बोतल लौटाओ - पैसा पाओ
बोतल लौटाओ - पैसा पाओ
गोवा। बोतल लाओ–पैसा पाओ” सुनने में भले ही यह एक साधारण ऑफर लगे, लेकिन असल में यह पहल देश के पर्यटन और शहरी क्षेत्रों में बढ़ती कचरे की समस्या का बड़ा समाधान बनकर उभर रही है। खासकर गोवा जैसे पर्यटन प्रधान राज्य में, जहां समुद्र तटों से लेकर बाजारों तक प्लास्टिक और कांच की बोतलों का अंबार लग जाता है, यह योजना स्वच्छता के साथ-साथ आम लोगों की जेब भी भरने का जरिया बन रही है।
दरअसल, पेय पदार्थों की बढ़ती खपत के कारण प्लास्टिक, कांच की बोतलें, एल्युमीनियम कैन और मल्टी-लेयर पैकेजिंग (MLP) जैसे कचरे में लगातार इजाफा हो रहा है। यह कचरा अक्सर मौजूदा कचरा संग्रहण प्रणाली से बाहर रह जाता है और सार्वजनिक स्थलों, सड़कों, बाजारों तथा समुद्र तटों पर फैलकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है।
इसी चुनौती से निपटने के लिए नगर निगम और गोवा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GSPCB) ने एक नई नीति लागू की है, जिसका उद्देश्य राज्य को अपशिष्ट और प्रदूषण मुक्त बनाना है। इस योजना के तीन प्रमुख लक्ष्य हैं—स्रोत पर ही कचरे की रिकवरी कर उसे मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) केंद्रों तक पहुंचाना, सार्वजनिक स्थानों को साफ-सुथरा बनाए रखना और रीसाइक्लिंग प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना।
योजना का सबसे आकर्षक पहलू इसका ‘रिवॉर्ड सिस्टम’ है। इसके तहत उपभोक्ताओं को उत्पाद खरीदते समय अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के ऊपर ₹2 से ₹10 तक का ‘रिफंडेबल ग्रीन डिपॉजिट’ देना होगा। जब उपभोक्ता इस्तेमाल के बाद खाली बोतल या पैकेजिंग को निर्धारित केंद्रों पर लौटाएगा, तो यह राशि तुरंत उसे वापस मिल जाएगी। QR-लिंक्ड उत्पादों की सुविधा से इस पूरी प्रक्रिया को और आसान बना दिया गया है।
फिलहाल इस योजना की शुरुआत कांच की बोतलों से की गई है, क्योंकि गोवा में कांच का कचरा बड़ी समस्या बना हुआ है। भविष्य में इसे मल्टी-लेयर प्लास्टिक (MLP) और पीईटी (PET) बोतलों तक भी विस्तार देने की योजना है।
गोवा सरकार ने नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक मजबूत रिटर्न सिस्टम भी तैयार किया है। इसके तहत शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में कलेक्शन सेंटर बनाए जा रहे हैं। साथ ही रिटेल दुकानों, सामुदायिक केंद्रों और डोर-स्टेप कलेक्शन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि हर व्यक्ति आसानी से इस पहल का हिस्सा बन सके।
डिपॉजिट रिफंड सिस्टम (DRS) के तहत तय ‘पर-यूनिट वैल्यू’ सफाईमित्रों के लिए भी कमाई का नया अवसर लेकर आएगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
“बोतल लाओ–पैसा पाओ” योजना न केवल कचरे को कम करने का असरदार तरीका है, बल्कि यह लोगों की सोच बदलने वाला एक व्यवहारिक प्रोत्साहन भी है। यह पहल स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सर्कुलर इकॉनमी की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो सकती है।

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