आठवां वेतन आयोग 18 माह में रिपोर्ट, 30 अप्रैल तक मांगे गए सुझाव
आठवां वेतन आयोग
18 माह में रिपोर्ट, 30 अप्रैल तक मांगे गए सुझाव
नई दिल्ली। आंठवें वेतन आयोग के सम्बंध में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि आयोग का गठन किया जा चुका है और यह केंद्रीय कर्मचारियों व पेंशनरों के वेतन, भत्तों और पेंशन ढांचे में व्यापक बदलाव की सिफारिश करेगा। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने हाल ही में लोकसभा में आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के सम्बंध में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि आयोग के कार्यक्षेत्र (Terms of Reference) अधिसूचित किए जा चुके हैं तथा अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति भी हो चुकी है। आयोग को गठन की तिथि से 18 माह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि रिपोर्ट वर्ष 2027 के मध्य तक आ सकती है। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि आयोग की सिफारिशों को लागू करने की कोई निश्चित तिथि अभी तय नहीं की गई है और अंतिम निर्णय रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही लिया जाएगा।
आठवें वेतन आयोग से देश के लगभग 50.14 लाख केंद्रीय कर्मचारी और करीब 69 लाख पेंशनभोगी लाभांवित होंगे। सरकार ने यह भी कहा है कि आयोग की सिफारिशों के वित्तीय प्रभाव का आकलन फिलहाल संभव नहीं है और यह रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
इस बीच आयोग ने कर्मचारी संगठनों, पेंशनरों और अन्य हितधारकों से सुझाव भी आमंत्रित किए हैं। सुझाव देने की प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से संचालित की जा रही है। कर्मचारी संगठनों सहित सभी हितधारक 30 अप्रैल 2026 तक अपने विस्तृत मेमोरेंडम और सुझाव जमा कर सकते हैं। इससे पहले प्रारंभिक प्रश्नावली चरण 16 मार्च 2026 को समाप्त हो चुका है।
कर्मचारी संगठनों ने आयोग के समक्ष कई प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें सबसे अहम फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 3.68 करने, न्यूनतम वेतन को ₹18,000 से बढ़ाकर ₹26,000–₹30,000 करने तथा 50 प्रतिशत महंगाई भत्ते (DA) को मूल वेतन में मर्ज करने की मांग शामिल है। इसके अलावा हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में संशोधन, MACP प्रमोशन नियमों में बदलाव, पेंशनरों के लिए समान फिटमेंट तथा नई पेंशन योजना (NPS) में अधिक सुरक्षा जैसी मांगें भी प्रमुखता से उठाई गई हैं।
इन मांगों के लागू होने की स्थिति में कर्मचारियों के वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। उदाहरण के तौर पर, यदि फिटमेंट फैक्टर 3.68 लागू होता है, तो ₹25,500 की मौजूदा बेसिक सैलरी लगभग ₹93,840 तक पहुंच सकती है, जबकि ₹44,900 की बेसिक सैलरी बढ़कर करीब ₹1.65 लाख हो सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक फिटमेंट फैक्टर 3.0 से 3.5 के बीच रहने की अधिक संभावना है।
वेतन आयोग की सिफारिशों का असर केवल बेसिक सैलरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता और अन्य भत्तों पर भी पड़ेगा, जिससे कर्मचारियों की कुल इन-हैंड सैलरी में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। पेंशनभोगियों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा, क्योंकि पेंशन की गणना मूल वेतन के आधार पर होती है।
कुल मिलाकर, आठवां वेतन आयोग फिलहाल प्रक्रिया में है और आने वाले समय में इसकी सिफारिशें केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों की आर्थिक स्थिति पर बड़ा प्रभाव डाल सकती हैं। फिलहाल सभी की नजरें आयोग की रिपोर्ट और सरकार के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई हैं।
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