किसानों के साथ किसान वर्ष में छलावा

कौड़ियों के दाम जमीन हड़प रही सरकार

       इंदौर (डा. संतोष पाटीदार)  सिंहस्थ के नाम पर सरकार एक और स्टेट हाईवे धामनोद बड़वाह फोरलेन प्रोजेक्ट के लिए सिंचित बहु फसलीय खेती की भूमि कौड़ियों के दाम पर अधिग्रहित कर रही है। इस कारण ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। इस प्रोजेक्ट से प्रभावित किसान महेश्वर के विधायक राजकुमार मेव से मिले। प्रोजेक्ट प्रभावित ग्रामीण क्षेत्र की चल अचल संपत्ति गाइडलाइन बहुत कम है इस कारण मुआवजा अत्यंत कम है इसलिए सबसे पहले प्रभावित क्षेत्र के गांवो की गाइडलाइन में 300% तक की वृद्धि की जाए। बढ़ी हुई गाइडलाइन के आधार पर चार गुना मुआवजा दिया जाए या बाजार मूल्य के बराबर गाइडलाइन की जाए और उसके आधार पर चार गुना मुआवजा सरकार दे। स्टेट हाईवे की ऊंचाई भूमि के समतल रखी जाए।

      इस प्रोजेक्ट से प्रभावित छोटी खरगोन के कृषक डॉ मोहित पाटीदार बताते हैं कि नर्मदा नदी कछार की बेहद उपजाऊ ब्लैक कॉटन सॉइल जो सफेद सोना ( कपास ) पैदा करती है, ऐसी दुर्लभ जमीन मनमाने तरीके से सरकार, स्टेट हाईवे के लिए अधिग्रहित कर रही है। बदले में सरकार जो मुआवजा दे रही है उतने पैसे में तो 2 गज जमीन भी नहीं मिलती । जैसा युवा उच्च शिक्षित और आधुनिक कृषि करने वाले संतोष टाटा देवेंद्र पाटीदार, राजेंद्र पाटीदार और संजय पटेल कहते हैं –कई किसानों की पूरी जमीन अधिग्रहित हो रही है। ऐसे लोग विस्थापित है। इस प्रोजेक्ट से कई आदिवासी किसान छोटे बड़े किसान महिला कृषक मजदूर अपनी आजीविका छिन जाने से बेघरवार विस्थापित होने हैं”।

     फोरलेन हाईवे परियोजना के नाम पर हो रहे भूमि अधिग्रहण को लेकर अब किसानों का गुस्सा विस्फोटक हो गया है। किसानों ने आरोप लगाया है कि वर्षों से उनके साथ छल-कपट किया जा रहा है, उनकी उपजाऊ खेती बार - बार छीनी जा रही है और बदले में कौड़ियों के दाम मुआवजा देकर उन्हें पुश्तैनी जमीन से बेदखल किया जा रहा है। इसी के चलते कल महेश्वर के विधायक राजकुमार मेव किसानों से मिले और मुख्यमंत्री से किसानों की मांगों पर चर्चा का आश्वासन दिया। 

अंग्रेजों जैसा व्यवहार, सुनवाई नही

    किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों और एमपीआरडीसी (MPRDC) के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में गाइडलाइन बाजार मूल्य के बराबर करने की मांगों को प्रशासनिक अधिकारी गंभीरता से नहीं ले रहे । इससे किसानों में आक्रोश व्याप्त है और बड़े आंदोलन की तैयारी अंदर ही अंदर करने की रणनीति बना रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर के बड़े किसान संगठन आंदोलन में किसानों के साथ आएंगे। किसानों का कहना है कि उनके साथ प्रोजेक्ट से जुड़े हुए अधिकारियों द्वारा अंग्रेजों की तरह व्यवहार किया जा रहा है। 

कई बार शांतिपूर्ण ज्ञापन देने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। प्रोजेक्ट के बारे में विस्तृत जानकारी भी नहीं दी जाती। अधिकारियों को नियमों की जानकारी नहीं है। बाबू पटवारी वर्ग की मनमानी हावी है । कर्मचारी किसानों के प्रति बेहद असंवेदनशील हैं। किसानों का आरोप है कि कलेक्टर को भी अंधेरे में रखकर गुमराह किया जा रहा है, जिससे गरीब आदिवासी, ग्रामीण, मजदूर और महिला कृषकों को सरकारी प्रताड़ना झीलना पड़ रही है ।

 ₹3–5 लाख की गाइडलाइन, बाजार में ₹25–50 लाख

    किसानों ने बताया कि कई गांवों में जमीन की गाइडलाइन ₹3 लाख से ₹5 लाख प्रति बीघा और बाजार मूल्य 25 से 50 लख रुपए है । सरकार द्वारा जहां ₹5 लाख बीघा की दर से मुआवजा दिया जा रहा है वहीं पर इस स्टेट हाईवे के नाम पर जमीन के दलाल 50 लाख से 1 करोड रूपए बीघा के सौदे करवा रहे हैं। भारतीय किसान संघ के संभागीय अध्यक्ष कृष्ण पाल सिंह राठौड़, प्रांत अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण पटेल अनिल व्यास श्याम सिंह पवार और सदाशिव पाटीदार कहते हैं कि सरकारी परियोजनाओं के लिए किए जा रहे भूमि अधिग्रहण में 2013 के कानून का पालन सरकार मुआवजा देने में नहीं कर रही है इसीलिए परियोजनाओं का विरोध होता है। सरकार को बाजार मूल्य के बराबर गाइडलाइन बढ़ाना चाहिए और इसका चार गुना मुआवजा देना चाहिए। ऐसे में ही किसान दूसरी जमीन खरीद पाएंगे । 

 उदाहरण.......

महेश्वर तहसील के ग्राम कुम्भिया में गाइडलाइन लगभग ₹3 लाख/बीघा,,, 

ग्राम लाड़वी (मंडलेश्वर क्षेत्र) में ₹5 लाख/बीघा

जबकि बाजार मूल्य इससे कई गुना लगभग 10 गुना ज्यादा है।

किसानों का कहना है कि सरकार केवल दोगुना मुआवजा देकर जमीन अधिग्रहित कर रही है, जिससे वे कहीं और जमीन खरीदने में असमर्थ हैं।

 किसानों ने साफ कहा

इतने मुआवजे में तो दो गज जमीन भी नहीं खरीद सकते!

 डायवर्सन आवेदनों को मान्यता की मांग

किसानों ने मांग की है कि अधिसूचना से पहले किए गए सभी डायवर्सन आवेदनों को मान्य किया जाए। उसी आधार पर उचित मुआवजा दिया जाए। हाईवे की ऊंचाई पर भी बड़ा विरोध है।

 किसानों ने मांग की कि हाईवे को भूमि स्तर पर बनाया जाए और जहां ऊंचाई ज्यादा है, उसे तुरंत कम किया जाए। उनका कहना है कि अधिक ऊंचाई से जल निकासी, रास्ते और खेती पर गंभीर असर पड़ेगा।

 विधायक का आश्वासन

महेश्वर के विधायक राजकुमार मेव ने किसानों के दर्द को समझते हुए मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने और किसानों की मांगों को मजबूती से रखने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा है कि वे किसानों का नुकसान नहीं होने देंगे।

 अब नहीं सहेंगे अन्याय

नर्मदा तट पर आंदोलन कर रहे  अहिल्या लोक के बाशिंदों और मां नर्मदा की संतानों ने चेतावनी दी है कि अब इस अन्याय को और सहन नहीं किया जाएगा । जल्द ही नर्मदा तट पर बड़ा किसान आंदोलन किया जाएगा।

 धार्मिक और सामाजिक सवाल भी उठे

     संघ से जुड़े परियोजना प्रभावित किसानों ने सवाल उठाया – “ सनातन के नाम पर चल रही सरकार अपने ही सनातनी अन्नदाताओं पर यह कैसा अन्याय कर रही है?” उम्मीद है अहिल्याबाई की तरह न्यायप्रिय प्रदेश के शासक अपने बंधु किसानों के साथ अन्याय नहीं करेंगे।

 किसानों की प्रमुख मांगें

      गाइडलाइन दरों को चार गुना बढ़ाकर बाजार मूल्य के अनुसार किया जाए और इसके आधार पर चार गुना मुआवजा दिया जाए। सरकार द्वारा 4 गुना मुआवजा कानून का पालन किया जाए क्योंकि भूमि अधिग्रहण 2013 के कानून के तहत हो रहा है। साथ ही मांग की गई है कि अधिसूचना प्रशासन के पूर्व किए गए  डायवर्सन आवेदनों को मान्यता दी जाए। हाईवे की ऊंचाई भूमि स्तर पर लाई जाए। पुनर्वास और विकसित प्लॉट की व्यवस्था हो।

          किसानों ने कहा है कि फोरलेन परियोजना अब विकास नहीं, बल्कि किसानों के अस्तित्व की लड़ाई बन गई है। इस क्षेत्र में ग्रामीण कृषक मजदूर पहले ही बाँध और नहरों के कारण अपनी खेती सरकार को दे चुके हैं । इसके बाद जलूद पंपिंग स्टेशन नर्मदा प्रोजेक्ट इंदौर के लिए भूमि अधिग्रहित की गईं है। यानी तीन - तीन बार अधिग्रहण हो चुका है और अब फिर स्टेट हाईवे के लिए भूमि का अधिग्रहण हो रहा है।  एक ही क्षेत्र में किसानों की उपजाऊ भूमि चौथी बार छिनी जा रही है। कई किसानों की भूमि दूसरी - तीसरी बार सरकार अधिग्रहित कर रही है। जबकि कानून कहता है कि एक बार किसी की भूमि का अधिग्रहण होने के बाद दूसरी बार अधिग्रहण नहीं किया जा सकता जब तक कि बहुत ही ज्यादा जरूरी ना हो। अराजक सरकारी तंत्र से कृषक, मजदूर और ग्रामीण लगातार प्रताड़ित हो रहे हैं। निमाड़ क्षेत्र में खेती और किसानों की  लगातार अनदेखी और अन्याय से उपजा यह आक्रोश यदि नहीं थमा, तो यह आंदोलन प्रदेशव्यापी किसान आंदोलन का रूप ले सकता है। आक्रोश इसलिए भी है कि सिंहस्थ और विकास के नाम पर सबसे खेती किसानी और उस पर निर्भर हजारों लोगों का बलिदान लिया जा रहा है। सरकारी अधिकारी सुनियोजित तरीके से भूमि अधिग्रहण कर रहे हैं। धामनोद बड़वाह फोर लेने प्रोजेक्ट के लिए सरकारी गाइडलाइन बढ़ाने के पहले इस माह मार्च महीने में भूमि अधिग्रहण की धारा 11 की अधिसूचना प्रकाशित करवा दी गई। ताकि पुरानी गाइडलाइन से मुआवजा निर्धारित कर सके क्योंकि अप्रैल महीने से गाइडलाइन बढ़ जाएगी। वास्तव में कोई भी सरकार किसान और भूमि स्वामियों को जमीन के बदले ना जमीन देना चाहती ना पर्याप्त मुआवजा।

      किसानों ने मांग की है कि इंदौर उज्जैन ग्रीन फील्ड हाईवे की तरह उन्हें भी मुआवजा चार गुना तक दिया जाए। इंदौर के पश्चिमी रिंग रोड में जिस तरह से गाइडलाइन 240% तक बढ़ाई गई है, उसी तरह ही स्टेट हाईवे में भी बढ़ाई जाए और इसके आधार पर बाजार मूल्य के बराबर मुआवजा दिया जाए।