राजस्थान उच्च न्यायालय में 39 जज मौजूद, फिर भी कोर्ट रूम रहे खाली
जयपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ में शनिवार को एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। एक ओर जहाँ न्याय के मंदिर में 39 न्यायाधीश सुनवाई के लिए अपनी पीठ पर मौजूद थे, वहीं दूसरी ओर अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति के कारण कोर्ट रूम खाली पड़े रहे। यह स्थिति हाईकोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा न्यायिक कार्य के बहिष्कार के आह्वान के कारण उत्पन्न हुई।
बेंच मुस्तैद, पर बार नदारद
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के नेतृत्व में शनिवार को न्यायिक कार्यवाही का विशेष प्रयास किया गया। महत्वपूर्ण कानूनी मसलों को सुलझाने के लिए 12 जजों की चार लार्जर बेंचों का गठन भी किया गया था। न्यायाधीशों की पूरी तैयारी के बावजूद, वकीलों के न आने से अदालती कार्यवाही प्रभावी रूप से आगे नहीं बढ़ सकी।
न्यायिक प्रक्रिया पर पड़ा असर
बार एसोसिएशन के विरोध प्रदर्शन के चलते न तो सरकारी वकील, न महाधिवक्ता और न ही निजी अधिवक्ता अदालत पहुँचे। इस पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने चिंता और नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
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पूरक भूमिका: न्याय की गाड़ी बार और बेंच, दोनों पहियों के बिना नहीं चल सकती।
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जनहित का नुकसान: वकीलों के कार्य का बहिष्कार करने से अंततः न्याय चाहने वाले आम नागरिकों को परेशानी झेलनी पड़ती है।
शपथपत्र की दिलाई याद
मुख्य न्यायाधीश ने बार एसोसिएशन से अपने निर्णय पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व में बार पदाधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में यह वचन दिया था कि वे न्यायिक कार्यों का बहिष्कार नहीं करेंगे। उन्होंने इस वादे का सम्मान करने और न्याय व्यवस्था को सुचारू बनाने में सहयोग की अपील की।
लार्जर बेंच की संक्षिप्त सुनवाई
सन्नाटे के बीच जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा, जस्टिस समीर जैन और जस्टिस भुवन गोयल की तीन सदस्यीय पीठ ने एक महत्वपूर्ण मामले पर 16 मिनट तक सुनवाई की।
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तकनीकी बाधा: जोधपुर के अधिवक्ता तकनीकी खराबी के कारण ऑनलाइन सुनवाई से सही ढंग से नहीं जुड़ सके, हालांकि जयपुर के एक वकील ने वर्चुअल माध्यम से सहयोग किया।
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नोटिस जारी: पीठ ने इस मामले में आयकर विभाग को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई पर जवाब तलब किया है।

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