मालवानिमाड़ क्षेत्र के लिए सोयाबीनगेहूँ फसल प्रणाली पर

तीन दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न

      इंदौर। किसानों की आय बढ़ाने और सोयाबीनगेहूँ फसल प्रणाली को अधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य से भा.कृ.अनु.प.राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (एनएसआरआई), इंदौर में 10 से 12 मार्च 2026 तक तीन दिवसीय प्रशिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में मालवा और निमाड़ क्षेत्र के 14 जिलों से आए 27 कृषि अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने सोयाबीन और गेहूँ की उन्नत किस्मों, उत्पादन तकनीक, रोग प्रबंधन तथा विपणन से जुड़ी उपयोगी जानकारी दी।

       प्रशिक्षण के दौरान किसानों की आय बढ़ाने के लिए सोयाबीन और गेहूँ के मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण तथा खाद्य पदार्थों में इनके उपयोग जैसे विषयों पर भी व्याख्यान दिए गए। एनएसआरआई के एग्री बिजनेस केंद्र में खाद्य प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ डॉ. नेहा पाण्डेय के मार्गदर्शन में सोया आधारित उत्पादोंसोया दूध, टोफू, नमकीन, सोया छाछ, सेव और कुकीजके साथ ही रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थ जैसे उपमा और हलवा का सजीव प्रदर्शन किया गया।

कार्यक्रम में संस्थान के डॉ. बी.यू. दुपारे ने सोयाबीन उत्पादन और प्रसंस्करण तकनीक के प्रचार-प्रसार में सोशल मीडिया की उपयोगिता बताई। डॉ. विशाल थोराट ने सोयाबीन खेती का आर्थिक विश्लेषण प्रस्तुत किया, जबकि डॉ. संजीव गुप्ता ने अन्थ्राक्नोज, रायजोक्तोनिया एरियल ब्लाइट और पीला मोजेक वायरस जैसे प्रमुख रोगों की पहचान और उनके नियंत्रण के प्रभावी उपायों की जानकारी दी।

      प्रशिक्षण के अंतिम सत्र में आईएआरआई क्षेत्रीय गेहूँ अनुसंधान केंद्र, इंदौर के अध्यक्ष डॉ. जे.बी. सिंह ने गेहूँ की उन्नत किस्मोंHI-1650 (पूसा ओजस्वी), HI-8823 (पूसा प्रभात) और HI-1665 (पूसा शरबती)के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों को गेहूँ की फसल में समय पर सिंचाई करने की सलाह भी दी। इसके अलावा डॉ. राहुल गजघाटे ने मालवी गेहूँ के मूल्य संवर्धन, डॉ. टी.एल. प्रकाश ने गेहूँ में रोग नियंत्रण तथा डॉ. राजपाल मीणा ने उर्वरक, पोषण और सिंचाई प्रबंधन के बारे में उपयोगी जानकारी दी।

      समापन सत्र में संस्थान के निदेशक डॉ. के.एच. सिंह ने मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रायोजित परियोजना की जानकारी देते हुए बताया कि यह योजना प्रदेश के 18 जिलोंइंदौर, धार, खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर, बड़वानी, झाबुआ, अलीराजपुर, रतलाम, मंदसौर, नीमच, उज्जैन, शाजापुर, आगर-मालवा, राजगढ़, देवास, सीहोर और भोपाल में संचालित की जा रही है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य कम अवधि वाली सोयाबीन किस्म JS-95-60 के स्थान पर NRC-150 जैसी उन्नत किस्म को बढ़ावा देना है, ताकि सोयाबीन की उपज बढ़े और रबी फसल की उत्पादकता भी प्रभावित न हो। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में किए गए प्रदर्शनों से यह पाया गया है कि मध्यम अवधि वाली सोयाबीन किस्म NRC-142 अपनाने से किसानों को प्रति हेक्टेयर 2 से 4 क्विंटल तक अतिरिक्त उत्पादन मिला है। आगामी वर्ष में JS-2172 किस्म को भी इस परियोजना में शामिल किया जाएगा।

      मध्यप्रदेश कृषि विभाग द्वारा प्रायोजित इस परियोजना के तहत मालवा और निमाड़ क्षेत्र के 18 जिलों में पिछले दो वर्षों में सोयाबीन और गेहूँ फसलों के 180 प्रदर्शन प्लॉट लगाए गए हैं। प्रशिक्षण और प्रदर्शनों के माध्यम से सोयाबीन की NRC-150, NRC-142 तथा गेहूँ की HI-1650, HI-1665, HI-8823, पूसा ओजस और पूसा अहिल्या जैसी किस्मों को किसानों द्वारा पसंद किया जा रहा है।

     कृषि विभाग के अधिकारियों ने सुझाव दिया कि ऐसे प्रशिक्षण सोयाबीन और गेहूँ की बुवाई से पहले आयोजित किए जाएं, ताकि किसानों को समय पर जानकारी मिल सके और परियोजना का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से मिल पाए। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। समापन कार्यक्रम का संचालन श्याम किशोर वर्मा ने किया, जबकि डॉ. विशाल थोराट ने आभार व्यक्त किया।