थायराइड के रोगी निराश न हों......

एम्स भोपाल में है इलाज की अत्याधुनिक सुविधा

      भोपाल। थायराइड बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए अच्छी खबर है। भोपाल के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में अब हाइपरथायरॉइडिज्म और डिफरेंशिएटेड थायराइड कैंसर के उपचार के लिए आधुनिक रेडियो आयोडीन ट्रीटमेंट की सुविधा उपलब्ध है। इस उन्नत तकनीक की मदद से मरीजों को प्रभावी और सुरक्षित उपचार मिल रहा है, साथ ही प्रदेश के लोगों को इलाज के लिए दूसरे शहरों का रुख करने की आवश्यकता भी कम हो गई है।

     एम्स भोपाल में थायराइड से संबंधित बीमारियों के उपचार के लिए न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में आधुनिक और प्रभावी व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं, जो आम नागरिकों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही हैं। थायराइड की दो प्रमुख बीमारियों—हाइपरथायरॉइडिज्म और डिफरेंशिएटेड थायराइड कैंसर के उपचार में न्यूक्लियर मेडिसिन की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है।

      हाइपरथायरॉइडिज्म ऐसी स्थिति है जिसमें थायराइड ग्रंथि सामान्य से अधिक सक्रिय हो जाती है। यह कैंसर नहीं होता, लेकिन इसके कारण मरीज को लंबे समय तक एंटी-थायरॉइड दवाएं लेनी पड़ती हैं। कई बार यह स्थिति मरीजों के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से थकाने वाली बन जाती है। जब यह हार्मोन ज्यादा बनने लगता है तो शरीर की कई प्रक्रियाएं तेज हो जाती हैं। इसके कारण दिल की धड़कन तेज होना, वजन कम होना, अधिक पसीना आना, घबराहट, हाथ कांपना, चिड़चिड़ापन और नींद न आना जैसी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं। ऐसे मामलों में एम्स भोपाल के न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में उपलब्ध रेडियो आयोडीन ट्रीटमेंट एक प्रभावी और सुरक्षित विकल्प के रूप में सामने आया है। यह उपचार थायराइड की अतिरिक्त सक्रियता को नियंत्रित करता है और कई मरीजों में लंबे समय तक दवाओं पर निर्भरता को कम करने में मदद करता है।

       दूसरी प्रमुख बीमारी थायराइड कैंसर है। थायराइड कैंसर वह स्थिति है जब थायराइड ग्रंथि की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर बना देती हैं। यह कैंसर अपेक्षाकृत धीमी गति से बढ़ने वाला माना जाता है और कई मामलों में इसका इलाज सफलतापूर्वक हो जाता है। इसके लक्षणों में गले में गांठ या सूजन, आवाज बैठना, निगलने में परेशानी या गर्दन में दर्द शामिल हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार थायराइड कैंसर के लगभग 90 प्रतिशत मामलों का सफल इलाज संभव है, विशेषकर जब यह डिफरेंशिएटेड प्रकार का हो। अन्य कैंसर की तरह इसमें भी सर्जरी की जाती है, लेकिन डिफरेंशिएटेड थायराइड कैंसर के उपचार में सर्जरी के बाद रेडियो आयोडीन ट्रीटमेंट भी किया जाता है। यह प्रक्रिया शरीर में बची हुई कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में सहायक होती है और बीमारी के दोबारा होने की संभावना को काफी हद तक कम कर देती है।

     विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच, सही निदान और आधुनिक उपचार पद्धतियों की मदद से थायराइड से जुड़ी बीमारियों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है और कई मामलों में पूरी तरह ठीक भी किया जा सकता है।