मौनी अमावस्या अमृत स्नान............... अखाड़ों ने पहले स्नान करने की प्रतीज्ञा तोड़ी
मौनी अमावस्या अमृत स्नान...............
अखाड़ों ने पहले स्नान करने की प्रतीज्ञा तोड़ी
प्रयागराज, 29 जनवरी। तीर्थराज प्रयागराज में चल रहे विश्व के सबसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन महाकुम्भ में मौनी अमावस्या के अवसर पर मची भगदड़ में 30 श्रद्दालुओं की मौत के बाद आज सभी 13 अखाड़ों ने महाकुम्भ में पहले स्नान करने की प्रतीज्ञा और परम्परा को तोड़कर सराहनीय पहल की है। मौनी अमावस्या के अवसर पर देर रात भगदड़ मचने से श्रद्दालुओं की मौत की दर्दनाक खबर के बाद सभी 13 अखाड़ों ने अपने ब्रह्म मुहूर्त के अमृत स्नान को स्थगित कर दिया और श्रद्धालुओं को पहले स्नान करने का अवसर दिया। यह पहला मौका है जब साधु-संतों, नागा संन्यासी और अखाड़ों ने संगम में ऐतिहासिक पहले स्नान करने की प्रतिज्ञा तोड़ दी। अविरल और निर्मल त्रिवेणी संगम में आज करीब 10 करोड़ श्रद्धालुओं ने दूसरा अमृत स्नान किया। अमृत स्नान करने वालों में बड़ी संख्या में विदेशी भी शामिल थे ।

मौनी अमावस्या पर प्रयागराज महाकुम्भ के दूसरे अमृत स्नान में देश के तीन पीठों के शंकराचार्यों ने भी त्रिवेणी के संगम में डुबकी लगाई। श्रृंगेरी शारदा पीठाधीश्वर जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी विधु शेखर भारती जी, द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी और ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी ने त्रिवेणी संगम में पुण्य की डुबकी लगाई। तीनों पीठ के शंकराचार्य मोटर बोट के माध्यम से त्रिवेणी संगम पहुंचे, जहां पूरे धार्मिक विधि विधान से तीनों शंकराचार्यों ने आस्था की डुबकी लगाई और देश की जनता के कल्याण के लिए आशीष दिया।
महाकुम्भ के इस ऐतिहासिक अवसर पर मेला प्रशासन द्वारा अमृत स्नान को सुचारु रुप से सम्पन्न कराने के लिये व्यापक व्यवस्था की गयी है। पूरे मेला क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। मेला क्षेत्र में राज्य पुलिस के साथ-साथ केन्द्रीय अर्धसैनिक बलों की भी भारी मात्रा में तैनाती की गई है। महाकुम्भ मेला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी उपाय किए हैं। इसके अलावा, घाटों पर गंगा सेवा दूतों की तैनाती की गई हैं, जो नदी की स्वच्छता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन गंगा सेवा दूतों ने श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित फूलों और अन्य सामग्रियों को तुरंत नदी से बाहर निकालकर गंगा और यमुना की स्वच्छता बनाए रखी।
महाकुम्भ का आयोजन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा देने में सफल रहा है। महाकुम्भ मेला प्रशासन द्वारा आयोजन को सुरक्षित एवं सफल बनाने के लिय सभी ज़रुरी इंतजाम किये गये है। महाकुम्भ की लोकप्रियता और सांस्कृतिक धरोहर को दुनिया भर में पहचान मिल रही है। महाकुम्भ में आने वाले विदेशी श्रद्धालु भी भारतीय संस्कृति से प्रभावित हुए और गंगा स्नान के साथ-साथ भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का अनुभव प्राप्त कर रहे हैं।
महाकुम्भ 2025 का यह आयोजन आस्था, एकता और विविधता का प्रतीक है। यह केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को भारतीय संस्कृति की महानता का एहसास करा रहा है। महाकुम्भ मेला धार्मिक दृष्टि से तो महत्वपूर्ण है सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है।
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