प्रयागराज महाकुंभ 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व मिलने की उम्मीद
प्रयागराज महाकुंभ 2 लाख करोड़ रुपए से
अधिक का राजस्व मिलने की उम्मीद
प्रयागराज । उत्तरप्रदेश का प्रयागराज विश्व के सबसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन महाकुंभ में आस्था की डुबकी लगाने के लिए आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की अगवानी के लिए पूरी तरह तैयार है। सोमवार, 13 जनवरी से शुरू होने वाले इस महापर्व का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पक्ष समृद्ध तो है ही, लेकिन आयोजन का आर्थिक पक्ष भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। महाकुंभ 2025 से उम्मीद जाहिर की जा रही है कि देश-दुनिया से करीब 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालु प्रयागराज की पवित्र धरती पर आएंगे। इस कारण केंद्र और उत्तरप्रदेश सरकार ने वहां बुनियादी सहित अन्य सुविधाओं पर भारी निवेश किया है। करीब 45 दिन तक चलने वाले इस आयोजन का लाभ व्यापार जगत भी उठाने के लिए तैयार है।
13 जनवरी से 26 फरवरी तक चलने वाले महाकुंभ को लेकर उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है। पिछले महीने दिसम्बर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संगम नगरी में 5,500 करोड़ रुपए की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और लोकार्पण किया। बड़ी संख्या में श्रद्दालुओं के प्रयागराज आने की सम्भावना के मद्देनजर उत्तरप्रदेश सरकार ने 4000 हेक्टेयर क्षेत्र में मेला आयोजित करने का फैसला लिया है जबकि 1800 हेक्टेयर क्षेत्र में पार्किंग की व्यवस्था की गई है। मेला क्षेत्र को 25 अलग-अलग सेक्टरों में बांटा गया है। श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए करीब 1.6 लाख टेंट बनाए गये हैं। इसके अलावा संगम में अलग-अलग स्थलों पर 30 पीपा पुलों का निर्माण किया गया है। प्रयागराज और कुंभ मेला के आसपास के क्षेत्रों में करीब 400 किलोमीटर अस्थायी सड़कें बनाई गई हैं। करीब 67,000 से अधिक स्ट्रीट लाइट्स लगी हैं। इसके अलावा प्रयागराज में कुंभ मेले के चलते 14 नए ओवरब्रिज, 61 नई सड़कें और 40 अलग-अलग चौराहों का सौंदर्यीकरण किया गया है। महाकुंभ में बिजली आपूर्ति के लिए उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा दो नए विद्युत सबस्टेशन बनाए गए हैं और 66 नए ट्रांसफार्मर लगाए हैं। मेला में पानी की आपूर्ति के लिए 1,249 किलोमीटर की पाइपलाइन बिछाई गई है। इसके अलावा डेढ़ लाख से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया है। साफ सफाई के लिये 10,000 से अधिक सफाईकर्मियों को तैनात किया गया है। हरित कुंभ की परिकल्पना को साकार करने के उद्देश्य से 3 लाख से अधिक पौधे भी लगाए गए हैं। महाकुम्भ में सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है।
पिछले दिनों केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की थी कि महाकुंभ के दौरान 3,000 विशेष रेलगाड़ियां सहित 13,000 रेलगाड़ियां चलाई जाएंगी। साथ ही श्रद्धालुओं के लिए 7,000 से अधिक बसें और 200 से अधिक चार्टर फ्लाइट नियमित उड़ानों के साथ उपलब्ध होंगी।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के मुताबिक, सरकार को वर्ष 2013 के कुंभ में 12,000 करोड़ रूपये और 2019 के अर्धकुंभ में 1.2 लाख करोड़ का राजस्व मिला था। महाकुंभ 2025 में यह राजस्व बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपए से 2.5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। सन 2019 में हुए अर्धकुंभ में करीब 6 लाख लोगों को अलग-अलग क्षेत्रों में रोजगार मिला था, जो इस साल डेढ़ गुणा तक बढ़ सकता है। उत्तरप्रदेश पर्यटन विभाग के मुताबिक अब तक 45000 परिवारों को इस आयोजन के चलते रोजगार मिल चुका है। राज्य सरकार ने 2024-25 के बजट में महाकुंभ के लिए 2,500 करोड़ रुपए आवंटित किए थे, जबकि केंद्र ने 2,100 करोड़ का विशेष आर्थिक सहायता दी है । इस तरह महाकुंभ के लिए राज्य सरकार, केंद्र सरकार और अन्य विभागों द्वारा अब तक कुल 6,382 करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं। इसमें से लगभग 5,600 करोड़ रुपए इवेंट मैनेजमेंट और अधोसंरचना विकास पर खर्च हए हैं। वर्ष 2019 के अर्धकुंभ में सरकार ने कुल 3700 करोड़ रुपये खर्च किए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, 45 दिनों के महाकुंभ में संभावित खपत को देखते हुए, कंपनियां ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर करीब 3,000 करोड़ रुपए खर्च करने की योजना बना रही है।
महाकुंभ 2025 छोटे दुकानदारों और कारीगरों के लिए अपने उत्पाद बेचने का एक बड़ा मौका है। इसका सबसे अधिक लाभ स्थानीय दुकानदारों और कारीगरों को मिलता है। तीर्थ यात्री बड़ी मात्रा में भोजन, कपड़े, धार्मिक वस्तुएं और पूजा पाठ से जुड़ी वस्तुएं खरीदते हैं। इसके अलावा स्थानीय व्यंजनों, कला और हस्तशिल्प की मांग भी बढ़ जाती है जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देते हैं। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के आंकड़ों के मुताबिक, महाकुंभ 2025 में दैनिक जीवन की चीजों का कारोबार 17,310 करोड़ रुपए से भी अधिक के होने की उम्मीद है। सिर्फ पूजा सामग्री की करीब 2000 करोड़ रूपये और फूलों की 800 करोड़ रूपये की बिक्री होने का अनुमान लगाया गया है । इसके अलावा मेले के दौरान करीब 4000 करोड़ रुपए के डेयरी उत्पाद, 4000 करोड़ रुपए का किराना सामान और 500 करोड़ के अन्य घरेलू सामान के कारोबार होने की संभावना है। होटल व्यवसाय और टैक्सी संचालकों को भी इस आयोजन से अच्छा खासा फायदा मिलने का संभावना है।
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