भ्रामक दावों में फंसा नामी कोचिंग संस्थान, 15 लाख का जुर्माना
भ्रामक दावों में फंसा नामी कोचिंग संस्थान, 15 लाख का जुर्माना
संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा 2023 के नतीजों को लेकर बड़े दावे करने वाले कोचिंग संस्थान वाजिराव एंड रेड्डी इंस्टीट्यूट पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने 15 लाख रुपये का भारी जुर्माना ठोका है। जांच में पाया गया कि संस्थान ने सफल अभ्यर्थियों के नाम और रैंक का प्रचार करते समय महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई और उपभोक्ताओं को गुमराह किया।
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) 2023 से जुड़े भ्रामक विज्ञापनों के मामले में वाजिराव एंड रेड्डी इंस्टीट्यूट के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने संस्थान पर 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए अंतिम आदेश जारी किया है।
संस्थान ने 16 अप्रैल 2024 को परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद अपनी वेबसाइट पर दावा किया था कि यूपीएससी सीएसई 2023 की 1016 रिक्तियों में से 645 से अधिक उम्मीदवारों का चयन उसके यहां से हुआ है। साथ ही टॉप 10, टॉप 50 और टॉप 100 रैंक में अपने छात्रों के चयन का भी प्रचार किया गया।
हालांकि जांच में सामने आया कि संस्थान ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इन सफल उम्मीदवारों ने वास्तव में कौन-सा पाठ्यक्रम किया था। वेबसाइट पर विभिन्न कोर्स—जीएस फाउंडेशन, प्री-फाउंडेशन, वीकेंड कोर्स, वैकल्पिक विषय और जीएस प्री-कम-मेन्स—का प्रचार किया जा रहा था, जिससे यह धारणा बनी कि सभी चयनित उम्मीदवार इन नियमित पाठ्यक्रमों के छात्र थे।
महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने का आरोप
सीसीपीए ने कहा कि सफल उम्मीदवार द्वारा चुना गया विशेष पाठ्यक्रम उपभोक्ताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण जानकारी है। इसे छिपाना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है। इससे छात्रों में यह भ्रम पैदा हुआ कि चयनित उम्मीदवारों को प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार—तीनों चरणों की कोचिंग संस्थान से मिली थी, जबकि कई मामलों में ऐसा नहीं था।
नामांकन रिकॉर्ड में गड़बड़ी
जांच के दौरान संस्थान द्वारा प्रस्तुत 431 नामांकन प्रपत्रों में यह दर्ज ही नहीं था कि छात्रों ने कौन-सा कोर्स जॉइन किया था। कई फॉर्म में तारीख भी नहीं थी। जब इस पर स्पष्टीकरण मांगा गया तो संस्थान संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।
इसके अलावा जिन फॉर्म में कोर्स का उल्लेख था, उनमें से कई में केवल “साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रम” या “मॉक इंटरव्यू” लिखा था। यानी कई उम्मीदवारों ने सिर्फ अंतिम चरण के लिए मार्गदर्शन लिया था, न कि पूरी परीक्षा की कोचिंग। इसके बावजूद संस्थान ने उन्हें अपनी समग्र सफलता के दावे में शामिल किया।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
सीसीपीए ने यह भी बताया कि वाजिराव एंड रेड्डी इंस्टीट्यूट पर इससे पहले यूपीएससी सीएसई 2022 के परिणामों से जुड़े भ्रामक विज्ञापन के लिए 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। चेतावनी के बावजूद दोबारा ऐसे दावे करना नियामकीय निर्देशों की अनदेखी माना गया।
लाखों छात्रों पर असर
हर साल करीब 11 लाख अभ्यर्थी यूपीएससी परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं। ऐसे में भ्रामक विज्ञापन बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों को प्रभावित कर सकते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में छात्र भारी समय, मेहनत और धन लगाते हैं। गलत दावे उनके शैक्षणिक फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं।
अब तक सीसीपीए ने भ्रामक विज्ञापनों के लिए 57 नोटिस जारी किए हैं। 29 कोचिंग संस्थानों पर कुल 1.24 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया जा चुका है।
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि सभी कोचिंग संस्थानों को अपने विज्ञापनों में पूरी, सत्य और पारदर्शी जानकारी देनी होगी, ताकि छात्र सही और सूचित निर्णय ले सकें।

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