BJP विधायक का बड़ा बयान: Sharad Pawar को मिल सकती है नई जिम्मेदारी
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से भारी उठापटक और सियासी समीकरणों के तेजी से बदलने के संकेत मिल रहे हैं। एक तरफ जहां उद्धव ठाकरे गुट के सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की अटकलें तेज हैं, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी विधायक आशीषराव देशमुख के एक विस्फोटक दावे ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।
संजय राउत चाहते हैं कांग्रेस में हो जाए पार्टी का विलय: आशीषराव देशमुख
भाजपा विधायक आशीषराव देशमुख ने शिवसेना (यूबीटी) के संकट के बीच एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने कहा, "मैंने सुना है कि संजय राउत पर्दे के पीछे एक बड़ी योजना पर काम कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि शिवसेना (यूबीटी) के सभी विधायक और सांसद पूरी तरह से कांग्रेस पार्टी में विलय (मर्ज) कर लें।"
देशमुख ने इस महा-विलय के बदले तय होने वाले कथित फॉर्मूले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस डील के तहत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार को राज्यसभा में विपक्ष का नेता बनाया जाएगा, जबकि उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया जाएगा। बीजेपी विधायक ने तंज कसते हुए आगे कहा कि संजय राउत की इसी योजना और अंदरूनी घटनाक्रम से परेशान होकर उद्धव गुट के सांसद लोकसभा अध्यक्ष से मिलने दिल्ली पहुंचे होंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब जनता ने संजय राउत के रोज-रोज के बयानों को गंभीरता से लेना बंद कर दिया है।
सांसदों को 15-15 करोड़ रुपये का ऑफर: संजय राउत का पलटवार
इन तमाम अटकलों और आरोपों के बीच शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सत्ताधारी गठबंधन पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए लिखा, "अपना सपना मनी मनी... यह बेहद चौंकाने वाला और घिनौना काम है।"
राउत ने दावा किया कि महाराष्ट्र के विपक्षी सांसदों को पाला बदलने और अपनी निष्ठा बेचने के लिए 15-15 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि का ऑफर दिया जा रहा है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए एक बेहद शर्मनाक स्थिति बताया और ज़ोर देकर कहा कि उनके सभी सांसद एकजुट हैं और पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़े हैं।
टूट के डर से उद्धव गुट ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र
अपनी पार्टी में एक और संभावित और बड़े 'ऑपरेशन' या टूट के खतरे को देखते हुए शिवसेना (यूबीटी) ने तुरंत कानूनी कदम उठाए हैं। पार्टी की तरफ से लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को एक आधिकारिक पत्र भेजा गया है। इस पत्र के जरिए स्पीकर से विशेष अपील की गई है कि यदि पार्टी का कोई भी सांसद अलग गुट बनाने या किसी अन्य दल में शामिल होने का दावा पेश करता है, तो उसे तब तक बिल्कुल भी मान्यता न दी जाए जब तक मूल पार्टी का पक्ष न सुन लिया जाए।
पत्र में पार्टी ने मजबूत कानूनी तर्क देते हुए लिखा कि शिवसेना (यूबीटी) एक पंजीकृत राजनीतिक दल है और कानून की नजर में केवल वही मान्य है। संसद या लोकसभा में किसी भी सांसद का अस्तित्व उसके मूल राजनीतिक दल से ही आता है। इसलिए, पार्टी से अलग होकर कुछ सांसदों द्वारा नया गुट बनाकर उसी मूल पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा पूरी तरह से गैर-कानूनी और अमान्य माना जाना चाहिए।
समीक्षा: महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आया यह सियासी भूचाल इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में सूबे की राजनीति में कई और बड़े उलटफेर देखने को मिल सकते हैं।

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