विक्रम संवत 2083 हिंदू नव वर्ष और चैत्र नवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं ............................. विक्रम संवत 2083 हिंदू नव वर्ष और चैत्र नवरात्रि पर्व का शुभारंभ
विक्रम संवत 2083 हिंदू नव वर्ष और चैत्र नवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं
विक्रम संवत 2083 हिंदू नव वर्ष और
चैत्र नवरात्रि पर्व का शुभारंभ
भोपाल। चैत्र मास नवरात्रि पर्व 19 मार्च, गुरुवार, उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र से प्रारंभ होकर 27 मार्च, शुक्रवार रामनवमी को समापन होगा। नवरात्रि शक्ति पर्व के साथ ही हिंदू नव वर्ष विक्रम संवत 2083 का शुभारंभ हो रहा है l इस दिन मां भगवती की साधना, रुद्राभिषेक, भगवान सत्यनारायण की कथा तथा सुंदरकांड विशेष फलदाई होंगे l नवरात्रि का पावन शक्ति महापर्व नौ दिनों तक मनाया जाएगा। नवरात्रि पर्व के अंतर्गत सर्वार्थसिद्धी योग, अमृत सिद्धि योग, पुष्कर योग पुष्य नक्षत्र भी रहेगा। इस बार नवरात्रि का शुभारंभ गुरुवार से हो रहा है इसलिए चैत्र नवरात्रि में माता का आगमन पालकी की सवारी पर होगा l
नवरात्रि पर्व को लेकर सीहोर के पंडित सुनील शर्मा ने बताया कि वर्ष में चार नवरात्रि होती है। इसमें दो प्रकट प्रत्यक्ष नवरात्रि चैत्र मास व अश्विन मास में होती है तथा दो अप्रत्यक्ष गुप्त नवरात्रि माघ व आषाढ मास में होती है। नवरात्रि में साधक साधनाएं अपने घर मंदिर व अपनी व्यवस्थानुसार एकांत में करते है। इस बार मां दुर्गा की कलश स्थापना गुरुवार को होगी l नवरात्रि में साधक अपनी आध्यत्मिक व मानसिक शक्तियों में वृद्धि करने के लिए अनेक प्रकार के उपवास, संयम, नियम, भजन, पूजन, योग साधना आदि करते हैं।
देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल के अनुसार, 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 40 मिनट तक अमावस्या तिथि रहेगी। इसलिए सुबह 7 बजे से 08 बजकर 35 मिनट तक चैत्र नवरात्र के लिए कलश स्थापना की जा सकती है। अगर इस समय कलश स्थापना नहीं कर पाए तो अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से 12 बजकर 53 तक रहेगा जिसमें कलश स्थापना कर सकते है। हिंदू धर्म में कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। इसे नवरात्र की शुरुआत का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। इस दिन लोग अपने घरों और मंदिरों में विधि-विधान से कलश स्थापित कर मां दुर्गा की पूजा आरंभ करते हैं।
चैत्र नवरात्रि में 9 स्वरुपो की होगी पूजा
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार चैत्र मास प्रकट नवरात्रि में माँ भगवती के नौ ंकी साधना की जाती है। नवरात्रि पर्व के अंतर्गत माँ शैलपुत्री, माँ ब्रह्मचारिणी, माँ चंद्रघंटा, माँ कुष्मांडा, माँ स्कंदमाता, माँ कात्यायनी, माँ कालरात्रि, माँ महागौरी और माँ सिद्धिदात्री देवी की विशेष साधना की जाती है । नवरात्रि में शिव शक्ति की साधना सभी मनोकामनाए पूर्ण करती है। इस समय की जाने वाली साधना को गुप्त बनाये रखना चाहिए। इस शक्ति साधना के पीछे एक गुप्त रहस्य है। शास्त्रानुसार मानव के समस्त रोग दोष के निवारण के लिए नवरात्र से बढ़कर कोई साधना नही है। नवरात्रि के साधनाकाल में शिव शक्ति का जप, तप, ध्यान करने से साधक का जीवन मंगलमय हो जाता है।
नवरात्रि पूजा विधि नवरात्रि पूजा विधि के संबंध में पंडित सुनील शर्मा ने बताया कि शास्त्रों में घट स्थापना, अखंड ज्योत प्रज्जवलित करना व जावरे स्थापित करने का उल्लेख किया गया है l श्रदालुजन अपने सामर्थ्य अनुसार उपरोक्त कार्य करते है। चैत्र नवरात्रि के समय अन्य नवरात्रि की तरह ही साधक को पूजा ध्यान करना चाहिए। नौ दिनों का संकल्प लेते हुए प्रतिप्रदा प्रथम दिवस घट स्थापना करना चाहिए। घट स्थापना के बाद प्रतिदिन सुबह शाम शिव शक्ति व भैरव महाराज की पूजा करनी चाहिए। नवमी के दिन कन्या पूजन, भोजन व हवन के साथ नवरात्र पूर्ण करना चाहिए। पूर्णाहुति हवन मां दुर्गा के मंत्रों व दुर्गा सप्तशती के मंत्रों से सम्पन्न करना चाहिए। नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती दुर्गा चालीसा का पाठ करने से शिव शक्ति प्रसन्न होकर साधक की मनोकामनाऐं पूर्ण करती हैं।
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