मध्य प्रदेश से पिछले तीन वर्षों में

3,400 से अधिक महिलाएं और लड़कियां लापता
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्ट

 

     नई दिल्ली।  राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), भारत ने उन मीडिया रिपोर्टों पर स्वतः संज्ञान लिया है जिसमें कहा गया है कि भोपाल में कोह-ए-फ़िज़ा इलाके में एक अंडर-ब्रिज से छह साल की बच्ची के लापता होने के अठारह दिन बाद भी पुलिस बालिका पता नहीं लगा सकी है पुलिस के पास कोई जवाब नहीं है। कथित तौर पर, इस लापता बच्ची की बेघर मां के आठ बच्चे हैं और उसे अपनी बेटी के लापता होने में उसके अपने एक रिश्तेदार के शामिल होने का संदेह है, लेकिन पुलिस निष्पक्ष जांच नहीं कर रही है और इस मामले में आज तक कोई गिरफ्तारी भी नहीं हुई है।

      कथित तौर पर, लापता होने का यह सिर्फ़ एक मामला नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश पुलिस के आंकड़ों को सही माने तो पिछले तीन सालों में ही मध्यप्रदेश से 3,400 से ज़्यादा महिलाएं और लड़कियां लापता हुई हैं। आयोग के संज्ञान में यह भी आया है कि कथित तौर पर, सीसीटीवी नेटवर्क ख़राब है, त्वरित प्रतिक्रिया दल कार्रवाई में नदारद हैं, और इकाइयों के बीच कोई समन्वय नहीं है।

      आयोग ने पाया है कि यदि समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों में सत्यता है तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला है। इसी के मद्देनजर आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। विगत 25 अप्रैल, 2025 को प्रसारित मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राज्य पुलिस द्वारा पिछले वर्ष लापता लड़कियों को बचाने और उनके पुनर्वास के लिए शुरू किए गए 'ऑपरेशन मुस्कान' नामक अभियान का कोई नतीजा नहीं निकला है।

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न्यूज़ सोर्स : पसूका