आलेख....... भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का मसला कहां उलझा!*..................... श्याम यादव
आलेख.......
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का मसला कहां उलझा !
- श्याम यादव
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भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा, इस सवाल का जवाब नहीं मिल रहा। ये तात्कालिक मसला नहीं है, बल्कि डेढ़ साल से उलझा है। वर्तमान अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त हुए लंबा समय हो गया। उन्हीं के कार्यकाल को आगे बढ़ाया जा रहा है। लेकिन, अब ऐसे हालात नहीं है कि इसे टाला जाए, फिर भी मामला खींचता जा रहा है। ऐसे में यह आशंका प्रबल होती जा रही है, कि क्या भाजपा और संघ की आपसी खींचतान इसका कारण तो नहीं!
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लोकसभा चुनाव के वक्त और उसके नतीजों के बाद जहां भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयं संघ में जो दूरी दिख रही थी, लग रहा है कि अब वह दूरी और ज्यादा बढ़ गई है । शायद इसीलिए भारतीय जनता पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति में देरी हो रही है। अब कहा जाने लगा है कि सत्ता और पार्टी के वैचारिक संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में इसे लेकर मतभेद है। भाजपा और संघ के बीच एक नाम पर सहमति बनाने की कोशिश जारी है l
अब जबकि देश के आधे से ज्यादा राज्यों में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्षों की नियुक्ति की जा चुकी है, ऐसे में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर किसी भी नाम क़ी घोषणा नहीं होने को लेकर शंका उठना लाजमी है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर सहमति नहीं बन पर रही है और यह असहमति कहीं भाजपा और आरएसएस के बीच की दूरी तो नहीं! वैसे भी देखा जाए तो राज्यों के अध्यक्ष के चुनाव में जितने भी नाम सामने आए, उनमें संघ की सहमति रही है या ये सभी संघ से जुड़े रहें हैंl 'चाल चरित्र और चेहरे' के नारे के साथ पार्टी विथ डिफरेंस का नारा लेकर चलने वाली भारतीय जनता पार्टी अब पहले वाली पार्टी नहीं रह गई हैl पिछले 11वर्षों में भाजपा भी कांग्रेस की तरह हाईकमान वाले रास्ते पर चलती दिखाई दे रही है। यह हम हाल में हुए राज्यों के चुनावों में प्रत्याशियों और मुख्यमंत्रियों के चयन में देख चुके हैंl
केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह द्वारा ही 6 राज्यों के अध्यक्षों का चयन किया गया। राज्यों से नामों की सूची मंगवाने की महज खानापूर्ति की गई। इसके अलावा सारे विधानसभा चुनाव भी मोदी के चेहरे और नाम पर लड़े गए। ऐसे में दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी कही जाने वाली भाजपा नेपथ्य में चली गई। राज्यों के अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया में भी यही किया गया, जिसे सभी ने देखा और समझा भी। लेकिन, अब जबकि राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन की बारी आई तो भाजपा और उसका हाईकमान अध्यक्ष पद पर किसी का नाम तय नहीं कर पा रहा है। क्या अध्यक्ष पद को ले कर सत्ता और संगठन में कोई असहमति है या भाजपा का ये हाईकमान संघ को दरकिनार कर रहा है। कुछ तो है, जो सामान्य नहीं हैl
इस साल विजयादशमी पर आरएसएस की स्थापना के सौ वर्ष पूरे होने पर कोई आयोजन का न किया जाना और आरएसएस की ओर से 75 वर्ष की आयु में राजनीति छोड़ने की सलाह देना भी कहीं न कहीं इस ओर भी दर्शाता है कि सत्ता और संगठन में सब कुछ ठीक नहीं है। यही सब कुछ ठीक नहीं होने का कारण है कि नए अध्यक्ष पर सहमति नहीं बन पा रही है। ऐसे में कयास लगाए जा रहें है। हालांकि, अभी तक इस मुद्दे पर दोनों ओर से चुप्पी ही है। संकेत तो यह भी मिल रहे हैं कि भाजपा के इस हाईकमान के निर्णयों से संघ से जुड़े कई वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार किए जाने से भी पार्टी के भीतर ही भीतर असंतोष है। लेकिन, संघ से अनुशासित ये नेता अभी तक खामोश हैं l
वैसे भी अभी तक जितने भी राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने या बनाए गए (देखें सूची) सभी संघ के करीबी रहे हैं।
अब तक के पार्टी अध्यक्ष
1. अटल बिहारी वाजपेयी
1980–1986
2. लालकृष्ण आडवाणी
1986–1991
(भाजपा के तीन बार अध्यक्ष रहे)
3. मुरली मनोहर जोशी
1991–1993
लालकृष्ण आडवाणी (दूसरा कार्यकाल 1993–1998)
4 कुशाभाऊ ठाकरे
(1998–2000)
5 बंगारू लक्ष्मण
2000–2001
6. जना कृष्णमूर्ति
2001–2002
7. वेंकैया नायडू
2002–2004
लालकृष्ण आडवाणी (तीसरा कार्यकाल)
2004–2005
8. राजनाथ सिंह
2005–2009
9. नितिन गडकरी
2009–2013
राजनाथ सिंह
(2013–2014)
10. अमित शाह
2014 से 2020
10. जगत प्रकाश नड्डा
जनवरी 2020 से अभी तक l
वह लंबे समय तक भाजपा के कार्यवाहक अध्यक्ष रहे।
बहरहाल जो भी हो, इतना तो लग रहा है कि भाजपा का नया अध्यक्ष कौन होगा ? इस पर पेंच फंसा है और सत्ता व संगठन में जेपी नड्डा के बाद अब पार्टी की बाग़डोर कौन संभालेगा, इस पर असमंजस बना हुआ है। अध्यक्ष पद पर जिसे भी चुना जाएगा, उसके सामने इस वर्ष के अंत में बिहार विधानसभा चुनाव और 2026 में पश्चिम बंगाल के चुनाव में पार्टी को जिताने की परीक्षा सामने होगी l
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वरिष्ठ पत्रकार श्री श्याम यादव लम्बे समय तक भारत संचार निगम लिमिटेड, इंदौर में जन सम्पर्क अधिकारी का दायित्व निभाते रहे हैं। सेवानिवृत्त होने के पश्चात वे राजनीति और समसामयिक विषयों पर स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। साहित्यानुरागी श्री यादव कहानी और व्यंग्य लेखन में भी सिद्धस्त हैं।

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