प्रयागराज महाकुम्भ........ पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ संगम नगरी प्रयागराज में शुरु हुआ भव्य दिव्य महाकुम्भ
पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ संगम नगरी प्रयागराज में
शुरु हुआ भव्य दिव्य महाकुम्भ
प्रयागराज: मां गंगा, यमुना और सरस्वती नदी के संगम पर महाकुंभ मेले की शुरूआत हो गयी है। महाकुंभ के पहले दिन पौष पूर्णिमा के अवसर पर प्रयागराज में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुट रही है। आज दोपहर तक 60 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम तट पर डुबकी लगा ली है। यह गंगा, यमुना और गुप्त' सरस्वती नदियों का पवित्र संगम है।
144 साल बाद दुर्लभ संयोग में रविवार की आधी रात संगम पर पौष पूर्णिमा की प्रथम डुबकी के साथ ही महाकुंभ का शुभारंभ हो गया है। विपरीत विचारों, मतों, संस्कृतियों और परंपराओं का गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की त्रिवेणी के तट पर महामिलन 45 दिन तक चलेगा। इस अमृतमयी महाकुंभ में देश-दुनिया से 45 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं, संतों-भक्तों, कल्पवासियों और अतिथियों के डुबकी लगाने का अनुमान लगाया जा रहा है।
घने कोहरे और कंपकंपा देने वाली सर्दी भी आस्था के सैलाब में मीलों पीछे छूट गई और श्रद्धालुओं के उत्साह को कम न कर सकी। संगम पर आधी रात लाखों श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। कहीं पैर रखने की जगह भी नहीं बची। आधी रात से ही पौष पूर्णिमा की डुबकी लगाने का सिलसिला शुरू हो गया। इसी के साथ संगम की रेती पर जप, तप और ध्यान की वेदियां सजाकर मास पर्यंत यज्ञ-अनुष्ठानों के साथ कल्पवास भी आरंभ हो गया। इस बार महाकुंभ में 183 देशों के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आने की उम्मीद है। इन विदेशी मेहमानों के स्वागत और आतिथ्य के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार की ओर से भव्य तैयारियां की गई हैं।
यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल महाकुंभ को केंद्र और प्रदेश की सरकारें विश्व समुदाय के समक्ष अद्भुत रूप में प्रस्तुत करना चाह रही हैं। मेला क्षेत्र में रोजाना 800 से अधिक सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। पहली बार 10 लाख वर्ग फीट में दीवारें पेंट की गईं हैं। जानकारी के मुताबिक, कुंभनगरी में सबसे ज्यादा फोकस सेक्टर-18 पर रखा गया है। यहां वीआईपी द्वार भी बनाया गया है। इस स्थान पर 72 देशों के ध्वज लगाए गए हैं, जिनके नुमाइंदे भी मेले में शामिल होने के लिए आ रहे हैं। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद उनकी आगवानी करने की तैयारी कर रखी है।
सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के मकसद से कुंभनगरी के हर सेक्टर में पुलिस थाने बनाए गए हैं। साथ ही, फायर ब्रिगेड की टीमें भी तैनात की गई हैं। कुंभनगरी में कुल 56 अस्थायी थाने स्थापित किए गए हैं। 37 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं, जिन्हें हर तरह की आपात स्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण दिया गया है। कुंभ मेले में भारी भीड़ के बीच किसी के खोने जैसी बातें आम होती हैं, लेकिन इसके लिए भी खास तैयारी की गई है। इस बार श्रद्धालुओं की मदद के लिए 15 खोया पाया केंद्र बनाए गए हैं। अस्थायी अस्पताल भी बनाए गये गये जहां श्रद्धालु इलाज करा सकेंगे।
कुंभ का पौराणिक महत्व
ज्योतिषियों की मानें तो जब बृहस्पति कुंभ राशि और सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है, तब कुंभ लगता है। त्रिवेणी संगम के कारण प्रयाग का महाकुंभ सभी मेलों में ज्यादा महत्व रखता है। कहा जाता है कि देवताओं और राक्षसों के बीच समुद्र मंथन के दौरान 14वें रत्न के रूप में अमृत कलश निकला था, जिसे हासिल करने के लिए उनमें संघर्ष हुआ। असुरों से अमृत बचाने के लिए भगवान विष्णु ने विश्व मोहिनी रूप धारण कर वह अमृत कलश अपने वाहन गरुड़ को दे दिया। असुरों ने गरुड़ से वह कलश छीनने का प्रयास किया तो अमृत की कुछ बूंदें प्रयागराज, नासिक, हरिद्वार और उज्जैन में गिर गईं। कहा जाता है कि तब से हर 12 साल बाद इन स्थानों पर कुंभ मेला आयोजित किया जाता है।
संगम पर महाकुंभ की सदियों पुरानी परंपरा
महाकुंभ कब से शुरू हुआ, इस संबंध में कुछ भी लिखित प्रमाण नहीं है। हालांकि, इस मेले का सबसे पहला लिखित प्रमाण बौद्ध तीर्थयात्री ह्वेनसांग के लेख में मिलता है। उन्होंने छठवीं शताब्दी में सम्राट हर्षवर्धन के शासनकाल में होने वाले कुंभ मेले का वर्णन किया है। वहीं, ईसा से 400 वर्ष पूर्व सम्राट चंद्रगुप्त के दरबार में आए एक यूनानी दूत ने भी ऐसे ही मेले का जिक्र अपने लेख में किया है।
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