रंगोत्सव की आपको हार्दिक बधाई... शुभकामनाएं ................................ होली है दिलों को जीतने का त्यौहार ................आलेख............ राजकुमार बरूआ
जीवन में रंगों का बहुत गहरा महत्व है। ये केवल दृश्य सुंदरता ही नहीं, बल्कि हमारी भावनाओं, मूड और मानसिक स्थिति को सीधे प्रभावित करते हैं। रंग ऊर्जा के स्रोत हैं। जैसे लाल जोश, नीला शांति और पीला खुशी का प्रतीक है। सही रंगों का चुनाव आत्मविश्वास बढ़ाने और खुशहाली लाने में मदद करता है। तो आईए, इस होली के रंग भरे त्यौहार में हम सब मिलजुल कर एक दूसरे के प्रेम के रंग में रंग जाएं। आपसी भाईचारे की उस बेल को इतना बढ़ाएं कि हमारे जीवन में खुशहालियों का आगमन निरंतर बना रहे।
रंगोत्सव की आपको हार्दिक बधाई... शुभकामनाएं ........
होली है दिलों को जीतने का त्यौहार
राजकुमार बरूआ
वैमनस्यं तृणीकृत्य होल्यग्नौ भस्मतां हितम् ।
नानारङ्गजलैबी सौमनस्यं भवेत् पुनः ।।
होली का नाम कानों में पड़ते ही या उसकी बात करते ही पूरे शरीर में मस्ती की तरंग दौड़ने लगती हैं, उसमें उत्साह और उमंग भर जाती है। होली हमें सीधे जोड़ती है। हमारे बचपन से उस बचपन से जिससे हम आज भी जुड़े हुए हैं, और इस बचपन के कारण हमारे अंदर उत्साह, उमंग, मस्ती और फिर एक बार बचपन में लौटने की इच्छा प्रबल हो जाती है।
रंगों का यह त्यौहार, हमारी सामाजिक एकता भाईचारे और राष्ट्रीय एकता के लिए विशेष महत्व रखता है। यह त्यौहार हमें सभी से मिलजुल और गले लगा कर दिल खोलकर और रंगों के साथ मस्ती करने सभी को अपना बनाने के लिए प्रेरित करता है। समरसता का यह महापर्व हमें जोड़ता है हमारी उस संस्कृति से जो हमें 'वसुधैव कुटुंबकम' का भान कराती हैं।
होली का त्यौहार हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत (प्रहलाद-होलिका कथा) और वसंत ऋतु के आगमन के साथ-साथ रिश्तों में नई मिठास व प्रेम के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
एक प्रसिद्ध फिल्म का गाना भी है।
"होली के दिन दिल खिल जाते हैं रंगों में रंग मिल जाते हैं
गीले शिकवे भूल के दोस्तों दुश्मन भी गले मिल जाते हैं।
आज की आधुनिक और भाग-दौड़ भरी जिंदगी में, हमें कुछ देर ठहर कर अपने प्रिय लोगों से मिलने, खुलकर उनसे अपने दिल की बात करने का वक्त ही नहीं मिलता है।
हमारे पारंपरागत त्यौहार हमें अवसर देते हैं कि हम अपने रिश्तों को मजबूती प्रदान करें और एक दूसरे के मन में कोई गिले शिकवे हो तो उन्हें दूर कर उन रिश्तो को अमरता प्रदान करते हुए जीवन भर अपने साथ रखें। क्योंकि वर्तमान समय की एक ज्वलंत समस्या है परिवारों का विखंडित हो जाना।
आधुनिक दौर ने एक बड़ी भयानक समस्या को जन्म दिया है और वह 'एकाकी परिवार'। एकाकी परिवार ऐसा ज्वलंत मुद्दा है जो आने वाले भारत के भविष्य के लिए बहुत ज्यादा ही खतरनाक है, जिसके कारण परिवारों की एकता टूट रही है। लोगों ने अपने जीवन को सीमित कर लिया है और उन खुशियों से वह दूर होते जा रहे हैं जो हमें हमारी विरासत में मिले थे। लगभग आज से तीन दशक पहले तक सभी ने संयुक्त परिवार के सुख को देखा है और बेफिक्री के साथ अपने जीवन को जिया है। आज भी हम इस संयुक्त परिवार की कल्पना करके आनंदित हो जाते हैं।
परिवार की एकता और अखंडता एक सुखी, स्वस्थ और भावनात्मक रूप से मजबूत जीवन का आधार है। यह सदस्यों के बीच आपसी प्रेम, समझ, त्याग और संवाद के माध्यम से बनी रहती है। एक साथ समय बिताना परंपराओं का पालन करना और मुश्किल समय में एक-दूसरे का समर्थन करना परिवार के बंधन को मजबूत करता है।
सनातन धर्म के त्यौहार वास्तव में लोगों, परिवारों और समुदायों को एकजुट करने तथा आपसी प्रेम बढ़ाने और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने के लिए एक दिव्य सेतु के रूप में रचे गए हैं।
यह त्योहार न केवल आध्यात्मिक प्रेरणा देते हैं, बल्कि रिश्तों में प्रगाढ़ता लाते हैं, सामुदायिक सद्भाव विकसित करते हैं और भारतीय संस्कृति को जीवित रखते हैं। लगभग सभी घरों में कुछ परंपरागत स्वादिष्ट व्यंजनों का बनना प्रमुख त्योहारों पर जरूरी होता है, साथ ही आने वाली पीढियां को भी उस व्यंजन बनाने की कला से जोड़ने का अवसर भी हमें हमारे त्योहार प्रदान करते हैं।
जीवन में रंगों का बहुत गहरा महत्व है। ये केवल दृश्य सुंदरता ही नहीं, बल्कि हमारी भावनाओं, मूड और मानसिक स्थिति को सीधे प्रभावित करते हैं। रंग ऊर्जा के स्रोत हैं। जैसे लाल जोश, नीला शांति और पीला खुशी का प्रतीक है। सही रंगों का चुनाव आत्मविश्वास बढ़ाने और खुशहाली लाने में मदद करता है।
तो आओ इस होली के रंग भरे त्यौहार में हम सब मिलजुल कर एक दूसरे के प्रेम के रंग में रंग जाएं। आपसी भाईचारे की उस बेल को इतना बढ़ाएं कि हमारे जीवन में खुशहालियों का आगमन निरंतर बना रहे।
हमारी परंपराओं का आने वाली पीढ़ियों को महत्व समझकर, उन्हें इसका मुख्य उद्देश्य बताकर परिवार की मजबूती का सूत्र उनके हाथों को सौंप दें।
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श्री राजकुमर बरूआ वरिष्ठ लेखक, कहानीकार, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वे सामयिक विषयों पर निरंतर लिख रहे हैं।

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