धार्मिक-सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र बनेगा धार

भोपाल। भोजशाला को लेकर मध्यप्रदेश सरकार अब एक बड़े धार्मिक-सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकास की दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उच्च न्यायालय के 15  मई के ऐतिहासिक बहुप्रतीक्षित  फैसले के बाद संकेत दिए हैं कि भोजशाला को अयोध्या के राम मंदिर की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इसके पीछे केवल धार्मिक भावना ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण, पर्यटन, रोजगार और क्षेत्रीय विकास की व्यापक रणनीति भी मानी जा रही है।

 अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के साथ-साथ पूरे शहर का व्यापक पुनर्विकास किया गया। वहां सड़कें चौड़ी हुईं, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट विकसित हुए, घाटों का सौंदर्यीकरण हुआ, होटल-धर्मशालाएं बनीं, सुरक्षा व्यवस्था आधुनिक हुई और धार्मिक पर्यटन को विश्वस्तरीय स्वरूप देने का प्रयास किया गया। इसी प्रकार अब धार स्थित भोजशाला के लिए भी सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण और धार्मिक पर्यटन आधारित विकास की चर्चा शुरू हो गई है।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने भोजशाला को वाग्देवी अर्थात मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानते हुए हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिया है। अदालत ने 2003 के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी गई थी। साथ ही अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की सर्वे रिपोर्ट को महत्वपूर्ण आधार माना।

फैसले के तुरंत बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि भोजशाला मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है और इसका संरक्षण तथा विकास सरकार की प्राथमिकता होगी। उन्होंने यह भी कहा कि लंदन के संग्रहालय में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा को वापस भारत लाने के प्रयास किए जाएंगे।

सरकार की संभावित विकास योजना को कई हिस्सों में देखा जा सकता है...... 

1. धार्मिक एवं सांस्कृतिक पुनर्स्थापना

भोजशाला को केवल पुरातात्विक स्मारक नहीं, बल्कि सरस्वती आराधना केंद्र के रूप में स्थापित करने का प्रयास होगा। यहां नियमित पूजा-अर्चना, वसंत पंचमी जैसे आयोजनों का भव्य स्वरूप और संस्कृत-भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े कार्यक्रम शुरू किए जा सकते हैं।

2. पर्यटन केंद्र के रूप में विकास

धार-मांडू क्षेत्र पहले से ही ऐतिहासिक पर्यटन का बड़ा केंद्र है। यदि भोजशाला का विकास अयोध्या की तरह किया जाता है तो यहां देश-विदेश से श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है। इससे होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यापार को बड़ा लाभ मिलेगा।

3. आधारभूत संरचना का विस्तार

संभावना है कि भोजशाला तक बेहतर सड़क संपर्क, पार्किंग, यात्री सुविधाएं, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा तंत्र, गाइड सेंटर और डिजिटल सूचना केंद्र विकसित किए जाएं। धार और इंदौर के बीच धार्मिक पर्यटन सर्किट भी बनाया जा सकता है।

4. ए एस आई  की बड़ी भूमिका

अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को संरक्षण और प्रबंधन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने की बात कही है। इसका अर्थ यह है कि स्मारक के मूल स्वरूप को संरक्षित रखते हुए विकास कार्य किए जाएंगे।

5. राजनीतिक और सांस्कृतिक संदेश

भोजशाला का मुद्दा लंबे समय से सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक विवाद से जुड़ा रहा है। ऐसे में इसका विकास भाजपा सरकार के लिए सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और विरासत संरक्षण के बड़े प्रतीक के रूप में भी देखा जा रहा है।

हालांकि इसके साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं। मुस्लिम पक्ष ने संकेत दिए हैं कि वे फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। इसलिए आने वाले समय में कानूनी प्रक्रिया जारी रह सकती है। सरकार के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की भी होगी। स्वयं मुख्यमंत्री ने जनता से शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की है।

इतिहास और साक्ष्यों की दृष्टि से भोजशाला परमार राजा भोज के काल से जुड़ी मानी जाती है। इसे संस्कृत शिक्षा और मां सरस्वती की उपासना का प्रमुख केंद्र बताया जाता है। बाद में यहां कमाल मौला मस्जिद का निर्माण हुआ और वर्षों तक यह विवाद का विषय बना रहा। अब न्यायालय के फैसले के बाद सरकार इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरणके प्रतीक के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

यदि सरकार वास्तव में अयोध्या मॉडल पर आगे बढ़ती है, तो आने वाले वर्षों में धार का भोजशाला परिसर मध्यभारत का बड़ा धार्मिक-पर्यटन केंद्र बन सकता है। इससे मालवा-निमाड़ क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान को नया आयाम मिलने की संभावना है।