नज़रिया........

ईरान अमेरिका इजराइल युद्ध और  दुनिया

  • अरुण कुमार जैन 

   ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल ने पहले ही हमले में बढ़त हासिल की और यही उसकी सबसे बड़ी जीत थी। तकनीकी और खुफियागिरी के बेहतरीन इस्तेमाल ने उन्हें वह सफलता दिला दी जिसे पाने में उन्हें कम से कम एक सप्ताह का समय लगता। खोमेनई के साथ ईरान के शीर्ष कमांडरों और नेतृत्व की दूसरी पीढ़ी के खात्मे से नेतृत्व से जूझ रहे ईरान को सम्हलने में करीब अड़तालीस घंटे लग गए जो कि युद्ध के जारी रहते बेहद अहम और आत्मघाती भी है।

    इधर ईरान ने आसपास के समस्त देशों से अमेरिकी अड्डे होने के कारण हमले करते हुए पंगा ले लिया है। उधर उसके पाले हुए आतंकी संगठन हिजबुल्लाह, हुती, हमास, तालिबान और फ़िलिस्तीन जिहाद आदि ने इजराइल के खिलाफ खुला युद्ध घोषित कर दिया है। इन सबका नतीजा यह है कि इज़राइल और अमेरिका को अपना हमला बेहद तेज करते हुए जल्द से जल्द युद्ध खत्म करना पड़ेगा। 

       यदि युद्ध लंबा खिंचता है पूरे विश्व में तेल और गैस की किल्लत आने की सम्भावना है और इसके संकेते दिखाई देने लगे हैं । सऊदी अरब की विश्व की सबसे बड़ी रिफाइनरी और क्षेत्र की अन्य रिफाइनरी ने उत्पादन बंद कर दिया है। ईरान ने हॉर्मूज जलडमरूमध्य को प्रतिबंधित कर आने जाने वाले जहाजों पर रोक लगा दी है, जिसकी वजह से कई जहाज तेल और गैस लिए वहीं फंसे हुए हैं। अभी बीस दिन तक विश्व में कहीं पर भी तेल और गैस की स्थिति असामान्य नहीं है, मगर आगे आने वाले संकट की आशंका में सभी जगह तेल और गैस का भंडार बढ़ाया जा रहा है जो कि स्वाभाविक प्रवृत्ति है। साथ ही दामों में वृद्धि की आशंका में भी संग्रह प्रवृत्ति बढ़ रही है। इन सबके कारण विश्व के अधिकतर देशों में लागत वृद्धि होने वाली है। इसके चलते संपूर्ण विश्व के देशों का रुझान और दबाव भी अमेरिका और इजरायल पर काम कर रहा है कि वे जल्दी से जल्दी युद्ध समाप्त करें। विश्व की अर्थव्यवस्था और खुद युद्धरत देशों की अर्थव्यवस्था के लिए भी यही उत्तम है कि वे जल्द से जल्द युद्ध समाप्त करे। विश्व शांति पर्यावरण और मानवता के लिए भी युद्ध सदैव घातक होते हैं।

    ईरान पर जिस तरह से लगातार आक्रमण पैना होता जा रहा है और ईरान की ओर से उनकी ईरानियन गार्ड्स ने अपनी रणनीति बदली है और मुक्त होकर लगातार अपने मिसाईल हमले बढ़ाए हैं, उस हालत में अमेरिका - इजराइल ने ज्यादातर मिसाइल लॉन्चर्स को उसकी वायुसेना और सीमित जलसेना को पूरा निशाना बना रखा है। पहले ही ईरानी रक्षा कवच ध्वस्त होने और जाम कर दिए जाने से आसमान खुला है और ये देश ईरान पर लगातार हजारों उड़ानों से हमले तेज कर रहे हैं। यह माना जा रहा है कि ईरान की लगभग आधी जल सेना और इतनी ही वायु सेना समाप्त हो चुकी है। उसके आधे से ज्यादा मिसाइल लॉन्चर्स खत्म कर दिए गए हैं तब भी ईरान जिस तरह से हमले कर रहा है और उसी बीच वहां आया भूकंप जो कि लगभग 4.3 रिक्टर स्केल का था, इस ओर इशारा करता है कि यह भूमिगत परमाणु प्रयोग हो सकता है। अभी ईरान के पास कम से कम 8 से 11 परमाणु हथियार बनाने जितना परिष्कृत युरेनियम मौजूद है और कोई आश्चर्य नहीं कि गुप्त रुप से या चीन रुस की मदद से उसने परमाणु हथियार बना भी लिया हो। उस स्थिति में हारते ईरान के पास दो ही विकल्प हैं । एक वह इजराइल पर अपने संभावित परमाणु बम का इस्तेमाल करे और दूसरा उसके साथ अमेरिका और सऊदी अरब को भी अपना निशाना बनाए। परमाणु बम का इस्तेमाल वह सीधे तौर पर न कर डर्टी बम के रूप में डाइनामाइट के साथ रेडियोधर्मी पदार्थ मिलाकर करेगा, इसकी संभावना ज्यादा है । यद्यपि इजराइल और अमेरिका खुद परमाणु संपन्न देश हैं, ऐसे में ईरान पर काउंटर हमले में पूरा बर्बाद होना तय है।

    इधर मुज्तबा खामेनैई जो कि मृत नेता खमैनाई के द्वितीय पुत्र हैं, को सर्वोच्च नेता चुन लिया गया है। यह जरूरी भी था कि देश को संकट की स्थिति में एक रखा जा सके। मगर वे ईरान को कितना सही नेतृत्व दे पाएंगे इसमें आशंका है।  एक तरफ उन्हें परिवार को देखना है, देश को देखना है और साथ ही सर्वोच्च सत्ता केंद्र में बने रहने के लिए अन्य शक्ति केंद्रों को संभालना होगा। ईरान की चालीस प्रतिशत जनता इस परिवार के शासन को पसंद नहीं करती।  उधर ट्रम्प लगातार वहां के जेन जी और जनता से इस शासन को उखाड़ फेंकने की अपील कर रहे हैं और विद्रोहियों को पूरा समर्थन देने की बात कर रहे हैं। अमेरिका ने ईरान में ग्रैविटी जैसे खतरनाक बमों के इस्तेमाल की घोषणा कर दी है ताकि युद्ध को जल्दी समाप्त किया जा सके और ईरानी फौजों पर मानसिक दबाव बढ़ाया जा सके। ईरान की आगे की रणनीति पूरे देश को पांच भागों में बांटकर युद्ध लड़ने की है जिसका ब्लू प्रिंट मृत खोमेनई ने ही तैयार कर दिया था। उसका मुख्य आधार गुरिल्ला युद्ध भी है, ताकि अफगानिस्तान की तरह अमेरिका को उलझाया जा सके और समय लंबा खींच जाए। मगर ईरान के लॉन्चर्स की खोती हुई क्षमता, नौसेना, और हवाई सेना के अभाव में और लगातार बढ़ते हमले से नहीं लगता कि ईरान ज्यादा टिक पाएगा। इस तरह युद्ध 5 दिन होने के बाद दो तीन दिन के अंदर सिमट जाना अवश्यंभावी है।

अरुण कुमार जैन 

लेखक एवं स्वतंत्र विश्लेषक 

arunkumarjain28@gmail.com