वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें: लंबी दूरी की रात्रिकालीन रेल यात्रा के भविष्य की ओर भारत की छलांग
*   अनुष्का सक्सेना
 

पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का शुभारंभ

भारतीय रेल लंबी दूरी की यात्रा में क्रांतिकारी बदलाव लाने जा रही है। इसके लिए देश के सबसे तेज़ी से बढ़ते रेल बेड़े में अत्याधुनिक वंदे भारत स्लीपर (VBS) ट्रेनसेट को शामिल किया जा रहा है। विश्वस्तरीय, उच्च-गति स्लीपर ट्रेन का सपना अब साकार होने जा रहा है। 16 कोचों वाली पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, जो हावड़ा जंक्शन और कामाख्या (गुवाहाटी) के बीच चलेगी, को 17 जनवरी 2026 को पश्चिम बंगाल के मालदा टाउन रेलवे स्टेशन से माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा हरी झंडी दिखाई जाएगी।

इस पहली स्लीपर ट्रेन का निर्माण बीईएमएल लिमिटेड (भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड) ने इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ), चेन्नई के सहयोग से किया है।


पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन: संक्षिप्त विवरण

• ट्रेन संचालन एवं समय-सारिणी

ट्रेन संख्या मार्ग प्रस्थान आगमन आवृत्ति
27575 हावड़ा → कामाख्या 18:20 08:20 (+1) सप्ताह में 6 दिन (गुरुवार को छोड़कर)
27576 कामाख्या → हावड़ा 18:15 08:15 (+1) सप्ताह में 6 दिन (बुधवार को छोड़कर)

• मार्ग एवं प्रदर्शन विवरण

मानक विवरण
कुल दूरी 968 किमी
यात्रा समय लगभग 14 घंटे
औसत गति 69 किमी/घंटा
ठहराव 13 स्टेशन
प्रमुख जिले कामरूप मेट्रोपॉलिटन, बोंगाईगांव, कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, मालदा, मुर्शिदाबाद, पूर्व बर्धमान, हुगली, हावड़ा

• किराया संरचना (हावड़ा – कामाख्या)

श्रेणी किराया (₹)
एसी 3-टियर (3A) 2,300
एसी 2-टियर (2A) 3,000
एसी प्रथम श्रेणी (1A) 3,600

ये किराये ऑल-इनक्लूसिव हैं (मूल किराया + आरक्षण + सेवा शुल्क) और कोलकाता–गुवाहाटी के बीच हवाई यात्रा की तुलना में प्रतिस्पर्धी रखे गए हैं, जहाँ किराये प्रायः अधिक होते हैं।

यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की औसत गति कम होने का कारण ट्रेन की क्षमता नहीं, बल्कि बुनियादी ढाँचे और परिचालन संबंधी सीमाएँ हैं। यह ट्रेन 160–180 किमी/घंटा की क्षमता रखती है, लेकिन अत्यधिक भीड़ वाले मिश्रित यातायात कॉरिडोर, 110–130 किमी/घंटा की खंडीय गति सीमाएँ, कई ठहराव, मोड़, सिग्नलिंग हेडवे बाधाएँ और रात्रिकालीन मालगाड़ी प्राथमिकता के कारण औसत गति घट जाती है। इसके बावजूद, यह नई ट्रेन हावड़ा–गुवाहाटी (कामाख्या) मार्ग पर पारंपरिक ट्रेनों की तुलना में लगभग 2.5 घंटे का समय बचाएगी।

  


परियोजना का अवलोकन

वंदे भारत स्लीपर (VBS) ट्रेन भारत के रेल आधुनिकीकरण अभियान का अगला अध्याय है। यह वंदे भारत एक्सप्रेस (चेयर-कार संस्करण) की सफलता को लंबी दूरी, विशेष रूप से रात्रिकालीन सेवाओं तक विस्तारित करती है। मौजूदा बैठने वाली ट्रेनों के विपरीत, इनमें एसी प्रथम श्रेणी, एसी 2-टियर और एसी 3-टियर स्लीपर कोच विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ उपलब्ध होंगे।

अत्याधुनिक तकनीक, उन्नत प्रोपल्शन सिस्टम, आधुनिक सुरक्षा प्रणालियाँ, प्रीमियम सुविधाएँ और अर्ध-उच्च-गति प्रदर्शन के साथ वंदे भारत स्लीपर ट्रेन भारत में लंबी दूरी की, विशेषकर रात्रिकालीन रेल यात्रा को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखती है। यह आराम और दक्षता—दोनों में—विशेष रूप से बढ़ते मध्यम वर्ग के लिए, हवाई यात्रा को कड़ी टक्कर देती है।

यह भारतीय रेल के रात्रिकालीन भविष्य की दिशा में एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी छलांग है। पूरी तरह भारत में डिज़ाइन, इंजीनियर और निर्मित यह ट्रेन “मेक इन इंडिया” कार्यक्रम की प्रमुख पहल और रेल आधुनिकीकरण की दिशा में एक मील का पत्थर है।


प्रमुख निर्माता

भारतीय रेल आने वाले वर्षों में 200 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट शुरू करने की योजना बना रही है। इनका निर्माण तीन कंसोर्टियम द्वारा किया जाएगा:

• RVNL–TMH–LES कंसोर्टियम – 120 ट्रेनसेट

(विशेष प्रयोजन वाहन: Kinet Railway Solutions Ltd)
यह एक भारत–रूस संयुक्त उद्यम है, जिसमें रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) और रूसी रोलिंग स्टॉक निर्माता ट्रांसमाशहोल्डिंग (TMH) शामिल हैं।
उत्पादन केंद्र: मराठवाड़ा रेल कोच फैक्ट्री (MRCF), लातूर, महाराष्ट्र

• BHEL–टिटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड कंसोर्टियम – 80 ट्रेनसेट

उत्पादन केंद्र: टिटागढ़–उत्तरपाड़ा (पश्चिम बंगाल) एवं सहायक विक्रेता क्लस्टर

• BEML + ICF – प्रारंभिक 10 ट्रेनसेट (प्रोटोटाइप चरण)

BEML: बेंगलुरु
ICF: चेन्नई


निष्कर्ष

वंदे भारत स्लीपर कार्यक्रम केवल एक नई ट्रेन की शुरुआत नहीं है, बल्कि यह भारतीय रेल की लंबी दूरी की यात्रा सोच का सिस्टमगत उन्नयन है। स्वदेशी निर्माण, वैश्विक स्तर की तकनीक, व्यापक परीक्षण और यात्री-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ यह आधुनिक, कुशल और आकांक्षी रेल यात्रा की दिशा में निर्णायक कदम है। पूर्ण रूप से लागू होने पर वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें रात्रिकालीन यात्राओं की परिभाषा बदल देंगी, राष्ट्रीय एकता को मज़बूत करेंगी और भारतीय रेल को एक तकनीक-संचालित बुनियादी ढाँचा शक्ति के रूप में स्थापित करेंगी।

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*   (लेखिका एक एमएनसी में नीति एवं डेटा विश्लेषक हैं)