कोरियोनिक विलस सैंपलिंग से होगी भ्रूण में आनुवंशिक विकार की पहचान
कोरियोनिक विलस सैंपलिंग से होगी
भ्रूण में आनुवंशिक विकार की पहचान
भोपाल। हाल ही में भोपाल के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में पहली कोरियोनिक विलस सैंपलिंग (सीवीएस) प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी करली गई है। कोरियोनिक टिशू को जेनेटिक विश्लेषण के लिए भेजा गया है। कोरियोनिक विलस सैंपलिंग (सीवीएस) एक प्रीनेटल टेस्ट है, जिसमें गर्भवती महिला के प्लेसेंटा (कोरियोनिक विलि) से एक छोटा नमूना लिया जाता है, ताकि भ्रूण में किसी संभावित आनुवंशिक विकार की पहचान की जा सके। यह प्रक्रिया डॉ. मनुप्रिया माधवन, विजिटिंग फीटल मेडिसिन कंसल्टेंट द्वारा की गई।
एम्स भोपाल की इस उपलब्धि पर संस्थान के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने कहा कि एम्स भोपाल में पहला सीवीएस सफलतापूर्वक पूरा होना हमारे संस्थान में फीटल मेडिसिन सेवाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह उपलब्धि हमारी उत्कृष्टता के उच्चतम मानकों के साथ व्यापक मातृ और भ्रूण देखभाल प्रदान करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।" इस अवसर पर कार्यवाहक चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) शशांक पुरवार और प्रसूति और स्त्री रोग विभाग की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. के. पुष्पलता ने टीम के समर्पण और प्रक्रिया की सफलता की सराहना करते हुए इसे संस्थान की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

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