शुभ प्रभात – शुभ सोमवार ....... आज का चिंतन ................... संबंध और मुक्ति.......................... संजय अग्रवाल
शुभ प्रभात – शुभ सोमवार ....... आज का चिंतन
संबंध और मुक्ति
- संजय अग्रवाल
संबंध बनाए जाते हैं और रिश्ते अनिवार्य होते हैं। रिश्तों को निभाना और संबंधों को बनाए रखना, इन दोनों में अलग अलग प्रकार के प्रयासों की आवश्यकता होती है।
रिश्तों में भूमिका
माता-पिता, परिवार, ऑफिस इत्यादि जहां हर किसी की अपनी अपनी भूमिका होती है, वहां हम अपना किरदार बेहतर ढंग से निभा पाएं, यही अपेक्षित और उचित होता है। दूसरे की अपेक्षा और व्यवहार पर हमारा कतई कोई नियंत्रण नहीं होता है, और उसके कारण स्वयं को दुखी करना ठीक बात नहीं होती है।
संबंधों में स्वतंत्रता
क्योंकि संबंध हम अपनी रुचि, सुविधा और पसंद से बना सकते हैं, इसलिए इसे बनाए रखने या ना रखने की स्वतंत्रता सदा हमारे पास होती है। संबंध बराबरी वालों से ही बनाए जाते हैं, और वही लंबे समय तक टिकते हैं। बराबरी अर्थात स्वभाव, विचारों और उद्देश्य इत्यादि का तालमेल ही होता है। मित्रता का संबंध सबसे गहरा और महत्वपूर्ण होता है।
मुक्ति
रिश्ते हो या संबंध, इनको निभाने के लिए क्षमता से पार चले जाने का प्रयास स्वयं को कष्ट पहुंचता है, और हमें व्यर्थ की परेशानी से अनावश्यक ही लगातार जूझना पड़ता है। इनको निभाने की सीमा और तरीकों का आकलन और निर्णय हमारा स्वयं का विषय होता है।
उपाय
अपनी समझ को निरंतर विकसित और परिष्कृत करते रहने से ही हम सहज और सरल रहते हुए, अपने आत्मविश्वास और दृढ़ता से, रिश्तों और संबंधों को समुचित रूप से निभाते हुए इनके अस्वीकार्य बंधनों से मुक्ति पा सकते हैं।
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श्री संजय अग्रवाल आयकर विभाग, नागपुर में संयुक्त आयकर आयुक्त हैं. वे हमेशा लोगों से सम्पर्क और संवाद करने के लिये इच्छुक रहते हैं। इसीलिए वे संपर्क, संवाद और सृजन में सबसे अधिक विश्वास करते हैं। मानवीय मूल्यों और सम्बंधों के सूक्ष्म विश्लेषण के चितेरे श्री अग्रवाल "आज का चिंतन" नियमित रूप से लिख रहे हैं।

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