प्रदेश शासन के कर्मचारी राज्य बीमा निगम में सेवारत हैं। स्वास्थ्य शिक्षा के संबंध में डा. भदौरिया की विशेष रुचि है और जीवनशैली रोगों के साथ फर्स्ट एड, यौन शिक्षा व जीवन रक्षक (सी.पी.आर.) प्रशिक्षण सत्रों के साथ पर्यटन में भी विशेष रूचि रखते हैं। उनकी सेक्स एजूकेशन नामक पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है। कवि हृदय डॉ. भदौरिया अपने यात्रा वृत्तान्त और कहानियों के संग्रह की तीन अन्य पुस्तकें भी प्रकाशित कर चुके हैं तथा हेल्दी-बुक नामक पुस्तक प्रकाशनाधीन है।

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