एम्स भोपाल ... एक बच्चे में दुर्लभ इंट्राहेपेटिक पोर्टोकैवल शंट का पहला सफल ट्रांसकैथेटर क्लोजर
एम्स भोपाल ...
एक बच्चे में दुर्लभ इंट्राहेपेटिक पोर्टोकैवल शंट का
पहला सफल ट्रांसकैथेटर क्लोजर
भोपाल. हाल ही में एक नौ वर्षीय बालक भोपाल के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में अपने दाहिने पैर की चोट के इलाज के लिए आया था, जिसमें डिब्राइडमेंट (घाव का इलाज) की आवश्यकता थी। ऑपरेशन से पहले किए गए परीक्षणों में उसका ऑक्सीजन सैचुरेशन (SaO2) केवल 75% पाया गया और उसे नीलेपन से भी पीड़ित था। आगे के परीक्षण के लिए उसे हृदय रोग विभाग में भेजा गया। कार्डियोलॉजी विभाग के डॉ. भूषण शाह ने एक बबल कॉन्ट्रास्ट ईकोकार्डियोग्राफी अध्ययन किया, जिससे पल्मोनरी आर्टीरियोवीनस मालफॉर्मेशन (एवीएम) का पता चला। पेट का अल्ट्रासाउंड करने पर लीवर में पोर्टोसिस्टमिक शंट की पुष्टि हुई। सीटी पल्मोनरी एंजियोग्राफी और कार्डियक सीटी ने डक्टस वेनोसस शंट की पुष्टि की। रोगी के उच्च अमोनिया स्तर, जो हेपेटिक एन्सेफैलोपैथी और पोर्टल हाइपरटेंशन के कारण त्वरित इलाज की आवश्यकता थी। डॉ. भूषण शाह के नेतृत्व में कार्डियोलॉजी टीम ने डक्टस वेनोसस शंट का ट्रांसकैथेटर क्लोजर करने की योजना बनाई। यह प्रक्रिया गर्दन की नस के माध्यम से की गई और इंट्राहेपेटिक डक्टस वेनोसस में नितिनोल डिवाइस को सफलतापूर्वक स्थापित किया गया। फॉलो-अप एंजियोग्राफी से पुष्टि हुई कि कोई अवशिष्ट शंटिंग नहीं थी और क्लोजर के बाद के फॉलो-अप में मरीज के अमोनिया के स्तर सामान्य हो गए।
एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डा.) अजय सिंह ने एम्स के चिकित्सकों की इस उपलब्धि पर कहा कि यह सर्जरी भारत में बाल हृदय रोग के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम है। यह हमारे चिकित्सा दलों की तकनीकी विशेषज्ञता और समर्पण को दर्शाता है और यह भी साबित करता है कि एम्स भोपाल जटिल चिकित्सा समस्याओं के लिए अत्याधुनिक समाधान प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस सर्जिकल टीम में कार्डियोलॉजी विभाग के डॉ. भूषण शाह, डॉ. सुदेश प्रजापति और डॉ. आशीष जैन के साथ कार्डियक एनेस्थेटिस्ट डॉ. हरीश शामिल थे।
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