आकाशवाणी से अब हर सुबह गूंजेगा पूर्ण ‘वंदे मातरम’
आकाशवाणी से अब हर सुबह गूंजेगा पूर्ण ‘वंदे मातरम’
नई दिल्ली। भारत की आत्मा में रचा-बसा राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ अब हर सुबह एक नए, विस्तृत और अधिक भावपूर्ण रूप में देशवासियों के बीच गूंजेगा। आकाशवाणी ने आज, 26 मार्च से राष्ट्रीय गीत के छह छंदों वाले पूर्ण संस्करण का नियमित प्रसारण शुरू कर दिया है। यह केवल एक प्रसारण बदलाव नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना को और अधिक गहराई से स्पंदित करने का प्रयास है।
परंपरा से विस्तार की ओर
स्वतंत्रता के बाद से आकाशवाणी के सुबह के प्रसारण की एक स्थापित परंपरा रही है। प्रात: 5:55 बजे कर्णप्रिय धुन के साथ प्रसारण प्रारंभ होता है और उसके बाद ‘वंदे मातरम’ के दो छंदों वाला लगभग 65 सेकंड का संक्षिप्त संस्करण सुनाया जाता रहा है। लेकिन आज, 26 मार्च की सुबह श्रोताओं के लिए कुछ अलग थी। जैसे ही रेडियो तरंगों पर धुन बही, उसके बाद सुनाई दिया ‘वंदे मातरम’ का विस्तृत, पूर्ण स्वरूप जिसे सुनकर श्रोताओं को एक ऐसा अनुभव हुआ, जिसने देशभक्ति की अनुभूति को और गहन बना दिया।
तीन मिनट में समाई राष्ट्रभावना
राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के नए संस्करण की अवधि 3 मिनट 10 सेकंड है, जिसमें गीत के सभी छह छंद शामिल हैं। यह विस्तृत प्रस्तुति श्रोताओं को गीत के भाव, शब्द और संगीत की पूर्णता का अनुभव कराती है।
यह बदलाव न केवल एक तकनीकी निर्णय है, बल्कि उस सांस्कृतिक विरासत को संपूर्णता में प्रस्तुत करने का प्रयास है, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देश को एक सूत्र में पिरोया था।
शास्त्रीय संगीत का स्पर्श
वंदे मातरम के इस पूर्ण संस्करण को प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित चंद्रशेखर वाजे ने राग देस में स्वरबद्ध किया है। उनकी प्रस्तुति में शास्त्रीय संगीत की गंभीरता और देशभक्ति की भावनात्मक ऊष्मा का अद्भुत संगम दिखाई देता है। यह संगीतात्मक संयोजन ‘वंदे मातरम’ को केवल एक गीत नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव बना देता है।
स्थानीय रंगों में राष्ट्रीय स्वर
आकाशवाणी ने इस पहल को और व्यापक बनाने के लिए देश की सांस्कृतिक विविधता को भी साथ जोड़ा है। विभिन्न क्षेत्रीय वाद्ययंत्रों के साथ ‘वंदे मातरम’ के अलग-अलग संस्करण रिकॉर्ड किए जा रहे हैं। इन संस्करणों का प्रसारण संबंधित राज्यों के आकाशवाणी केंद्रों से किया जाएगा, जिससे यह राष्ट्रीय गीत स्थानीय सांस्कृतिक रंगों के साथ और अधिक आत्मीयता से जुड़ सकेगा।
श्रोताओं की अपेक्षा हुई पूरी
लंबे समय से आकाशवाणी के श्रोताओं की यह मांग रही थी कि ‘वंदे मातरम’ का पूर्ण संस्करण प्रसारित किया जाए। अब यह पहल उस जनभावना का सम्मान भी है और राष्ट्र के प्रति भावनात्मक जुड़ाव को सुदृढ़ करने का माध्यम भी।
एक कदम, जो भावना को विस्तार देता है
‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय अस्मिता, स्वतंत्रता संघर्ष और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। आकाशवाणी का यह निर्णय उस भावना को और व्यापक, और गहन रूप में जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास है। अब हर सुबह, आकाशवाणी से जब यह पूर्ण स्वरूप गूंजेगा, तो वह केवल एक प्रसारण नहीं होगा बल्कि वह एक अनुभूति होगी, जो देश को एक सूत्र में बांधती है।
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