हलवा और बजट”...... क्या सम्बंध है इनका  

    भारत में हलवा मिष्ठान का एक प्रकार है और प्राय: देश के अधिकांश परिवारों में तीज त्यौहारों, विशेष आयोजनों, मेहमानों की खातिरदारी करने के साथ यदा कदा घर में बनाया ही जाता है। लेकिन सरकारी तौर पर बनाया जाने वाला हलवा की बात ही कुछ और है। इस हलवा की चर्चा संसद में तक हुई है। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि यह हलवा अन्य हलवा से कितना भिन्न है। सरकारी स्तर पर हलवा बनाने की यह परम्परा अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही है और अभी भी बदस्तूर जारी है।

      हम बात कर रहे हैं केंद्रीय वित्त मंत्रालय में बजट से करीब एक सप्ताह पहले आयोजित हलवा समारोह की। वैसे तो हलवा समारोह हर साल संसद में बजट पेश करने के पहले बजट को तैयार करने वाले अधिकारियों / कर्मचारियों का मुंह मीठा करवाने के लिए आयोजित किया जाता है और इसे एक सामान्य वार्षिक प्रक्रिया के रूप में ही मानते रहे हैं। लेकिन पिछले वर्ष हलवा समारोह की चर्चा संसद और मीडिया में हुई जिससे देश की जनता को पता चला कि जिसे वे / हम साधारण मिष्ठान मानते थे, वह तो सब मिठाईयों का सरताज बन गया है।

     दरअसल, बजट पेश होने से कुछ दिन पहले वित्त मंत्रालय में एक विशेष आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़े कड़ाह में हलवा बनाया जाता है। इस समारोह में वित्त मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और बजट निर्माण से जुड़े कर्मचारी शामिल होते हैं। इसके साथ ही बजट दस्तावेज़ों पर काम करने वाले सभी अधिकारी लॉक-इन पीरियड” में प्रवेश कर जाते हैं अर्थात बजट दस्तावेज तैयार करने वाले अधिकारी और कर्मचारी मंत्रालय परिसर में ही रहते हैं और बजट पेश होने तक किसी भी बाहरी संपर्क से दूर रहते हैं। हलवा समारोह का सबसे बड़ा महत्व बजट की गोपनीयता सुनिश्चित करना होता है ताकि करों, योजनाओं और आर्थिक फैसलों से जुड़ी कोई भी जानकारी समय से पहले बाहर न जाए। वैसे भी भारतीय परंपरा में किसी भी कार्य की शुरुआत मिठाई से करना शुभ माना जाता है। और बजट जैसे राष्ट्रीय महत्व के दस्तावेज़ के अंतिम चरण की शुरुआत हलवे से करना यह दर्शाता है कि सरकार इस प्रक्रिया को केवल तकनीकी नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और मानवीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानती है।

हलवा समारोह की शुरूआत कब हुई, इसका कोई निश्चित वर्ष नहीं पता लेकिन हलवा समारोह की परंपरा ब्रिटिश शासन काल से चली आ रही है। पहले बजट दस्तावेज़ों की छपाई नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में होती थी  और वहीं यह हलवा समारोह का आयोजन किया जाता था। आज भले ही बजट डिजिटल माध्यम से तैयार होता हो, लेकिन यह परंपरा आज भी जीवित है, क्योंकि यह  परम्परा संस्थागत अनुशासन और निरंतरता का प्रतीक बन चुकी है।

      सन 2014 के पहले बजट संसद में फ़रवरी के आख़िरी कार्यदिवस को शाम 5 बजे पेश किया जाता था। शाम पांच बजे बजट पेश करने के पीछे एक प्रमुख कारण यह था कि उस समय ब्रिटेन में सुबह होती थी। वर्ष 2017 से बजट को 1 फ़रवरी, सुबह 11 बजे पेश करने की परंपरा शुरू हुई। इससे पहले रेल बजट और आम बजट अलग-अलग पेश किए जाते थे। अब दोनों को मिलाकर एक ही बजट प्रस्तुत किया जाता है, जिससे नीति निर्माण और क्रियान्वयन में समय की बचत होती है।

सभी भाषाओं एक ही शब्द हलवा

  

हलवाशब्द मूलतः अरबी के हल्वा (Ḥalwā)” से आया है, जिसका अर्थ है मीठा पदार्थ 
 भारत में यह शब्द लगभग सभी भाषाओं में समान अर्थ और समान पहचान के साथ प्रचलित है

  भारत की भाषाई विविधता में कुछ शब्द ऐसे हैं जो लगभग हर भाषा में समान रूप से स्वीकार किए गए हैं। हलवा  भी ऐसा ही एक शब्द है। मिठास और शुभता का प्रतीक यह व्यंजन केवल स्वाद तक सीमित नहीं, बल्कि भाषा और संस्कृति के साझा ताने-बाने को भी प्रदर्शित करता है।

    हिंदी और उर्दू में इसे सीधे हलवा कहा जाता है। मराठी, पंजाबी और राजस्थानी में भी उच्चारण लगभग वही अर्थात हलवा ही रहता है। गुजराती में यही शब्द हलવો बन जाता है, जबकि बंगाली और असमिया में इसे हालुआ या हालुवा कहा जाता है। ओड़िया, मैथिली, भोजपुरी और अवधी जैसी भाषाओं में भी इसका रूप हलुआ ही मिलता है।

     दक्षिण भारत में पहुँचते-पहुँचते हलवा की भले ही लिपि बदल जाती है, लेकिन शब्द नहीं। तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालमसभी भाषाओं में यह हल्वा के रूप में जाना जाता है। स्वाद और अर्थ हर जगह एक-सा रहता है, भले ही उच्चारण थोड़ा अलग हो जाता है।

2026 का हलवा समारोह

       केंद्रीय बजट 2026-27 की तैयारी करने की प्रक्रिया को शुरू करने के पहले 27 जनवरी को नॉर्थ ब्लॉक स्थित बजट प्रेस में ‘हलवा समारोह’ आयोजित किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी उपस्थित थे। केंद्रीय बजट 2026-27 एक फरवरी, 2026 को पेश किया जाएगा।

     आम बजट, अनुदान की मांगें, वित्त विधेयक आदि सहित केंद्रीय बजट के सभी दस्तावेज "यूनियन बजट मोबाइल ऐप" पर उपलब्ध होंगे। इससे सांसदों और आम जनता को डिजिटल माध्यम से बजट दस्तावेजों तक आसानी से पहुंच प्राप्त हो सकेगी। यह ऐप अंग्रेजी और हिंदी में है तथा एंड्रॉइड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्मों पर उपलब्ध होगा। इस ऐप को केंद्रीय बजट वेब पोर्टल  www.indiabudget.gov.in  से भी डाउनलोड किया जा सकता है।

       केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा 1 फरवरी, 2026 को संसद में बजट भाषण समाप्त होने के बाद बजट दस्तावेज मोबाइल ऐप और वेबसाइट पर उपलब्ध होंगे ।