विनोद नागर को उज्जैन में मिलेगा

साहित्य गौरव सम्मान

     भोपाल। मध्यप्रदेश के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ लेखक, पत्रकार, समीक्षक और स्तंभकार श्री विनोद नागर को साहित्य गौरव सम्मान देने की घोषणा की गई है। उन्हें यह सम्मान आगामी 14 दिसम्बर को उज्जैन में श्री मौनतीर्थ हिन्दी विद्यापीठ द्वारा आयोजित पाँचवे राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान होने वाले सारस्वत सम्मान समारोह-2025 में प्रदान किया जाएगा। अभी तक उनकी 10 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

     श्री विनोद नागर को इसी वर्ष मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी का नरेश मेहता सम्मान भी मिला है। इससे पूर्व लेखन और पत्रकारिता के क्षेत्र में श्री नागर को उनके सुदीर्घ योगदान के लिये बालकवि बैरागी शिखर सम्मान, तुलसी साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश लेखक संघ, दुष्यंत कुमार पांडुलिपि संग्रहालय, अभिनव कला परिषद्, अखिल हिन्दी साहित्य सभा, साहित्य गंगा, कादंबरी, संपादक संघ सम्मान आदि से नवाज़ा जा चुका है।    

      साहित्य अकादमी का नरेश मेहता सम्मानउनकी 2022 में प्रकाशित कृति सिने सरोकारके लिये दिया गया, जिसमें सिनेमा के सामाजिक सरोकारों को तलाशते 50 से अधिक आलेख संकलित हैं। भारतीय सिनेमा के बदलते परिदृश्य को रेखांकित करती यह पुस्तक लेखक ने अपने समय की लोकप्रिय फिल्म पत्रिका माधुरीके मूर्धन्य संपादक स्मृतिशेष श्री अरविन्द कुमार को समर्पित की है, जिन्होंने सत्तर और अस्सी के दशक में श्री नागर के अनेक लेख इस पत्रिका में प्रकाशित किये।

      गौरतलब है कि वरिष्ठ फिल्म समीक्षक के रूप में श्री नागर की भारत में हिन्दी फिल्मों की पहली जुड़वाँ पुस्तकें- सुबह सवेरे का सिने विमर्शऔर सिने विमर्श सुबह सवेरे काभी काफी चर्चित रही हैं। प्रजातंत्र में बातें फिल्मों कीशीर्षक से प्रकाशित उनकी एक अन्य पुस्तक कोरोना काल में सहमे बॉलीवुड की कसक को बयाँ करती है।

      उज्जैन में जन्में और पले-बढ़े श्री नागर की पचास साल (1971 से 2021) की शब्द यात्रा को समेटे छह खण्डों वाला रचना समग्र ज्ञानमुद्रा प्रकाशन से छपकर आया है। इस रचना समग्र की पुस्तकों- आस-छपास’ ‘छपा-अनछपा’ ‘लिखा तो छपा’ ‘खूब लिखा-खूब छपा’ ‘सिने झरोखा और सिने सरोकार को यथोचित सराहना मिली है। उन्होंने अपने दिवंगत पिता (स्व.) श्री रामवल्लभ नागर की आत्मकथा सबकी अपनी राम कहानी का संपादन भी किया है।

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