मोटापा ही असली "प्री-डायबिटीज" है, इसे हल्के में न लें:                 डॉ. राजेश अग्रवाल

इंदौर | भारत में पिछले तीन दशकों में मोटापे की दर जिस तेजी से बढ़ी है, वह भविष्य के लिए एक गंभीर खतरे की घंटी है। "डायबिटीज अब केवल अमीरों की बीमारी नहीं रही; वातावरणीय बदलावों के कारण यह गरीब और मेहनती वर्ग में भी तेजी से फैल रही है। यदि समाज जागरूक न हुआ, तो यह बीमारी परिवारों और देश की अर्थव्यवस्था को तबाह कर देगी।  इंदौर के विख्यात विशेषज्ञ डॉ. राजेश अग्रवाल के अनुसार, हमें अब मोटापे को केवल वजन बढ़ना नहीं, बल्कि 'प्री-प्री डायबिटीज' की अवस्था मानकर सचेत हो जाना चाहिए।

भारत में मोटापे की स्थिति विस्फोटक

"इमर्जिंग ट्रेंड्स इन डायबीटीज" के राज्य सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए, प्रसिद्ध डायबिटीज़, मोटापा एवं हॉर्मोन विशेषज्ञ डॉ. राजेश अग्रवाल ने चौंकाने वाले तथ्य साझा किए:

  • 20 गुना बढ़ोत्तरी: पिछले 30 वर्षों में भारत में मोटापे के मामलों में 20 गुना वृद्धि हुई है, जबकि विकसित देशों में यह आंकड़ा महज 5-6 गुना ही है।
  • 60 करोड़ का आंकड़ा: देश में लगभग 60 करोड़ लोग मोटापे और पेट की चर्बी (Central Obesity) से ग्रस्त हैं, जो सीधे तौर पर डायबिटीज की दहलीज पर खड़े हैं।
  • जेनेटिक प्रभाव: हमारे जीन्स पर कैलोरी से भरपूर और सस्ते जंक फूड का बढ़ता बोझ इस समस्या की मुख्य जड़ है।

डायबिटीज रिवर्सल का सही समय

डॉ. अग्रवाल ने जोर देते हुए कहा कि प्री-डायबिटीज की अवस्था को वास्तव में "ओबेसिटी स्टेज" समझना चाहिए। यदि इसी स्तर पर सही खान-पान और जीवनशैली अपनाई जाए, तो डायबिटीज को न केवल रोका जा सकता है, बल्कि उसे पूरी तरह रिवर्स भी किया जा सकता है।

सम्मान एवं जागरूकता का आह्वान

डॉ. अग्रवाल ने स्कूलों और सामाजिक स्तर पर व्यापक स्वास्थ्य शिक्षा अभियान चलाने की आवश्यकता बताई ताकि देश को बड़े आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके। कार्यक्रम के अंत में सम्मेलन के सचिव डॉ. वृंद भारद्वाज और डॉ. अंकित सेठ ने डॉ. अग्रवाल को स्मृति चिह्न और सम्मान पत्र भेंट कर उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया।

 

न्यूज़ सोर्स : Dr Rajesh Agrawal