नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के हालिया आँकड़ों से पता चलता है की देश में अपहरण के मामलों में अत्यधिक वृद्धि हुई है । पिछले 70 वर्षों में दर्ज 20 लाख अपहरण मामलों में से 11 लाख से अधिक मामले केवल पिछले 10 वर्षों में सामने आए हैं, जो अपराधों में तेजी बढ़ोत्तरी को इंगित कर रहे  हैं। अपहरण की घटनाओं में सबसे अधिक मामले महिलाओं और लड़कियों को विवाह के लिए जबरन उठाने तथा सामान्य अपहरण के हैं। भोपाल में आईएएस एकेडमी की निदेशक के अपहरण और करोड़ों की फिरौती की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। आँकड़े बताते हैं कि कुल अपराधों में अपहरण की हिस्सेदारी 1 प्रतिशत से बढ़कर 3 प्रतिशत से अधिक हो गई है।

सरोकार

आखिर क्यों बढ़ रही है अपहरण की घटनाएँ ?

  • डा. चन्दर सोनाने

     नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NRCB) द्वारा हाल ही में जारी आँकड़ों के अनुसार पिछले 70 साल में 20 लाख अपहरण के प्रकरण दर्ज किए गए हैं। किन्तु इसमें चौंकाने वाली बात यह है कि इन आँकड़ों में से 11 लाख अपहरण केवल पिछले 10 सालों में ही दर्ज किये गए  हैं। यह गंभीर चिंताजनक बात है।

     नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आँकड़ों के अनुसार अपहरण की घटनाओं में तीन गुना वृद्धि हुई है। देश में अपहरण और लड़कियों को जबरन उठा ले जाने की घटनाएं पिछले एक दशक में अप्रत्याशित रूप से बढ़ी है। हाल ही में मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एक आईएएस एकेडमी की निदेशक के अपहरण और 1 करोड़ 89 लाख रूपए की फिरौती के मामले ने प्रदेश और देश में सुरक्षा व्यवस्था पर अनेक सवाल खड़े कर दिए हैं।  प्राप्त आँकड़ों के विश्लेषण से यह पता चलता है कि वर्ष 1953 से 2024 तक देश में कुल 20 लाख से अधिक अपहरण के मामले दर्ज किए गए हैं। इसमें चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इन सात दशकों में कुल मामलों का 54 प्रतिशत हिस्सा यानी 11 लाख 24 हजार प्रकरण केवल पिछले एक दशक 2013 से 2024 के दौरान ही दर्ज हुए हैं ।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार कुल अपराधों में अपहरण की हिस्सेदारी वर्ष 1953 से 1962 के बीच 1.01 प्रतिशत थी। जो 2013 से 2024 के दौरान बढ़कर 3.04 प्रतिशत तक पहुँच गई। अपहरण के कारणों में सबसे बड़ा कारण विवाह के लिए महिलाओं को उठाना और सामान्य अपहरण है।

    अपहरण के मामलों में राज्यों की तुलना करें तो उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र के बाद बिहार तीसरे नम्बर पर है। वर्ष 2024 के आँकड़ों में बिहार शीर्ष 6 राज्यों में सबसे नीचे दर्ज किया गया है। फिरौती के लिए किए जाने वाले संगठित अपहरण कुल मामलों का केवल 0.7 प्रतिशत ही है।

     उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार पिछले 7 दशकों में से प्रत्येक दशक में अपहरण और उसकी हिस्सेदारी इस प्रकार है - सन 1953 से 1962 के बीच 60,463 अपहरण हुए थे। कुल अपहरण में इसकी हिस्सेदारी 1.01 प्रतिशत ही थी। 1963 से 1972 के दशक में कुल 85,401 हुए। कुल अपहरण में इसकी हिस्सेदारी भी 1.01 प्रतिशत ही थी। 1973 से 1982 तक के दशक में 1,22,905 अपहरण हुए। कुल अपहरण में इसकी हिस्सेदारी 0.98 प्रतिशत थी।

      सन 1983 से 1992 के दशक में कुल अपहरण 1,68,112 अपहरण हुए। कुल अपहरण में इसकी हिस्सेदारी 1.13 प्रतिशत थी। सन 1993 से 2002 के दशक में कुल अपहरण 2,17,949 हुए। कुल अपहरण में इसकी हिस्सेदारी 1.26 प्रतिशत थी। सन 2003 से 2012 तक के दशक में कुल अपहरण 3,05,438 हुए। कुल अपहरण में इसकी हिस्सेदारी 1.33 प्रतिशत थी। सन 2013 से 2024 के दौरान अपहरण की संख्या में अचानक तीन गुना वृद्धि हो गई ! इस दशक में कुल अपहरण 11,24,117 हुए। कुल अपहरण में इसकी हिस्सेदारी 3.04 प्रतिशत थी। ये आँकड़ें भयावह और चौंकाने वाले हैं।

      दिनोंदिन अपहरण की बढ़ती हुई संख्या चौंकाने वाली है। साथ ही आश्चर्यजनक भी है। जिस परिवार में किसी लड़की या लड़के का अपहरण होता है तो उस पर क्या गुजरती है, यह वहीं जानता है। पूरे परिवार की नींद उड़ जाती है। केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों को चाहिए कि वे इन आँकड़ों को गंभीरतापूर्वक लें और योजनाबद्ध तरीके से अपहरण हुए बच्चों को न केवल ढूँढ निकाले, बल्कि भविष्य में अपहरण नहीं होने पाए, इसके लिए कठोर नियम बनाएं, ताकि  किसी भी परिवार के दिन का चैन और रात की नींद खराब नहीं होने पाए।

...................000...................... 

                   

डा. चंदर सोनाने मध्यप्रदेश के जनसम्पर्क विभाग से संयुक्त संचालक के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उज्जैन में निवास कर रहे हैं। उनकी सामयिक और सामाजिक विषयों पर विशेष रूचि है और वेसरोकार” स्तम्भ के जरिये जनहित से सरोकार रखने वाले मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय व्यक्त करते हैं।  

*********************************