21वें कल्याण महाकुंभ में उमड़ा आस्था का सैलाब,

56 भोग की झांकी और अतिरुद्र महायज्ञ ने भक्तों को किया भावविभोर

 

निम्बाहेड़ा, 4 जुलाई। मेवाड़ के प्रसिद्ध श्री शेषावतार कल्लाजी वेदपीठ में आयोजित 21वें कल्याण महाकुंभ के चौथे दिन शनिवार को भक्ति, वैदिक परंपरा और धार्मिक अनुष्ठानों का अद्भुत संगम देखने को मिला। ठाकुर श्री कल्लाजी के श्रीनाथ स्वरूप का मनोहारी श्रृंगार, 56 भोग की आकर्षक झांकी, 51 कुंडीय श्री अतिरुद्र महायज्ञ, श्री लिंग महापुराण कथा और संतों के प्रेरक प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक भाव से सराबोर कर दिया। दिनभर हजारों श्रद्धालुओं ने वेदपीठ पहुंचकर दर्शन-पूजन किया और धार्मिक आयोजनों में सहभागिता निभाई।

श्रीनाथ स्वरूप के दिव्य श्रृंगार और 56 भोग की झांकी ने मोहा मन

चौथे दिन वेदपीठ पर सतरंगी पुष्पों से सजे कल्याण नगरी के राजाधिराज ठाकुर श्री कल्लाजी के श्रीनाथ स्वरूप का अलौकिक श्रृंगार किया गया। उनके समक्ष सजाई गई 56 भोग की भव्य झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। बड़ी संख्या में पहुंचे भक्तों ने अपने आराध्य के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर कहा कि ठाकुरजी का ऐसा वैभव और ठाठ केवल वेदपीठ पर ही देखने को मिलता है।

इससे पूर्व ठाकुरजी का 21 पवित्र द्रव्यों से महाभिषेक किया गया। इसके बाद वेदपीठ के आचार्यों और बटुकों ने वैदिक विधि-विधान से उनका आकर्षक श्रृंगार किया। सतरंगी पुष्पों से सुसज्जित वेदपीठ की मनोहारी छटा ने पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया।

अरणि मंथन से प्रकट हुई यज्ञाग्नि, शुरू हुआ 51 कुंडीय अतिरुद्र महायज्ञ

कल्याण महाकुंभ के अंतर्गत शनिवार को वैदिक मंत्रोच्चार और ऋग्वेद के अग्निसूक्तों के बीच अरणि मंथन द्वारा यज्ञाग्नि प्रकट कर 51 कुंडीय श्री अतिरुद्र महायज्ञ का शुभारंभ किया गया। ठाकुरजी के जयघोषों के बीच प्रकट हुई अग्नि को सभी यज्ञकुंडों में स्थापित किया गया।

महायज्ञ में लगभग 250 युगल यजमानों ने गौघृत एवं शाकल्य की आहुतियां अर्पित कर विश्व कल्याण, उत्तम वर्षा, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। यज्ञ से पूर्व पुरुष यजमानों का दशविधि हेमाद्रि स्नान कराकर वैदिक परंपरा के अनुसार यज्ञशाला में प्रवेश कराया गया।

रविवार को भगवान जगन्नाथ के 56 भोग का होगा न्योछावर

महाकुंभ के पांचवें दिन रविवार को वेदपीठ पर विराजमान ठाकुर श्री कल्लाजी को भगवान जगन्नाथ स्वामी को अर्पित किए जाने वाले 56 भोग का विशेष न्योछावर किया जाएगा। इसके लिए कल्लाजी वैदिक विश्व विद्यालय परिसर से 56 प्रकार के भोग को सुसज्जित बैलगाड़ियों में बैंड-बाजों और ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य शोभायात्रा के रूप में वेदपीठ लाया जाएगा।

भगवान शिव की कृपा से मृत्यु और संकट भी कुछ नहीं बिगाड़ सकते : स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ

नेमीशारण्यम परिसर स्थित विश्वरूपम कथा मंडप में भानपुरा पीठाधीश्वर शंकराचार्य परम पूज्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ महाराज ने श्री लिंग महापुराण कथा के चौथे दिन भगवान शिव, नंदी और शिवभक्ति का महत्व बताया।

उन्होंने कहा कि यज्ञ, पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों में द्रव्य, क्रिया तथा मंत्र की शुद्धता अत्यंत आवश्यक है। थोड़ी-सी त्रुटि भी अपेक्षित फल में बाधा बन सकती है। इसलिए प्रत्येक धार्मिक कार्य पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान से करना चाहिए।

स्वामीजी ने महर्षि शिलाद और भगवान शिव के परम भक्त नंदी की कथा सुनाते हुए बताया कि नंदी की अटूट तपस्या और शिवभक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अजर-अमर होने, अपने गणों का अधिपति बनने तथा सदैव अपने समीप रहने का वरदान दिया।

उन्होंने पंचनद के आध्यात्मिक महत्व की व्याख्या करते हुए कहा कि ये पांच नदियां मनुष्य की पांच ज्ञानेंद्रियोंश्रवण, स्पर्श, दृष्टि, रसना और घ्राणकी प्रतीक हैं। इनका संयम ही वास्तविक आध्यात्मिक स्नान है। उन्होंने श्रद्धालुओं से जीवनभर "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करने का आह्वान किया।

वेदपीठ के धार्मिक आयोजन अनुकरणीय : संत दिग्विजयराम

भागवत मर्मज्ञ संत दिग्विजयराम ने श्री कल्लाजी वेदपीठ के धार्मिक आयोजनों की सराहना करते हुए कहा कि 21वां कल्याण महाकुंभ सनातन धर्म के संरक्षण और संवर्धन का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भानपुरा पीठ के शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ के श्रीमुख से श्री लिंग महापुराण कथा का श्रवण श्रद्धालुओं का सौभाग्य है।

उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से वेदपीठ के धर्मप्रचार और सांस्कृतिक संरक्षण के कार्यों में सक्रिय सहयोग देने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान वेदपीठ के न्यासियों एवं पदाधिकारियों ने व्यासपीठ का पूजन किया तथा श्रद्धालुओं ने सामूहिक महाआरती में भाग लिया।

विराट कवि सम्मेलन में गूंजा राष्ट्रभक्ति और वीर रस

महाकुंभ के अंतर्गत शुक्रवार रात्रि कथा मंडप में आयोजित अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन में देशभर से आए कवियों ने वीर रस, राष्ट्रभक्ति, हास्य, श्रृंगार और ओजपूर्ण रचनाओं से देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा।

कवि मुकेश मौलवा (इंदौर), राम भदावर (इटावा), प्रियंका राय (वाराणसी), सचिन सारंग (आगरा), सचिन दीक्षित (आगरा), मोहित शौर्य (गाजियाबाद), अंशुमान आजाद तथा जया धनगर वेदा सहित अनेक रचनाकारों ने प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं।

दीपक पारीक ने मेवाड़ के शौर्य का वर्णन करते हुए वीरता का संदेश दिया, जबकि सचिन सारंग ने सामाजिक एकता और हिंदू समाज की समरसता पर बल दिया। प्रियंका राय ने वीर कल्लाजी के अदम्य साहस पर आधारित रचना प्रस्तुत कर खूब वाहवाही बटोरी। प्रत्येक प्रस्तुति पर कथा मंडप तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।

रविवार को होगी भव्य भजन संध्या

महाकुंभ के पांचवें दिन रविवार रात्रि "श्री कल्याण संकीर्तन" के अंतर्गत भव्य भजन संध्या का आयोजन होगा। इसमें रतलाम के जीतू धोरा, कुचामन सिटी के मुकेश पुरोहित, चित्तौड़गढ़ की माही जोशी तथा कल्याण नगरी के अखिलेश ठाकुर अपनी भक्ति प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को भावविभोर करेंगे।