योग से हृदय और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में

सकारात्मक बदलाव संभव : डॉ. वरुण मल्होत्रा

       भोपाल। नियमित योगाभ्यास न केवल शरीर को स्वस्थ बनाता है बल्कि हृदय की धड़कनों की लय और मस्तिष्क की गतिविधियों पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है। योग की विभिन्न श्वसन तकनीकें तनाव को कम करने, मानसिक एकाग्रता बढ़ाने और मधुमेह जैसी बीमारियों के नियंत्रण में भी सहायक सिद्ध हो सकती हैं। यह जानकारी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल के फिजियोलॉजी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. वरुण मल्होत्रा ने हमदर्द इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़, नई दिल्ली में आयोजित एक व्याख्यान में दी।

    डॉ. मल्होत्रा ने एचआरवी और ईईजी को संशोधित करने में योग की भूमिकाविषय पर अपने व्याख्यान में बताया कि एचआरवी (हार्ट रेट वेरिएबिलिटी) हृदय की धड़कनों के बीच समय के अंतर को मापती है, जबकि ईईजी (इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी) मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि को रिकॉर्ड करती है। योगाभ्यास इन दोनों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है और तनाव प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि धीमी और गहरी श्वास की तकनीकें, जैसे अनुलोम-विलोम, शरीर की विश्रांति प्रणाली को सक्रिय करती हैं और मन को शांत बनाती हैं। इसके विपरीत कपालभाति जैसी तीव्र श्वसन तकनीक शरीर की सक्रियता और चयापचय दर को बढ़ाती है, जो वजन प्रबंधन में सहायक हो सकती है।

    डॉ. मल्होत्रा ने बंदर और कछुए की श्वसन दर का उदाहरण देते हुए कहा कि धीमी और शांत श्वास दीर्घायु तथा मानसिक स्थिरता से जुड़ी होती है। योग के नियमित अभ्यास से मस्तिष्क के अग्र भाग में सकारात्मक गतिविधि बढ़ती है, जिससे प्रसन्नता की भावना बढ़ती है और चिंता कम होती है। उन्होंने बताया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह हृदय गति परिवर्तनशीलता और मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि को वैज्ञानिक रूप से प्रभावित करने वाली एक समग्र पद्धति है। उन्होंने वर्ष 2010 में प्रकाशित एक अध्ययन का उल्लेख किया, जिसमें टाइप-2 मधुमेह के 56 रोगियों ने 40 दिनों तक प्रतिदिन योगासन का अभ्यास किया। अध्ययन के परिणामों में वजन और बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) में कमी, कमर-कूल्हा अनुपात में गिरावट और दुबले शरीर द्रव्यमान में वृद्धि दर्ज की गई। साथ ही इंसुलिन प्रतिरोध में भी सुधार पाया गया। इससे संकेत मिलता है कि नियमित योग अभ्यास मधुमेह नियंत्रण में सहायक हो सकता है।

      डॉ. मल्होत्रा ने कुर्मो-गीता और भगवद्गीता के उदाहरण देते हुए शांत रहकर सक्रिय और सक्रिय रहकर शांतरहने का संदेश दिया। उन्होंने हॉंग-सौ एकाग्रता तकनीक और ॐ ध्यान तकनीक का परिचय कराते हुए कहा कि वास्तविक आनंद हमारे भीतर है और योग उसे प्राप्त करने का वैज्ञानिक मार्ग प्रदान करता है। उन्होंने तनाव से मुक्ति के लिए नियमित ध्यान, सकारात्मक सोच, एक समय में एक विचार पर ध्यान केंद्रित करना, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, और नियमित व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की भी सलाह दी।

न्यूज़ सोर्स : एस्म भोपाल