खाद का संकट......

बुआई करें या खाद के लिए

रतजगा कर लाईन में लगे  किसान

  • कीर्ति राणा

 केंद्र में चाहे शिवराज सिंह चौहान कृषि मंत्री हों या उनसे पहले नरेंद्र सिंह तोमर.... इस विभाग के मंत्री रहे मालवा-निमाड़ सहित प्रदेश के किसानों को खाद के संकट से कभी निजात नहीं मिल पाई। बारिश के चलते किसानों ने बिजाई (बुआई) का काम शुरू कर दिया है, लेकिन किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल पा रही है। किसान खाद के लिए लंबी लाइन के साथ रतजगा कर रहे हैं। जैसे पर्व-त्यौहार का आना तय रहता है, उसी तरह खाद संकट भी हर साल किसानों का टेंशन और सरकार की परेशानी बढ़ाने वाला हो गया है। किसान इस मारामारी से परेशान हैं किंतु सरकार का रटारटाया जवाब है खाद का कहीं कोई संकट नहीं है।  

     संयुक्त किसान मोर्चा के रामस्वरूप मंत्री, बबलू जाधव ने कहा मालवा निमाड़ अंचल में डीएपी की भारी कालाबाजारी की जा रही है। किसानों को महंगे दामों पर जरूरत का खाद खरीदना पड़ रहा है । कृषि विभाग का भी खाद वितरण पर कोई नियंत्रण नहीं है। ग्रामीण सोसाइटी पर किसानों को खाद नहीं मिल रही है जबकि कालाबाजारी में भरपूर मात्रा में खाद उपलब्ध है ।

     नियमानुसार कंपनी से रेलवे की रेक पर खाद उतरते ही उसको और ऑनलाइन पोर्टल पर चढ़ाया जाना चाहिए तथा इसकी जानकारी कृषि विभाग को दी जाना चाहिए। बाद में उसे कहीं भी भेजे जाने के लिए कृषि विभाग की अनुमति लिया जाना जरूरी है, लेकिन पूरे अंचल में ऐसा कहीं नहीं हो रहा है और विक्रेता अपनी मर्जी से डीएपी का परिवहन कर रहे हैं। 

जांच करेंगे तो सामने आएगी पोलपट्टी

      किसान नेताओं ने इंदौर उज्जैन संभाग के खाद वितरण की उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है।  अभी तक कितनी खाद आई है, किन-किन गोदाम में रखी गई है तथा किन-किन व्यापारियों को वितरित की गई है, इसकी भी जांच कराएं। कृषि विभाग भी खाद वितरण पर निगरानी रखने में असफल रहा है । हरदा की तरह इंदौर में भी खाद विक्रेताओं के यहां छापे लगाने के साथ ही हर दिन के स्टॉक-बिक्री की जानकारी सार्वजनिक की जाए। 

 

     भाकिसं के प्रदेश अध्यक्ष का आरोप सरकार ने डीएपी का इंपोर्ट कम किया है। भारतीय किसान संघ (भाकिसं) के बैनर तले इंदौर सहित अन्य जिलों में किसानों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कर जिले में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने की मांग की है। भारतीय किसान संघ, मध्य भारत प्रांत के अध्यक्ष सर्वज्ञ दीवान का कहना है सरकार प्रदेश में खाद के पर्याप्त इंतजाम के दावे कर रही है, लेकिन फिर भी खाद वितरण केंद्रों पर किसानों की लंबी लाइनें लग रही है। किसानों को खाद के लिए सोसायटियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। कहीं लाइन के रूप में टोकन रखे जा रहे हैं । दीवान के मुताबिक इस संकट का मुख्य कारण इस बार सरकार द्वारा डीएपी का कम इम्पोर्ट करना है। जिसकी वजह से किसान परेशान हो रहे हैं।

      दीवान ने कहा जबलपुर के पाटन, पनागर, सिहोरा में आधार कार्ड की लाइन लगी तस्वीरें सामने आई हैं। खाद के लिए किसानों को दिन-रात लाइन लगाकर बैठना पड़ रहा है । यह स्थिति जबलपुर क्षेत्र की ही नहीं है, बल्कि ऐसे ही हालात बुंदेलखंड, ग्वालियर चंबल और मालवा-निमाड़ इलाकों में भी है। फसल बुवाई का समय निकलता जा रहा है और किसान को अब तक खाद नहीं मिल पा रही है। ऐसे में भारतीय किसान संघ और किसानों को सड़क पर उतरना पड़ रहा है। 

संकट खाद का नहीं कांग्रेस संकट में है- सीएम डॉ यादव 

    प्रदेश में खाद संकट , किसानों की परेशानी को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने जबलपुर में सरकार से ये पूछ लिया था कि क्या सरकार खाद की कालाबाजारी करवाना चाहती है? सिंघार के इस आरोप को नकारते हुए सीएम मोहन यादव ने कहा - खाद का संकट नहीं बल्कि कांग्रेस में संकट है। कांग्रेस के नेताओं के पास मुद्दों का भी संकट है।

 

ये कारण है खाद संकट के 

हर फसल के समय मांग बढ़ने पर समय पर आपूर्ति ना होना और वितरण में गड़बड़ी और अनियोजित स्टॉक भी प्रमुख कारण है। किसानों को रातभर लाइन में लगना पड़ता है, कई जगह थानों से पर्ची लेकर खाद मिलती है, उनकी मेहनत और समय दोनों बर्बाद होते हैं। हर साल यह आरोप लगते हैं कि प्रशासन की मिलीभगत से खाद की कालाबाजारी होती है। सरकार इसे नकारती रही है। मालवा निमाड़ में भी ग्रामीण सोसाइटियों पर नहीं मिल रहा है खाद। 

 डीलर, कंपनी के अधिकारियों की 

साठगांठ से डीएपी कालाबाजारी

     किसानों को तो डीएपी खाद के लिए परेशान होना पड़ रहा है, दूसरी ओर डीलर, कंपनी के अधिकारियों से मिलीभगत कर कालाबाजारी कर रहे हैं । नियमानुसार कंपनी से डीएपी आने पर उसे कृषि विभाग की सूचना के बगैर कहीं नहीं भेजा जा सकता है।  गत दिनों हरदा जिले में डीलर और कंपनी की मिलीभगत से भारी मात्रा में डीएपी की कालाबाजारी का मामला पकड़ा गया था । जिसमें एक ही फर्म डीलर, हैंडलर, और ट्रांसपोर्टर थी और बगैर कृषि विभाग को जानकारी दिए आसपास के सभी जिलों में डीएपी के कालाबाजारी कर रही थी। 

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श्री कीर्ति राणा  वरिष्ठ पत्रकार हैं। दैनिक भास्कर सहित अनेक समाचार पत्रों में सम्पादक का बखूबी दायित्व निभाने और पत्रकारिता में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले श्री राणा की इंदौर और मध्यप्रदेश की सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक गतिविधियों पर लगातार लिख रहे हैं। इन दिनों में इंदौर के प्रतिष्ठित दैनिक “प्रजातंत्र” में अपनी सेवाए दे रहे हैं।