डी.ए.वी.वी. की जनजातीय अध्ययनशाला को

मिलेगी केंद्रीय सहायता

 

इंदौरदेवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के जनजातीय अध्ययनशाला, के विकास के लिए भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह आश्वासन केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुआल ओराम और राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके  ने नई दिल्ली में उनसे मुलाकात करने गए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राकेश सिंघई एवं जनजातीय अध्ययनशाला के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सखाराम मुजाल्दे को दिया। इस अवसर पर खरगोन-बड़वानी लोकसभा क्षेत्र के लोकप्रिय सांसद श्री गजेंद्र सिंह पटेल भी उपस्थिति थे ।  मंत्री द्वय के साथ संवाद के दौरान जनजातीय अध्ययनशाला के लिए पुस्तकालय, शोध कक्ष, स्मार्ट क्लासरूम, कंप्यूटर प्रयोगशाला, शिक्षकों के लिए प्रथक कक्ष, छात्रावास एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं के विस्तार हेतु औपचारिक प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। श्री ओराम और उईके एवं सांसद महोदय ने इस शैक्षणिक पहल को राष्ट्र निर्माण में सहभागी बताते हुए इसे पूर्ण समर्थन देने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के प्रति विश्वविद्यालय की यह प्रतिबद्धता सराहनीय है और मंत्रालय इसके समुचित विकास हेतु हर संभव सहायता देगा।

इस महत्वपूर्ण आश्वासन के बाद अध्ययनशाला के विद्यार्थियों में हर्ष एवं गर्व की लहर दौड़ गई। उन्होंने भारत सरकार के दोनो मंत्रियों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहयोग उनके शैक्षणिक भविष्य के लिए नई रोशनी लेकर आया है। विद्यार्थियों ने कुलपति प्रो. सिंघई एवं विभागाध्यक्ष प्रो. मुजाल्दे के प्रति विशेष धन्यवाद ज्ञापित करते हुए इसे सच्चे नेतृत्व की मिसाल बताया। यह पहल केवल विश्वविद्यालय के लिए ही नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश शासन, भारत सरकार एवं विशेष रूप से जनजातीय समाज के लिए एक दूरगामी एवं परिवर्तनकारी कदम है। इससे न केवल उच्च शिक्षा में नवाचार आएगा, बल्कि इंदौर जैसे शहर में जनजातीय विमर्श का राष्ट्रीय केंद्र विकसित होने की संभावना भी सशक्त होगी।

       स्थानीय स्तर पर यह खबर विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा और सामाजिक उत्तरदायित्व को नई पहचान देती है। यह स्पष्ट संकेत है कि देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक समावेशन की दिशा में एक नई दृष्टि और प्रतिबद्धता के साथ अग्रसर है।

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न्यूज़ सोर्स : संतोष पाटीदार