रेस्टोरेंट कारोबार में बिल घोटालाका भंडाफोड़,

408 करोड़ की अघोषित आय का खुलासा


देश के रेस्टोरेंट कारोबार में बड़े पैमाने पर बिल घोटाले का खुलासा हुआ है। आयकर विभाग ने 22 राज्यों के 46 शहरों में 62 रेस्टोरेंट पर एक साथ सर्वे कर प्रारंभिक जांच में करीब 408 करोड़ रुपये की बिक्री छिपाने का पता लगाया है। एआई आधारित विश्लेषण से सामने आया कि कई रेस्टोरेंट ग्राहकों को बिल न देकर या बिलों में हेरफेर कर सरकार को कर का बड़ा नुकसान पहुंचा रहे हैं।  यदि उपभोक्ता रेस्टारेंट या हर खरीद पर बिल की मांग करेंगे तो इस तरह की कर चोरी पर काफी हद तक रोक लग सकती है।

आयकर विभाग ने खाद्य एवं पेय (Food & Beverage) क्षेत्र में कर चोरी के बढ़ते मामलों को देखते हुए व्यापक जांच अभियान चलाया है। विभाग द्वारा नवंबर 2025 में की गई पड़ताल में संकेत मिले थे कि कई रेस्टोरेंट अपनी वास्तविक बिक्री छिपाने के लिए बिल हटाने, नकद लेन-देन दर्ज न करने और खातों में हेरफेर जैसे तरीके अपना रहे हैं।

इसके बाद देशभर के लगभग 1.77 लाख रेस्टोरेंट के लेन-देन संबंधी आंकड़ों का एआई-सक्षम विश्लेषणात्मक उपकरणों की मदद से अध्ययन किया गया। इन आंकड़ों की तुलना उनके द्वारा दाखिल किए गए आयकर रिटर्न से की गई। जांच में कई जगह घोषित आय और वास्तविक कारोबार के बीच भारी अंतर सामने आया।

इसी आधार पर 8 मार्च 2026 को 22 राज्यों के 46 शहरों में स्थित 62 रेस्टोरेंट पर देशव्यापी सर्वे किया गया। प्रारंभिक जांच में ही लगभग 408 करोड़ रुपये की बिक्री छिपाने का मामला सामने आया है। विभाग ने संकेत दिया है कि जांच आगे बढ़ने पर यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।

उपभोक्ताओं की अहम भूमिका
कर चोरी रोकने में आम उपभोक्ताओं की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। अक्सर रेस्टोरेंट ग्राहक को बिल देने से बचते हैं या केवल साधारण पर्ची थमा देते हैं। यदि ग्राहक पक्का जीएसटी/कंप्यूटराइज्ड बिल मांगें, तो रेस्टोरेंट के लिए बिक्री छिपाना मुश्किल हो जाता है।

कर विशेषज्ञों के अनुसार

  • हर खरीद या भोजन के बाद वैध बिल जरूर लें
  • बिल में रेस्टोरेंट का जीएसटी नंबर और विवरण देखें
  • बिल न मिलने पर उपभोक्ता शिकायत भी कर सकते हैं

इससे न केवल कर चोरी पर अंकुश लगेगा बल्कि उपभोक्ता को भी सही भुगतान का प्रमाण मिलेगा।

सक्षम नजअभियान से सुधार का मौका
आयकर विभाग ने करदाताओं को अपनी गलतियां सुधारने का अवसर देते हुए सक्षम नज’ (SAKSHAM NUDGE) अभियान शुरू किया है। इसके तहत ऐसे रेस्टोरेंट की पहचान की गई है जिनकी घोषित आय और वास्तविक कारोबार में अंतर पाया गया है।

अभियान के पहले चरण में 63 हजार रेस्टोरेंट को ई-मेल और मोबाइल संदेश भेजे जाएंगे, जिनसे 31 मार्च 2026 से पहले आयकर अधिनियम की धारा 139(8A) के तहत अपना अद्यतन आयकर रिटर्न दाखिल करने का अनुरोध किया गया है।

आयकर विभाग का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं बल्कि स्वैच्छिक कर अनुपालन को बढ़ावा देना है। हालांकि विभाग ने साफ किया है कि समय रहते सुधार नहीं करने वालों के खिलाफ सख्त जांच और दंडात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।