सरकार का दावा… गैस की कमी नहीं, फिर एजेंसियों पर लंबी कतारें क्यों?
सरकार का दावा… गैस की कमी नहीं,
फिर एजेंसियों पर लंबी कतारें क्यों?
नई दिल्ली। अमेरिका और इजराइल के ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच देश में रसोई गैस (एलपीजी) की जमाखोरी और कालाबाजारी की बढ़ती शिकायतों को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। राज्यों को जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में एलपीजी की कोई कमी नहीं है और घबराकर सिलेंडर बुक करने की जरूरत नहीं है।
हालांकि जमीनी स्तर पर कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की लंबी कतारें भी दिखाई दे रही हैं। इससे लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जब सरकार पर्याप्त गैस उपलब्ध होने का दावा कर रही है, तो फिर एजेंसियों पर इतनी भीड़ और लंबी प्रतीक्षा क्यों दिखाई दे रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह स्थिति वास्तविक कमी की वजह से नहीं बल्कि अफवाहों और घबराहट में बढ़ी हुई बुकिंग के कारण बनी है।
सरकार के अनुसार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर बनी चिंताओं के कारण सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर कई तरह की अफवाहें फैल गई हैं। इन अफवाहों के चलते बड़ी संख्या में उपभोक्ता सामान्य आवश्यकता से पहले ही सिलेंडर बुक कराने एजेंसियों पर पहुंच रहे हैं, जिससे कतारें लंबी हो रही हैं और वितरण व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव पड़ रहा है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने शुक्रवार को मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि मौजूदा हालात के बावजूद देश में एलपीजी, प्राकृतिक गैस, पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। उन्होंने कहा कि घबराहट में की जा रही अतिरिक्त बुकिंग के कारण वितरण व्यवस्था प्रभावित हो रही है, जबकि वास्तविक भंडार पर्याप्त है। अधिकारियों के अनुसार सामान्य दिनों में देश में प्रतिदिन औसतन 55.7 लाख एलपीजी सिलेंडरों की बुकिंग होती थी, लेकिन हाल के दिनों में यह संख्या बढ़कर लगभग 76 लाख तक पहुंच गई है। इसके बावजूद तेल विपणन कंपनियां देश भर में 25 हजार से अधिक एलपीजी वितरकों के नेटवर्क के जरिए प्रतिदिन लगभग 50 लाख सिलेंडर उपभोक्ताओं तक पहुंचा रही हैं।
एलपीजी सिलेंडरों की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए व्यापक अभियान भी शुरू किया गया है। कई राज्यों में छापेमारी कर अवैध रूप से जमा किए गए सिलेंडर जब्त किए गए हैं। उत्तर प्रदेश के झांसी में 524 चोरी के सिलेंडर, हापुड़ में 32 सिलेंडर, कर्नाटक के कुछ होटलों से 46 सिलेंडर तथा मध्यप्रदेश के छतरपुर में 38 सिलेंडर बरामद किए गए हैं। तेल विपणन कंपनियों ने भी डीलरों और वितरकों के यहां अचानक निरीक्षण शुरू कर दिए हैं और किसी भी तरह की हेराफेरी पाए जाने पर लाइसेंस रद्द करने सहित कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
मंत्रालय ने उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि वे गैस एजेंसियों पर भीड़ लगाने के बजाय डिजिटल माध्यमों का उपयोग करें। एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग आईवीआरएस कॉल, एसएमएस, व्हाट्सएप बुकिंग और तेल कंपनियों के आधिकारिक मोबाइल ऐप के माध्यम से आसानी से की जा सकती है। साथ ही उपभोक्ताओं को डिजिटल धोखाधड़ी से सावधान रहने और केवल अधिकृत वेबसाइट या ऐप का ही उपयोग करने की सलाह दी गई है।
देश में 1.5 करोड़ से अधिक घरों में पाइप्ड नेचुरल गैस की आपूर्ति हो रही है। सरकार ने यह भी बताया कि लगभग 60 लाख घरों में पीएनजी कनेक्टिविटी होने के बावजूद इसका उपयोग नहीं किया जा रहा है। ऐसे उपभोक्ताओं को एलपीजी सिलेंडर के बजाय पीएनजी के उपयोग को बढ़ाने की सलाह दी गई है, जिससे एलपीजी पर दबाव कम किया जा सके।
एलपीजी पर दबाव कम करने के लिए सरकार ने कई वैकल्पिक कदम भी उठाए हैं। रिफाइनरियों से घरेलू एलपीजी उत्पादन में 30 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की गई है। इसके अलावा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नियमित आवंटन के अतिरिक्त 48 हजार किलोलीटर केरोसिन उपलब्ध कराया गया है। कोयला मंत्रालय ने भी छोटे और मध्यम उपभोक्ताओं को अधिक मात्रा में कोयला उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए हैं।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार देश की रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। भारत की कुल शोधन क्षमता 258 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है और देश पेट्रोल तथा डीजल के उत्पादन में आत्मनिर्भर है। सभी रिफाइनरियों में कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है और विभिन्न स्रोतों से आयात लगातार जारी है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि देश के एक लाख से अधिक पेट्रोल पंपों में कहीं भी ईंधन की कमी नहीं है। हाल ही में तमिलनाडु में एक पेट्रोल पंप पर खुले कंटेनरों में पेट्रोल-डीजल बेचने का मामला सामने आने पर वहां बिक्री तुरंत रोक दी गई और संबंधित संचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई।
मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल अपनी सामान्य आवश्यकता के अनुसार ही गैस सिलेंडर बुक करें। सरकार का कहना है कि घरों, अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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