मछलियों के मांस से बना खाद आलू की फसल में उपयोग होगा !
मछलियों के मांस से बना खाद
आलू की फसल में उपयोग होगा !
नई दिल्ली । क्या भारत में भी अब आलू फसलों में उपयोग किए जाने वाले रासायनिक उर्वरकों में मछलियों के मांस और खाल से निकाले गये प्रोटीन हाईड्रोलाईजेट को मिलाने की अनुमति भारत सरकार ने दे दी है। नई दिल्ली के मिशन जीवन मित्र के अध्यक्ष एन. के. जीवमित्र ने इस बात की पुष्टि करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर केंद्र सरकार द्वारा इस सम्बंध में जारी की गई अधिसूचना को रद्द करने की मांग की है।
एन. के. जीवमित्र ने दावा किया है कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने FCO (Fertilizer Control Order) 1985 में संशोधन करते हुए 13 अगस्त 2025 को गजट नोटिफिकेशन जारी किया है। इस नोटिफिकेशन के माध्यम से ऐसे प्रावधान जोड़े गये हैं जिनके तहत अब बायो-स्टिमुलेंट में पशु- आधारित अमीनो एसिड (Animal Source Amino Acid) को वैध कर दिया गया है। गजट नोटिफिकेशन के क्रमांक 26 के अनुसार मछलियों के मांस और खाल से निकाले गये प्रोटीन हाईड्रोलाईजेट को आलू की फसलों में खाद के रूप में उपयोग करने की सिफारिश की गई है। इसी तरह क्रमांक 30 के अनुसार गौजातीय/Bovine पशुओं के मांस और चमड़े से प्राप्त किये गये प्रोटीन हाईड्रोलाईजेट को टमाटर की फसलों में फर्टिलाइजर के रुप में उपयोग करने की अनुशंसा की है। श्री जीवमित्र ने कहा है कि आलू और टमाटर ऐसी सब्जियां हैं जिनका बड़्र्र संख्या में शाकाहारी समाज द्वारा अत्यधिक उपयोग किया जाता है।
श्री जीवमित्र ने कृषि मंत्री हो लिखे पत्र में बताया है कि रासायनिक उर्वरकों के लिये आवश्यक अमीनो एसिड प्राकृतिक रूप से पौधों, दलहन, सोयाबीन, समुद्री शैवाल आदि से भी प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होने दुख व्यक्त करते हुये कहा है कि इसके बावजूद भी, कृषि मंत्रालय ने कत्लखानों एवं चमड़ा घरों से निकली गंदगी जैसे हड्डियाँ, खून, चमड़ा, आंतरिक अवशेष आदि से बने उत्पादों को कृषि उत्पादन में उपयोग करने की मंजूरी दी है, जो कि एक अक्षम्य कृत्य है। श्री जीवमित्र ने कृषि मंत्री से कहा है कि आप स्वयं शाकाहारी व्यक्ति हैं और शुद्ध भोजन में विश्वास करते हैं। बावजूद इसके कि आपके ही मंत्रालय ने कृषि को रक्तरंजित करने के आदेश जारी किए हैं । उन्होने कहा है कि आपके अधीन कृषि मंत्रालय का यह अमानवीय कृत्य न सिर्फ शाकाहारी समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाता है, बल्कि चुपके से भारतीय कृषि और खाद्य श्रृंखला में गौजातीय पशुओं के अपशिष्ट को मिलाने का षड्यंत्र भी है।
श्री जीवमित्र ने कृषि मंत्री को लिखे पत्र में बताया है कि स्लॉटर हाउस और मांस उद्योगों के पास तो प्रतिदिन लाखों टन अपशिष्ट बचता है। उम्होने आरोप लगाया है कि अब इस अपशिष्ट को बायो-स्टिमुलेंट के नाम पर फर्टिलाइज़र में खपाने का रास्ता कृषि मंत्रालय ने खोल दिया है, जिसका सीधा लाभ स्लॉटर हाउस लॉबी को होगा। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह निर्णय आपकी पार्टी और मीट लाबी की मिली भगत का नतीजा तो नहीं है? उन्होने पत्र में उल्लेख किया है कि आपके मंत्रालय के आदेश की वजह से पशु स्रोत वाले उत्पाद खाद्य शृंखला में भी प्रवेश कर जाएंगे, जो करोड़ों शाकाहारी भारतवासियों की धार्मिक आस्था और जीवनशैली के अधिकार (अनुच्छेद 21) का उल्लंघन है। उम्होने कृषि मंत्रालय के इस निर्णय को हिंदू और जैन समाज के लिए पूरी तरह से अस्वीकार्य बताते हुये मांग की है और इसे तत्काल वापस लेने का अनुरोध किया है। उन्होंने कृषि और खाद्य सुरक्षा में स्लॉटर हाउस वेस्ट का प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित करने पर भी बल दिया है। श्री जीवमित्र ने कहा है कि यदि मंत्रालय करोड़ों हिंदू और जैन समुदाय की धार्मिक भावना से खिलवाड़ करने वाले इस आदेश को निरस्त नहीं करता है तो इस अधिसूचना को निरस्त करवाने के लिए जन आंदोलन करेंगे। श्री जीवमित्र से मोबाईल नम्बर 9910378087 अथवा ईमेल nk.jeewmitra@outlook.com सम्पर्क किया जा सकता है।
अमेरिका से व्यापार समझौता न होने के पीछे एक बड़ा कारण यह भी बताया जा रहा है कि भारत सरकार वहां के डेयरी उत्पादों को भारत में बिक्री की अनुमति नहीं देना चाहती है। अमेरिका चाहता है भारत अमेरिका के डेयरी उत्पादों को भारत में बेचने की अनुमति प्रदान करे। भारत द्वारा अमेरिका के डेयरी उत्पादों को अपने घरेलु बाजार में विक्रय करने के लिए सहमत नहीं होने की सबसे बड़ी वजह “नानवेज मिल्क” (मांसाहारी दूध) का होना है। अमेरिका में गायों को सुअर, मछली, चिकन, घोड़े और यहां तक कि बिल्लियों और कुत्तों के मांस से बनाया हुआ चारा खिलाया जाता है। इसके अलावा प्रोटीन के लिए सुअर और घोड़े का ख़ून भी आहार में मिलाया जाता है। अमेरिका के डेयरी संचालक गायों का वज़न बढ़ाने के लिए जानवरों का मांस और ख़ून मिला आहार भी खिलाते हैं जिसे 'ब्लड मील' कहते हैं। इसीलिए अमेरिका के दूध को नानवेज मिल्क की श्रेणी में रखा जा रहा है।
भारत के संदर्भ में जब नानवेज मिल्क की बात आती है तो भारतीय समाज में यह पूरी तरह अस्वीकार्य है। भारत में गायों को पवित्र माना जाता है तथा गाय को माता का दर्जा दिया है। दूध और घी का धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग किया जाता है। भारत में डेयरी क्षेत्र में करोड़ों किसान और डेयरी पालक जुड़े हुए हैं। अमेरिका में डेयरी उद्योग को सबसिडी भी दी जाती है जिसके कारण कम मूल्य पर आयात होने से भारतीय किसानों और डेयरी संचालकों को नुकसान होने की सम्भावना भी है।
