मित्रों नमस्कार.... शुभ प्रभात....  आज 01 जनवरी है। सन 2025 शुरू हो गया है। वर्ष और तारीख के परिवर्तन के अवसर पर समूचे विश्व में उत्साह का वातावरण है। एक –दूसरे को बधाई और शुभकामनाएं देकर इस वार्षिक परिवर्तन से सभी खुश हो रहे हैं लेकिन असली खुशी तो आंतरिक यानी हमारे अंदर की खुशी होती है। मान्यता है कि हमारे कारण यदि किसी के चेहरे पर खुशी दिखाई दे तो उससे हमें भी बेहद खुशी होती है, वह  अनमोल होती है। ऐसी ही खुशी, किसी का जीवन बचाने में होती है। दूसरों का जीवन बचाने के लिए अंगदान सबसे कारगर तरीका है। अंगदान विषय पर इंदौर के वरिष्ठ पत्रकार श्री कीर्ति राणा ने अंगदान : पुण्य कमाने का आसान तरीका आलेख में उदाहरण देते हुए विस्तार से बताया है कि व्यक्ति की मौत होने के बाद भी मृतक के परिजन अन्य मरीजों / जरूरतमंदों को नया जीवन दे सकते हैं। हर दिन हजारों लोगों की मौत होती है। यदि अंगदान के प्रति और जागरूकता आएगी तो निश्चित ही बड़ी संख्या में मरीजों का जीवन बचाया जा सकता है। उम्मीद है, नए वर्ष में अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ेगी और अंगदान करने वालों की संख्या में इजाफा होगा। इसी संकल्प के साथ आप सभी पाठकों को आंग्ल नए वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं...... मधुकर पवार   

 

नव वर्ष विशेष ........

अंगदान : पुण्य कमाने का आसान तरीका

  • कीर्ति राणा

      बहुत आसान है अपने दिवंगत परिजन को जिंदा रखना, बस इतना करना है कि उस सदस्य की मौत के तत्काल बाद उसके नेत्रदान, त्वचा दान, देहदान का निर्णय कर लिया जाए। रक्तदान तो महादान है ही, रक्तदान से सीखा जा सकता है कि इस दान में जाति-धर्म-वर्ग की नफरत आड़े नहीं आती क्योंकि सब की रगों में बहने वाले खून का रंग एक सा होता है और इसीलिये यह महादान भी माना गया है। रक्त दान शिविरों में उत्साह से रक्तदान करने वालों ने न जाने कितने अनजान लोगों की जान बचाई है। रक्तदान जितना आसान है, उतना ही आसान नेत्र, त्वचा, अंगदान या देहदान भी हो सकता है पर इसमें सबसे बड़ी चुनौती रहती है परिवार के बाकी सदस्यों को मानसिक रूप से तैयार करने की। मृतक ने भले ही अंतिम इच्छा नेत्र दान, अंगदान की कर रखी हो, लेकिन बाकी सदस्य यदि ऐसे दान की महत्ता को ना समझ पाए तो यह पुण्य कार्य संभव नहीं हो पाता है।

इंदौर शहर में रक्तदान के बाद नेत्रदान के प्रति बढ़ती जागरुकता के बाद शहर में त्वचा, अंगदान, देहदान के प्रति भी बढ़ते सकारात्मक माहौल का ही परिणाम है कि अब ज्यादातर परिवार खुद ही इस काम में लगी संस्थाओं को सूचना देने में विलंब नहीं करते। इस जागरुकता का ही परिणाम है कि अब तक 845 लोगों की त्वचा दान के बाद इंदौर देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है, पहले स्थान पर नवी मुंबई के डॉ सुनील केसवानी की संस्था है। इसकी एक बड़ी वजह यह भी कि लोगों में त्वचा दान को लेकर फैला भ्रम भी दूर हो रहा है।

नेत्रदान के मामले में सिंधी और जैन समाज की तरह अन्य समाजों में ऐसी जागरुकता आना बाकी है। लेकिन सुखद बदलाव धीरे- धीरे ही सही, हो तो रहा है। मुस्कान ग्रुप से जुड़े संदीपन आर्य बताते हैं 2010 से विधिवत रिकार्ड रखने का ही परिणाम है कि अकेले इंदौर में विभिन्न संस्थाओं की सजगता से 14 हजार कार्निया एकत्रित किये जा चुके हैं। मृत व्यक्ति के परिजनों की कॉउंसलिंग के चलते त्वचा दान के प्रति तो सजगता बढ़ी ही है, ब्रेन डैड मरीजों के अंगदान का महत्व भी समझ में आ रहा है। इसका सारा श्रेय तत्कालीन संभागायुक्त संजय दुबे को दिया जा सकता है। उनकी पहल पर ही ब्रेन डैड पेशेंट के अंगदान के लिये इंदौर सोसायटी फार ऑर्गन डोनेशन की स्थापना 2016 में की गई थी। तब से अब तक इंदौर में 59 ब्रेन डैड पेशेंट के अंगदान किये जा चुके हैं। यदि इन मरीजों के अंगों से अन्य शहरों के मरीजों को जीवनदान मिला है तो अन्य शहरों के ब्रेन डैड मरीजों के अंगों का इंदौर के मरीजों में भी प्रत्यारोपण किया गया है। सूरत से दान में मिला दिल इंदौर के एक मरीज में धड़क रहा है तो इंदौर की ब्रेन डैड पेशेंट श्रीमती विनीता खंजाची के ट्रांसपोर्ट व्यवसायी पति सुनील खंजाची द्वारा दी गई सहमति के बाद उनकी पत्नी का एक हाथ नवसारी की एक 19 वर्षीय युवती को प्रत्यारोपित किया गया है। चैन्नई, मुंबई, दिल्ली, भोपाल के मरीजों को भी इंदौर के ब्रेन डैड पेशेंट के अंगों से राहत मिली है। अपने पिता सोहनलाल गांधी की देहदान करने वाले समाजसेवी रजनीकांत गांधी कहते हैं  हूमड़ समाज इस पुण्यकार्य में सजग है। पिताजी की अंतिम इच्छा थी कि उनकी देह मेडिकल एजुकेशन में स्टूडेंट के काम आए, इसलिये हमने यह निर्णय लिया। 

🔹 अब हार्ट वॉल्व, बोन बैंक की स्थापना 

 मुस्कान ग्रुप के संदीपन आर्य ने चर्चा में बताया अब इंदौर में हार्ट वॉल्व और बोन बैंक की स्थापना की दिशा में पहल चल रही है।हार्ट वॉल्व बैंक के लिये अरविंदो और मेदांता हॉस्पिटल प्रबंधन से बात चल रही है। इसी तरह बोन बैंक सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल और मेदांता दोनों में से कही भी स्थापित की जा सकती है।

🔹 मां के नेत्रदान के लिये परिजनों को राजी किया, तब से सक्रिय हो गए जनचेतना के लिये

इंदौर शहर में नेत्रदान के लिये 2004 से पहले गीता भवन अस्पताल का नेत्र बैंक काम करता था। संदीपन ने बताया 2004 में मां गीतादेवी आर्य के निधन पर वो चाहते थे कि मां के नेत्र दान करें लेकिन बाकी परिजनों को इसके लिये राजी करने में ढाई-तीन घंटे लग गए। पिता छत्रसाल आर्य का 2010 में निधन हुआ तब उनकी देहदान करना तय किया तब भी विरोध हुआ था कि बाकी कर्मकांड कैसे सम्पन्न होंगे?  तब पंडितों से भ्रांति दूर करवाई। शहर में किसी परिवार में मौत होने की जानकारी मिलने पर संदीपन और अन्य साथी वहां पहुंच कर परिजनों की कॉउंसलिंग करते हैं कि वे मृतक के नेत्रदान की सहमति दें। परिजन राजी हो जाते तो डॉ सी.एम. शर्मा को दिन हो या देर रात, उन्हें लेने और छोड़ने भी जाते थे। तब डॉ. सुधीर महाशब्दे ने भी खूब सहयोग किया। 2010 में विधिवत मुरलीधर किशन गोपाल पारमार्थिक ट्रस्ट ने विधिवत एम.के. इंटरनेशनल आई बैंक की स्कीम नंबर एम.आर. 9 पर स्थापना की। एम.वाय. अस्पताल में नेत्र रोग विभाग के आई बैंक द्वारा 2023 में पचास से अधिक निशुल्क कार्निया प्रत्यारोपण का कीर्तिमान बना चुका है। नेत्रदान के लिये जागरूकता बहुत होने के बाद भी कम इसलिये है कि एक दिन या एक महीने में मौत का औसत आंकड़ा जितना रहता है उतने कार्निया प्राप्त नहीं हो रहे हैं।

शंकरा आई हॉस्पिटल (स्कीम नंबर 74 सी, विजय नगर) के डीन डॉ. ऋतुराज शर्मा ने बताया कि नेत्रदान के मामले में इंदौर में जागरूकता बहुत बढ़ी है, इसकी मुख्य वजह विभिन्न संगठन, एनजीओ हैं जो जागरुकता के लिये काम कर रहे हैं। अस्पताल को हर माह में 50-60 और साल में 600 कार्निया प्राप्त हो जाते हैं। इसमें से 65 प्रतिशत का उपयोग हो जाता है। इंदौर से कार्निया देश के अन्य शहरों में भी भेजते हैं। तत्कालीन डीन डॉ. संजय दीक्षित के वक्त अंगदान की दिशा में खूब काम हुआ है।

🔹  इंदौर के लोगों की सजगता से अंगदान मामले में सफलता मिली : संजय दुबे

तत्कालीन कमिश्नर संजय दुबे (अभी प्रमुख सचिव गृह) ने ऑर्गन डोनेशन कमेटी गठित की थी। उनके कार्यकाल में सर्वाधिक अंगदान हुए ।प्रजातंत्र से चर्चा में संजय दुबे का कहना था  “समिति गठित करने का उद्देश्य यही था कि इस काम में सभी का सहयोग जरूरी था। समिति में मैं ही सर्वेसर्वा हो जाता तो कुछ नहीं होता । समाजसेवी संस्थाओं, एनजीओ को जोड़ने से शहर में माहौल बना। डीन मेडिकल कॉलेज को इसलिये रखा कि अंगदान की मुख्य प्रक्रिया मेडिकल और डॉक्टरों से जुड़ी है। समिति में कलेक्टर को इसलिये रखा कि ग्रीन कॉरिडोर सहित अन्य प्रशासनिक इंतजाम में कलेक्टर, एसपी की मुख्य भूमिका रहती है। इंदौर के लोगों को सारा श्रेय इसलिये दिया जाना चाहिए कि दान देने में उदारता की प्रवृत्ति ने अंगदान में भी तत्परता दिखाई। कार्निया दान में तो यह शहर वैसे ही अग्रणी रहा है। सोसायटी के गठन के साथ वेबसाइट से पंजीकरण की सुविधा से आसानी हुई। राज्य सरकार से अनुमति लेकर डीन मेडिकल कॉलेज को अधिकार दिये गये ताकि अनावश्यक विलंब को टाला जा सके।“

🔹 बिना रक्तस्राव के होता है त्वचा का दान 

अभी भी लोग अपने मृत सदस्य का त्वचा दान करने से इसलिये घबराते हैं कि शरीर से त्वचा निकालने पर रक्त बहता होगा, जबकि यह गलतफहमी है। मृत मानवीय शरीर से कमर के नीचे जांघ और घुटने के नीचे की पिंडलियों से डर्मेटोन मशीन से त्वचा (ऊतक) निकालते हैं। जहां से त्वचा निकाली जाती है वहां बस व्हाइट स्पॉट हो जाता है, रक्त स्त्राव नहीं होता। अंतिम स्नान, अंतिम दर्शन में कोई दुविधा नहीं होती। एक व्यक्ति से मिली त्वचा आग में झुलसे कई लोगों की बदसूरती दूर करने में सहायक होती है। शहर में त्वचा (ऊतक) दान बैंक चोईथराम अस्पताल में स्थापित है और डर्मेटोन मशीन रोटरी क्लब नीदरलैंड ने भेंट की है।

🔹 सूचना मिलते ही पहुंच जाते हैं मृत व्यक्ति के परिजनों की कॉउंसलिंग के लिये 

मुस्कान ग्रुप में 150 सदस्य सक्रिय हैं। जिन्हें विभिन्न प्रकोष्ठों का प्रभार दे रखा है। सूचना मिलने पर ये सारे लोग अपना काम छोड़कर अपनी जिम्मेदारी पूरी करने पहुंच जाते हैं। नेत्रअंग, देहदान के काम में रेणु जयसिंघानी, जीतू बंगानी, राजेंद्र माखीजा, हरपाल सितलानी, लकी खत्री, विजय सचदेव, उमेश कुंडल, कन्हैया मूलचंदानी जुटे हुए हैं। शहर के तीन आई बैंक, एक स्कीन बैंक, दधीची मिशन, लायंस-रोटरी क्लब, विजय वेलफेयर फाउंटडेशन, जैन सोशल ग्रुप आदि चौबीस घंटे इस पुण्य कार्य को सम्पन्न कराने के लिये सक्रिय हैं। 32 साल पहले रजिस्टर्ड मुस्कान ग्रुप पारमार्थिक ट्रस्ट नेत्र, त्वचा, अंगदान, देहदान, ब्लड डोनेशन कैंप के साथ ही सिंधी समाज की गरीब कन्याओं के सामूहिक विवाह के लिये भी काम कर रहा है। बड़नगर में गीताभवन ने छह साल पहले आई कलेक्शन सेंटर शुरु किया। धार्मिक संस्था के जुड़ने का प्रभाव यह हुआ कि बड़नगर से 580 जोड़ी कार्निया छह साल में प्राप्त हुए हैं। हुमड़ जैन समाज के पवन बागड़िया भी समाज में सक्रिय हैं।

🔹 बेटे के अंगदान के बाद 8 साल में तीन देहदान करा चुका है महिदपुर में डोसी परिवार 

समाजसेवी-पत्रकार जवाहर डोसी पीयूष के जवान पुत्र विश्वास डोसी को 8 फरवरी 16 को मेदांता अस्पताल के डॉक्टरों ने ब्रेन डैड घोषित कर दिया। स्वप्रेरणा से जवाहर डोसी ने बेटे के अंगदान का निर्णय लिया। पत्नी सुभद्रा, बहन प्रभा धाकड़ के साथ ही विश्वास की पत्नी गरिमा और बेटी श्रेष्ठी को राजी किया। 9 फरवरी को प्रशासन ने पांचवां ग्रीन कॉरिडोर बनाया और विश्वास की किडनी, लीवर, आंखें, त्वचा विभिन्न शहरों के जरूरतमंद मरीजों के लिये रवाना किये। बेटे के अंगदान के बाद से जवाहर डोसी अंगदान के लिये जनजागरण में ऐसे जुटे हैं कि अब तक महिदपुर में तीन देहदान करा चुके हैं। डोसी के इस काम की तत्कालीन कमिश्नर संजय दुबे भी सराहना कर चुके हैं। 

🔹 सोहनलाल गांधी की देह दान की 

हाल ही में सोहनलाल गांधी का अंगदान, नेत्र और देहदान करने का आदर्श स्थापित करने वाले उनके पुत्र इंदौर निवासी रजनीकांत कहते हैं हूमड़ समाज में इस काम को लेकर सजगता है। पिताजी की अंतिम इच्छा थी कि मेरा देहदान मेडिकल की पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट के काम आए इसलिये हमारे परिवार ने खुशी-खुशी यह निर्णय लिया।

🔹 पत्नी पुष्पा गांधी के नेत्र और त्वचा दान 

हूमड़ समाज के समाजसेवी विमलचंद गांधी की पत्नी और पूर्व पार्षद सुरेश मिंडा की बहन पुष्पादेवी गांधी के निधन पर परिजनों ने उनके नेत्र और त्वचा दान का निर्णय लिया था। इसके साथ ही गांधी परिवार ने उनकी स्मृति में ट्रस्ट निर्माण, मंदिरों और समाज की संस्थाओं के लिये 6.51 लाख रु दान की घोषणा भी की। शोक बैठक में मुस्कान ग्रुप के सदस्यों ने गांधी परिवार को नेत्र और त्वचा दान संबंधी सम्मान पत्र भी भेंट किये। 

 

🔹  इस अवधि में कर सकते हैं दान 

 

नेत्र दान मृ्त्यु होने के बाद ठंड में आठ घंटे और  गर्मी में छह घंटे की अवधि में कर सकते हैं। मृत देह से त्वचा दान 24 घंटे की अवधि में। यदि शव मरचुरी में रखना पड़े तो अधिकतम 72 घंटे में नेत्र, त्वचा दान कर सकते हैं। क्योंकि इस अवधि तक बाडी में डिकंपोज की प्रक्रिया नहीं होती।   मेडिकल एजुकेशन के लिये देह दान करना हो तो चिकित्सा महाविद्यालय शव लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिये रसायन प्रक्रिया (इंवॉलिंग) अपनाता है।

🔹 नेत्रदान,देहदान, अंगदान के लिये फोन करें 

परिवार के किसी सदस्य की अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनके नेत्र, त्वचा, अंगदान, देहदान करना चाहते हों तो इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं। 

🔹 नेत्रदान-त्वचा दान 

संदीपन आर्य 

93032 59844

जीतू बगानी 

90090-09008

🔹 देहदान 

नंद किशोर व्यास 

99931-75407

🔹 अंगदान (ब्रेन डैड मरीज) 

डॉ मनीष पुरोहित नोडल अधिकारी 

81096-71170

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वरिष्ठ पत्रकार श्री कीर्ति राणा