आलेख............ मतदाता सूची का भूत – 2 ......................डा. रजनीश श्रीवास्तव........................................ गतांक से आगे .......
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इन दिनों बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में जागरूकता यात्रा पर हैं। चुनाव आयोग, सत्ता दल और विपक्षी दल अपने – अपने पक्ष में दावा कर रहे हैं कि वे ही सही है। यानी मतदाता सूची आगामी विधानसभा के चुनाव में सबसे संवेदनशील और सर्वाधिक चर्चा का विषय रहेगा।
इंदौर में अपर कलेक्टॅर के पद से सेवानिवृत्त हुए डा. रजनीश श्रीवास्तव ने विधानसभा, लोकसभा के चुनाव के साथ मतदाता सूची को अद्यतन करने और चुनावी प्रक्रिया में सक्रियता से अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन किया है। डा. श्रीवास्तव ने आलेख .. मतदाता सूची का भूत की पहली किश्त में अनेक महत्वपूर्ण जानकारियों से अवगत कराया था । इस आलेख की दूसरी और अंतिम किश्त प्रकाशित की जा रही है। उम्मीद है इस आलेख से कई भ्रांतियां दूर होंगी।
मतदाता सूची का भूत – 2
- डा. रजनीश श्रीवास्तव
गतांक से आगे .......
देश के विभिन्न समाचार पत्रों, टीवी चैनलों और व्हाट्सएप ग्रुपों में मतदाता सूची तैयार करने में की जा रही अनियमितताओं के बारे में जोर-शोर से बहस व चर्चा चल रही है और सभी विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि सत्ता दल और भारत निर्वाचन आयोग द्वारा त्रुटिपूर्ण मतदाता सूची तैयार कराई जा रही है और इस त्रुटिपूर्ण मतदाता सूची के आधार पर होने वाले चुनाव के परिणाम विपक्षी दलों के विपरीत जाएंगे। सर्वोच्च न्यायालय में भी सुनवाई चल रही है। यह बहस अभी भी थमने का नाम नहीं ले रही है।
इन आरोपों के बारे में गंभीरता से विचार करते हुए मतदाता सूची के बनाने की प्रक्रिया और इस प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को पिछले लेख में बताया था।
देश में वर्तमान में छह मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, सीपीआई(M), नेशनल पीपुल्स पार्टी और आम आदमी पार्टी हैं।
जब मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होती है तो सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को लिखित सूचना दी जाती है। उसके बाद प्रारंभिक मतदाता सूची के प्रकाशन के एक दिन पूर्व उनकी बैठक में मतदाता सूची के प्रकाशन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी जाती है और उनको प्रारूप मतदाता सूची का एक सेट निशुल्क दिया जाता है ताकि वह अपने स्तर पर मतदाता सूची की शुद्धता की जांच कर सके।
भारत निर्वाचन आयोग प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशन के पहले तैयार हो रही मतदाता सूची में हुई त्रुटियों की कंप्यूटरीकृत जांच कर कंप्यूटराइज सूची निकाल कर सभी प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के माध्यम से सभी जिलों के संबंधित ईआरओ या मतदाता रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को दी जाती है। जिसमें निम्न प्रकार की त्रुटियों की और ध्यान आकर्षित किया जाता है।
- मतदाता की फोटो के बिना मतदाताओं की सूची।
- समान फोटो वाले मतदाताओं की सूची अर्थात डुप्लीकेट मतदाता की सूची।
- एक मकान में बहुत अधिक संख्या वाले मतदाताओं की सूची।
- बिना मकान नंबर या 0 मकान नम्बर वाले मतदाताओं की सूची।
- बिना नाम वाले मतदाताओं की सूची अर्थात जहां मतदाता के नाम या पिता के नाम की जगह कोई अल्फाबेट या कोई अक्षर अंकित है।
यह सूचियां संबंधित रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को दी जाती है। तत्पश्चात बीएलओ के माध्यम से इनकी जांच कराने के बाद इनमें सुधार किया जाता है।
नाम जोड़ने व काटने के दावे व आपत्तियां प्राप्त होने के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाती है।
इस मतदाता सूची में जो नए नाम जोड़े गए हैं या जो नाम काटे गए हैं उनकी सूची पृथक से सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को लिखित में सूचना देकर सूची निशुल्क प्रदान की जाती है।
इसके पश्चात जिन स्थानों पर इस मतदाता सूची के आधार पर निर्वाचन होना है, उन राज्यों में उन स्थानों के जिला निर्वाचन अधिकारियों के अधीनस्थ कार्यरत रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा निर्वाचन की घोषणा होने के पश्चात नाम निर्देशन पत्र जमा होने के 10 दिन पहले तक नाम जोड़े जाने के आवेदन लिए जाते हैं। बीएलओ से जांच करा कर उनके नाम मतदाता सूची में जोड़े जाकर मतदाता सूची को निर्वाचन हेतु अंतिम रूप दिया जाता है।
निर्वाचन की अधिसूचना जारी होने के पश्चात उस निर्वाचन क्षेत्र की किसी भी मतदाता सूची से कोई भी नाम विलोपित या काटे नहीं जाते हैं। यह स्पष्ट निर्देश हैं और सॉफ्टवेयर को लॉक भी कर दिया जाता है ताकि कोई भी नाम काटा नहीं जा सके।
रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के द्वारा की गई त्रुटि के सुधार की अपील अपर कलेक्टर के यहाँ और उसकी अपील मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को और उसके बाद भारत निर्वाचन आयोग को की जा सकती है।
अब आप ही विचार करने का प्रयास करें कि फर्जी तरीके से मतदाता सूची कैसे तैयार कर सकते हैं ?
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डा. रजनीश श्रीवास्तव, अपर कलेक्टर (से.नि.) इंदौर

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