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मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष का नाम भी चौंका दे तो ......आश्चर्य नहीं

 

  •  श्याम यादव

भाजपा का अगला प्रदेश अध्यक्ष कौन होगा या अभी यक्षप्रश्न है। इसका खुलासा 2 जुलाई को होगा। लेकिन, अभी तक जो नाम चर्चा में है उनको लेकर जो कयास लगाए जा रहे हैं, वह भी किसी एक नाम की तरफ इशारा नहीं कर रहे। समझा जा रहा है कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री के नाम में जिस चौंकाया था, उसी तरह अध्यक्ष के नाम में भी चौंका सकती है।

 

     भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री के चयन के समय जिस तरह डॉ मोहन यादव का नाम सबके सामने लाकर चौंकाया था। उसी तरह प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष का नाम भी चौंकाने वाला होगा। राजनीतिक हलकों में जो नाम तैर रहे हैं, उन्हीं में से कोई मध्य प्रदेश भाजपा की बागडोर संभालेगा। इस बात का खुलासा 2 जुलाई को होगा कि प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की बागडोर किसके हाथ में होगी। लेकिन, जिस तरह से भाजपा में अध्यक्ष पद को लेकर सरगर्मियां तेज हुई, उससे लगता है कि एक बार फिर पार्टी प्रदेश स्तर पर नहीं, इसका फैसला राष्ट्रीय स्तर पर ही करने वाली है। 

     कहा जा रहा है, कि प्रदेश में भाजपा अध्यक्ष के रूप में ऐसे व्यक्ति की ताशपोशी होगी, जो मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के कदम से कदम मिलाकर चल सके। वैसे भाजपा के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष का कार्यकाल 2023 में ही समाप्त हो गया था। लेकिन, विधानसभा और लोकसभा चुनावों के चलते उन्हें अभी तक  पद पर बनाए रखा है।

प्रदेश में सत्ता और संगठन का तालमेल बना होने के कारण पार्टी भी जल्दी नहीं कर रही। लेकिन, अब जबकि राष्ट्रीय अध्यक्ष का भी चुनाव होना है, तो राज्यों के अध्यक्ष तो तय करना ही होंगे। 2 जुलाई को इस पद पर नए नेता की घोषणा संभव है। 

     इस पद पर वर्तमान अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त होने के बाद से ही पार्टी के कई बड़े नेताओं की नजरें इस कुर्सी पर लगी हुई है। सभी चाहते हैं, कि उनका नाम प्रदेश अध्यक्ष पद पर घोषित हो जाए, ताकि वे अपना शक्ति संतुलन बना सके। ये बात केंद्रीय नेतृत्व भी जानता है। चूंकि राज्य में विधानसभा चुनावों के लिए अभी लम्बा समय है। इस कारण पार्टी बेफिक्री से नए अध्यक्ष की घोषणा अपने हिसाब से कर सकती है।

      निवृत्तमान अध्यक्ष विष्णु शर्मा भी फिर मौका पाने की कतार में है, ऐसा भी कहा जा रहा है। लेकिन, 2023 में उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें अभी तक पदारूढ किया जा चुका है। इस कारण लगता नहीं है कि उन्हें फिर अवसर मिलेगा। वैसे भी जातीय समीकरण  में ब्राह्मण वर्ग से अभी उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल है। भारतीय जनता पार्टी के कई कद्दावर नेता भी इस दौड़ में शामिल हैं, जिनमें प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा जो विधानसभा चुनाव हार गए थे, उनका नाम सबसे आगे चल रहा था। लेकिन, जातीय समीकरण में वे इस पद पर फिट नहीं बैठ रहे हैं।

     जातीय समीकरण भी इस चुनाव में एक आधार हो सकता है। ऐसे में लगता है कि पार्टी किसी आदिवासी या पिछड़े नेता को भारतीय जनता पार्टी की बागडोर सौंप दे। कुल मिलाकर अभी कयास ही जारी है, लेकिन भाजपा तो हमेशा चौंकाने वाले ही काम करती आई है। राजनीतिक हलको में कयास तो यह भी लगाया जा रहा है कि चर्चित नामों को छोड़कर कोई नया चौंकाने वाला नाम भी अध्यक्ष पद के लिए घोषित हो सकता है। जितने भी कद्दावर छत्रप हैं, वे सभी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से भी कहीं वरिष्ठ हैं।

      उनके मंत्रिमंडल में उनसे कहीं अधिक वरिष्ठ छत्रप उनके साथ है। सरकार में सहयोगी बनना और सत्ता और संगठन में समन्वय बैठाना अलग-अलग बात होती है। ये केंद्रीय नेतृत्व भी जानता है। यही कारण है कि प्रदेश में डॉ मोहन यादव के अलावा दूसरा दूसरा केंद्र नहीं बनाना चाहेगी। यही कारण था जब ज्योतिरादित्य सिंधिया, नरेंद्र सिंह तोमर और अन्य नेताओं को अलग-अलग जवाबदारियां सौंपकर  नए डॉ मोहन यादव को सत्ता सौंपी गई थी। हो सकता है इस बार भी ऐसा ही हो। लेकिन, जो नाम अब तक सामने आए है उनमें  नरोत्तम मिश्रा, हेमंत खंडेलवाल, फग्गन सिंह कुलदस्ते, डॉ सुमेर सिंह सोलंकी और लाल सिंह आर्य के नाम शामिल है।

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वरिष्ठ पत्रकार श्री श्याम यादव लम्बे समय तक भारत संचार निगम लिमिटेड,  इंदौर में जन सम्पर्क अधिकारी का दायित्व निभाते रहे हैं। सेवानिवृत्त होने के पश्चात वे राजनीति और समसामयिक विषयों पर स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। साहित्यानुरागी श्री यादव कहानी और  व्यंग्य लेखन में भी सिद्धस्त हैं।