भोपाल के भेल नगर में विराट हिन्दू सम्मलेन में
संघ के पंच परिवर्तन में भागीदारी का लिया संकल्प


 भोपाल 11  जनवरी। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ द्वारा देश भर में आयोजित किए जा रहे हिन्दू सम्मलेनों की कड़ी में भोपाल के अयोध्या बायपास स्थित भेल नगर में आज विराट हिन्दू सम्मलेन आयोजित किया गया। संघ की वृन्दावन बस्ती के तत्वावधान में आयोजित इस सम्मलेन में संघ के भोपाल के विभाग प्रचारक एवं सम्मेलन के मुख्य वक्ता श्री शिवम ग्वाला ने कहा कि कुछ वर्षों पहले हिंदू कहने में संकोच होता था, लेकिन अब हिन्दू कहने में गर्व महसूस करते हैं । उन्होंने कहा कि सात - आठ सौ  वर्षों गुलामी के कारण भारतवासी अपना मूल स्वभाव भूल गए थे और जब हिन्दुओं को संगठित करने की बात आती है तो कहा जाता था कि जिस तरह ज़िंदा मेढकों को तराजू में तौलना मुश्किल है, उसी तरह हिन्दुओं के संगठित करना भी कठिन है लेकिन अब स्थितियां बदल गयी है। अब जाति और भेदभाव से इतर राष्ट्रीय एकता और मानवता को केंद्र में रखकर सभी सनातनी संगठित हो रहे हैं।  इसी उद्देश्य से देश भर में इन दिनों एक लाख से अधिक हिन्दू सम्मलेन आयोजित किए जा रहे है।

 
          राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संस्थापक डा. केशव बलिराम हेडगेवार के व्यक्तित्व और कृतित्व की चर्चा करते हुए श्री शिवम ने कहा कि उनकी दूरदर्शिता और स्पष्ट सोच का ही परिणाम है कि संघ की सौ वर्ष की यात्रा में अनेक बाधाएं आई, आलोचना हुई और चार बार प्रतिबन्ध भी लगाए गए लेकिन संघ बेदाग़ होकर और अधिक सशक्त होकर उभरा है। उन्होंने कहा कि डा. हेडगेवार का स्पष्ट मत था कि राष्ट्र की स्वतंत्रता और समाज समस्याओं का समाधान हिंदु समाज के संगठित होने से ही होगा। श्री शिवम ने संघ स्वदेशी का पक्षधर है और आपदाओं तथा आपताकालीन स्थितियों में बिना किसी भेदभाव के समग्र रूप से कार्य करता है।    उन्होने बताया कि संघ की दूसरी शताब्दी का यह कालखंड सहभागिता का है और इसमें पंच परिवर्तन के तहत सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुम्ब प्रबोधन, स्व आधारित जीवन और नागरिक कर्तव्य बोध पर हिंदुओं को जागरूक किया जा रहा है। उन्होने गुरु गोविन्द सिँह के चारो पुत्रों के बलिदान, तांहा ज़ी, चापेकार बंधुओं सहित अनेक भारत मां के सपूतों का उदाह्रण देते हुए कहा कि भारतमाता क़ो जब भी बलिदान क़ी जरूरत पड़ी.. भारत की वीर माताओं ने अपने सपूतों क़ो सहर्ष भेजा।

       श्री शिवम ने कहा कि समूचे विश्व में विश्व का कल्याण क़ी कामना करने वाला एकमात्र समाज केवल हिन्दू है... सनातनी है । उन्होंने सम्मेलन में मौजूद हिंदुओं का आह्वान किया कि गरीबी, भ्रस्टाचार, अत्याचार, आदि समस्याओं पर क़ी बात करने के बजाए इनके समाधान पर काम करना होगा ।  भारत को सन 2047 तक विश्वगुरु बनाना है तो पंच परिवर्तन के सिद्धांत पर कार्य करें। परिवार के साथ समाज और राष्ट्र के विकास क़ी बात करें। समाज में व्याप्त कुरीतियों और भेदभाव क़ो मिटाने का प्रयास करें, पानी का अपव्यय रोकें, स्वदेशी क़ो बढ़ावा दें, अधिकारों के साथ नागरिक और मौलिक कर्तव्यों का पालन करें ।

 

  इस अवसर पर सम्मेलन के मुख्य अतिथि आचार्य पंडित सीताराम पाठक ने कथनी और करनी में किसी भी तरह का भेद नहीं करने का आह्वान करते हुए कहा कि सकारात्मक सोच, मानवता, पर्यावरण, समरसता, सजगता से समाज का सर्वांगीण विकास सम्भव है l  हम सब सनातनी हिंदु हैं, जाति बंधन स्वीकार नहीं है। बी.एस.सी. की विद्यार्थी कु. दिशा शर्मा ने कहा कि भारतीय दर्शन वसुधैव कुटुम्बकम पर आधारित है जहां हम  समूचे विश्व को बिओनाकिसी भेदभाव के अपना परिवार मानते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ संघ चरित्र निर्माण क़ी पाठशाला है जहां संस्कृति और संस्कार को सब्से ज्यादा महत्व दिया जाता है जो अगली पीढ़ी में हस्ताँतरित होता है । यही सनातनी समाज की खूबसूरती है।

       सम्मेलन के आरम्भ में अतिथियों ने मां भारती के चित्र पर माल्यार्पण किया।  महेंद्र स्वामी ने “गीत पथिक का अंतिम लक्ष्य नहीं है सिंहासन चढ़ते जाना” का एकल गायन किया. श्रीमती भावना सिंह ने वंदे मातरम गीत की सुमधुर प्रस्तुति दी। मंच पर भगवान राम, श्रीकृष्ण, सुदामा, महाराणा प्रताप, महारानी लक्ष्मीबाई और महाराणा प्रताप की वेशभूषा में क्रमश: भंवर अवनेद्र सिंह चौहान, रूद्र, तनय, कुमारी प्रतिष्ठा और भंवर अखिलेषेंद्र सिंह चौहान उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन वृन्दावन बस्ती के बस्ती प्रमुख श्री गोपाल सिंह चौहान ने तथा आभार प्रदर्शन सम्मेलन के संयोजक श्री बी.एल. राय ने किया। सम्मेलन में भेल नगर, बसंत कुंज, राज सम्राट नगर, कम्फर्ट पार्क और आसपास की कालोनियों के रहवासियों ने उत्साह के साथ भाग लिया। सौम्या कौशिक ने सम्मेलन का यूट्यूब पर जीवंत प्रसारण की जिम्मेदारी संभाली . 

 बच्चों ने दी पर्यावरण संरक्षण पर आकर्षक प्रस्तुति

    सम्मेलन के दौरान बसंत कुंज के बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण पर आधारित एक नाटिका की मनोहारी प्रस्तुति दी जिसकी दर्शकों ने मुक्त कंठ से सराहना की। नाटिका के माध्यम से संदेश दिया गया कि पर्यावरण सुरक्षित है तो मनुष्य और अन्य जीव जंतुओं का जीवन है वरना पर्यावरण प्रदूषण से विनाश सुनिश्चित है। नाटिका मंचन श्रीमती अनिता पवार के मार्गदर्शन में किया गया। नाटिका के आरम्भ में वृंदावन बस्ती के कोषाध्यक्ष श्री विनीत कौशिक ने भूमिका प्रस्तुत की । नाटिका में अभिनय करने वाले बाल कलाकारों में अंशिका नागपुरे, पूर्वी दाऊस्कर, लावण्या डिगरसे, लक्ष्य डिगरसे, प्रियांशी सोनी, पार्थ दाऊस्कर, प्रवया सोनी, हर्शित सोनी, नुपूर वैश्णव, मृदुल मालवी, श्रेयांश तिवारी और कान्हा शामिल थे

न्यूज़ सोर्स : मधुकर पवार