राष्ट्रीय युवा दिवस......... उत्साह और जोश से भरपूर युवाओं को मिले सही मार्गदर्शन .... आलेख.... मुरलीधर राहुल मेटांगे
राष्ट्रीय युवा दिवस पर विशेष.....
उत्साह और जोश से भरपूर युवाओं को मिले सही मार्गदर्शन
- * मुरलीधर राहुल मेटांगे
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गलत भीड़ का हिस्सा बनकर बंधुआ बनने से अच्छा है अकेले स्वतंत्र रहकर विकास व प्रगति की राह पर अग्रसर होना। इसमें बेशक़ प्रत्यक्ष रूप से अकेले दिखने वाला युवा निश्चित ही परिवार / समाज / देश का मार्गदर्शक बन जाता है।
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"युवा" जो देश और समाज की दशा और दिशा बदलने मे अहम भूमिका निभाता है। युवा से देश और समाज को काफ़ी उम्मीदें होती है की वह अपनी ऊर्जा से नए आयाम लिखेंगे। युवाओं से परिवार-समाज-देश की उम्मीदें तो बहुत है किन्तु युवाओं के सपनों का क्या ? जो युवा नशा/अपराध से कोसों दूर हैं, उन्हें नशे/अपराध के दुष्परिणाम पता है। वे युवा अपने परिवार-समाज-देश की प्रगति व विकास हेतु चिंतन-मनन करते हैं और उसे धरातल पर उतारने के लिए सतत आगे बढ़ते हैं।
इस राह में कभी-कभी, कहीं-कहीं युवाओं को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। युवाओं के लिए अवसर थोड़े से है और चुनौतियां अधिक। ऐसा इसलिए, क्योंकि वर्तमान परिदृश्य में देखें तो शिक्षा और, रोजगार के क्षेत्र में युवाओं को क्या मिल रहा है? यह सब जानते हैं।
महंगी होती शिक्षा, जहाँ तक आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं का पहुंचना आसान नहीं होता है। कोई जैसे - तैसे पहुँच भी जाए तो प्रतियोगी परीक्षाओं और परिणाम की लेटलतिफी या परीक्षा पर्चा लीक होने से अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
जीवन जीने और उसकी दिनचर्या चलाने के लिए रुपयों की आवश्यकता होती है, तब ऐसे में उन युवाओं को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होती है। तब उन्हें समय पर उनकी शिक्षा के आधार पर या उसके अनुरूप रोजगार नहीं मिलता तो मन मारकर कम रुपयों में ही कहीं छोटा-मोटा काम करना पड़ता है, क्योंकि उनके कंधों पर खुद के भविष्य को संवारने के साथ - साथ परिवार की जिम्मेदारी भी होती है।
कुछ युवा रोजगार के क्षेत्र में स्वयं का व्यापार-व्यवसाय शुरू करने की जुगत में लगे रहते हैं जिसे आज की भाषा में स्टार्टअप कहते हैं। किन्तु खुद का व्यापार-व्यवसाय चालू करने के लिए भी युवाओं को काफ़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है जिसमें पड़ने वाले विभिन्न स्तर पर उसे भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है। व्यापार-व्यवसाय के लिए काबिलियत के साथ-साथ कागजों की पूर्णता होने के बाद भी युवाओं को विभागों से अपना काम करवाने में भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है। जिनके पास पैसा नहीं कोई रसूखदार की पहुँच नहीं उन्हें ऐसा लगने लगता है की काश हम भी ऐसे होते जिनका काम आसानी से हो जाता है।
माना कि शासन-प्रशासन की योजनाएँ बहुत है, किन्तु ज़रूरी यह है कि सभी योजनाओं का क्रियान्वयन हर स्तर पर ईमानदारी से हो। योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों को अवश्य मिलना चाहिए ।
जीवन में के हर उम्र पड़ाव में एक बात की आवश्यकता होती है और वह है उचित मार्गदर्शन की । बच्चा, युवा, बुजुर्ग सभी को मार्गदर्शन ज़रूरी है। किन्तु इसकी आवश्यकता बाल्य और युवा अवस्था में सबसे ज्यादा होती है। "यदि सही मार्गदर्शन मिले तो जीवन खुशहाल और गलत मार्गदर्शन मिले तो जीवन बदहाल।" युवाओं को बस यह समझने की आवश्यकता है कि जिस व्यक्ति या समूह से मार्गदर्शन मिल रहा है उसे अपनाने में उसे कितना फायदा या नुकसान है। किसी की बात पर आंखे बंद करके विश्वास करना या उसकी मंशा को समझें बिना उसकी बात मानने का क्या परिणाम होगा ? इस पर भी गम्भीरता से विचार करना चाहिये ।
_बिना उद्देश्य के भीड़ का हिस्सा बनकर बंधुआ बनने से अच्छा है अकेले स्वतंत्र रहकर विकास व प्रगति की राह पर अग्रसर होना। इसमें बेशक़ प्रत्यक्ष रूप से अकेले दिखने वाला युवा निश्चित ही परिवार / समाज / देश का मार्गदर्शक बन जाता है।
युवाओं को ख़राब माहौल मिले तो वह बिगड़ जाता है और अच्छा माहौल मिले तो वह एक जिम्मेदार नागरिक बनकर देश के विकास में सहभागी बनता है। सद्विचारों से पल्लवित युवा विपरीत परिस्थितियों में भी नीति-नियम पर दृढ़ संकल्पित रहकर सुनहरे भविष्य का निर्माण करता है। कहा जा सकता है कि "व्यक्ति के भविष्य के निर्माण में मार्गदर्शन के साथ सकारात्मक वातावरण की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। युवावस्था में हम जितना अच्छा कार्य कर सके, हमें करना चाहिए । क्योंकि..
"बचपन और जवानी कभी वापस लौटकर आती नहीं,
उस दौर मे किये गए कर्मो की यादें बुढ़ापे में जाती नहीं ।
कर्म होंगे अच्छे और सच्चे तो याद भी करेगी ये दुनिया,
वर्ना ऐसी तकदीर हर किसी के हिस्से में कभी आती नहीं ।"
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मुरलीधर राहुल मेटांगे, सामाजिक कार्यकर्ता
डॉ. अम्बेडकर युग सेवा समिति, इंदौर

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