'बिना सर्जरी' के प्रोस्टेट का उपचार    

 

 

एम्स भोपाल में अत्याधुनिक पीएई शुरू

भोपाल। मध्यप्रदेश और आसपास के राज्यों के प्रोस्टेट के मरीजों का अब प्रोस्टेट आर्टरी एम्बोलाइजेशन (पीएई) के माध्यम से बिना सर्जरी के ही उपचार किया जा सकेगा । अमेरिकन यूरोलॉजिकल एसोसिएशन (AUA) और NICE यूके गाइडलाइंस द्वारा अनुमोदित प्रोस्टेट आर्टरी एम्बोलाइजेशन उपचार की सुविधा भोपाल के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में शुरू हो गई है। प्रोस्टेट आर्टरी एम्बोलाइजेशन (पीएई)नामक अत्याधुनिक प्रक्रिया बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरट्रॉफी (बढ़े हुए प्रोस्टेट) के उपचार के लिए एक क्रांतिकारी, सुरक्षित और प्रभावी तकनीक है। यह प्रक्रिया बिना सर्जरी के प्रोस्टेट के आकार को घटाकर रोग के लक्षणों में उल्लेखनीय राहत प्रदान करती है।

     एम्स भोपाल के रेडियोलॉजी डायग्नोसिस विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. राजेश मलिक ने बताया कि यह प्रक्रिया अमेरिकन यूरोलॉजिकल एसोसिएशन (AUA) और यूके के NICE गाइडलाइंस द्वारा अनुमोदित है। यह सुविधा एम्स भोपाल के इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी ट्रीटमेंट सेंटर में प्रारंभ की गई है। एम्स भोपाल का इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी ट्रीटमेंट सेंटर इस उन्नत तकनीक को अपनाने वाले अग्रणी संस्थानों में शामिल हो गया है। प्रशिक्षित रेडियोलॉजिस्टों की टीम द्वारा यह प्रक्रिया अब स्थानीय मरीजों के लिए उपलब्ध है, जो एम्स भोपाल की उन्नत और जन-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस नवीन उपचार के स्थानीय रूप से उपलब्ध होने से मध्य प्रदेश और आसपास के राज्यों के प्रोस्टेट से पीड़ित पुरुष अब बढ़े हुए प्रोस्टेट की समस्या का अधिक सुरक्षित, आरामदायक और प्रभावी समाधान पा सकेंगे तथा आत्मविश्वास के साथ स्वस्थ जीवन जी सकेंगे।

क्या है प्रोस्टेट आर्टरी एम्बोलाइजेशन

    प्रोस्टेट आर्टरी एम्बोलाइजेशन एक अत्याधुनिक तकनीक है, जिसमें प्रोस्टेट की रक्त आपूर्ति को कम या अवरुद्ध किया जाता है, जिससे उसका आकार घटता है और बिना सर्जरी के लक्षणों में राहत मिलती है। पारंपरिक सर्जरी के विपरीत, यह प्रक्रिया कलाई या जांघ की धमनी में एक सूक्ष्म छेद (पिनहोल) के माध्यम से की जाती है। उन्नत इमेजिंग तकनीक की सहायता से इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट सूक्ष्म कणों को प्रोस्टेट की धमनियों में प्रवाहित करते हैं, जिससे रक्त प्रवाह घटता है और प्रोस्टेट सिकुड़ता है।

पीएई प्रक्रिया के लाभ


मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होती, अधिकांश मरीज उसी दिन घर जा सकते हैं।

किसी प्रकार का चीरा या कट नहीं लगता, जिससे शरीर को न्यूनतम आघात होता है।

सामान्य एनेस्थीसिया की जरूरत नहीं, केवल स्थानीय एनेस्थीसिया या हल्की सिडेशन पर्याप्त होती है।

यौन क्षमता सुरक्षित रहती है, यह प्रक्रिया स्तंभन या स्खलन संबंधी समस्याएँ उत्पन्न नहीं करती।

यह प्रक्रिया वृद्ध या अन्य बीमारियों से ग्रस्त उच्च जोखिम वाले मरीजों के लिए भी उपयुक्त है।

सफलता की कहानी

एम्स भोपाल में प्रोस्टेट से पीड़ित 65 वर्षीय मरीज इलाज के लिये आया था । वह बार-बार पेशाब आने, पेशाब करने में कठिनाई और कमजोर प्रवाह जैसी समस्याओं से परेशान था, उसकी एम्स भोपाल के इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी सेंटर में पीएई प्रक्रिया कराई। उम्र और स्वास्थ्य कारणों से वह पारंपरिक सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं थे। डॉ. अमन कुमार द्वारा यह पीएई प्रक्रिया सफलतापूर्वक की गई और किसी प्रकार की जटिलता नहीं आई। कुछ ही सप्ताह में मरीज पूरी तरह प्रोस्टेट की समस्या से पूरी तरह हो गया और उसका जीवन सामान्य जी रहे हैं।  पीएई उच्च जोखिम वाले मरीजों के लिए भी एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है।

**********************
 

न्यूज़ सोर्स : AIIMS Bhopal